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हव्यवाह (havyavAha)

 
शब्दसागरः
English
हव्यवाह
m.
(-हः) Fire.
E.
हव्य an oblation, and वाह who bears.
Capeller Eng
English
हव्यवाह॑
a.
&
m.
=
prec.
Yates
English
हव्य-वाह (हः) 1.
m.
Idem.
Wilson
English
हव्यवाह
m.
(-हः) Fire.
E.
हव्य an oblation, and वाह who bears.
Monier Williams Cologne
English
हव्य—वाह॑
mfn.
(or -वा॑ह)
=
-वह् (also applied to the Aśvattha tree of whose wood the Araṇi is made),
AV.
TBr.
हव्य—वाह॑
m.
Agni or fire,
MBh.
MārkP.
Benfey
English
हव्यवाह हव्य-वाह, हव्यवाहन
हव्य-वाहन, हव्याश हव्याश, i. e.
हव्य-अश् + अ, and हव्याशन हव्याश-
न, i. e. हव्य-अशन,
m.
Fire, Draup.
2, 10 (वाह)
Rām. 3, 51, 29 (वाहन)
Rājat. 5, 416 (आश).
Apte Hindi
Hindi
हव्यवाह
पुं*
हव्य-वाह -
"आहुतियों को ले जाने वाला, अग्नि"
L R Vaidya
English
havya-vAha {% m. %} fire, (the bearer of oblations).
Bopp
Latin
हव्यवाह m. qui aufert, consumit diis oblata, e
हव्य et वाह ferens, auferens a r. वह् s. अ) ignis. DR.
2. 10.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
वह्निर्बृहद्भानुहिरण्यरेतसौ धनंजयो हव्यहविर्हुताशनः
कृपीटयोनिर्दमुना विरोचनाशुशुक्षणी छागरथस्तनूनपात् १०९७
कृशानुवैश्वानरवीतिहोत्रा वृषाकपिः पावकचित्रभानू
अप्पित्तधूमध्वजकृष्णवर्त्मार्चिष्मच्छमीगर्भतमोघ्नशुक्राः १०९८
शोचिष्केशः शुचिहुतवहोषर्बुधाः सप्तमन्त्र-
ज्वालाजिह्वो ज्वलनशिखिनौ जागृविर्जातवेदाः
बर्हिःशुष्मानिलसखवसू रोहिताश्वाश्रयाशौ
बर्हिर्ज्योतिर्दहनबहुलौ हव्यवाहोऽनलोऽग्निः १०९९
विभावसुः सप्तोदर्चिः स्वाहाग्नेयी प्रियास्य
-wordlist-
वह्नि (पुं), बृहद्भानु (पुं), हिरण्यरेतस् (पुं), धनञ्जय (पुं), हव्याशन (पुं), हविराशन (पुं), हुताशन (पुं), कृपीटयोनि (पुं), दमुनस् (पुं), विरोचन (पुं), आशुशुक्षणि (पुं), छागरथ (पुं), तनूनपाद् (पुं), कृशानु (पुं), वैश्वानर (पुं), वीतिहोत्र (पुं), वृषाकपि (पुं), पावक (पुं), चित्रभानु (पुं), अप्पित्त (क्ली), धूमध्वज (पुं), कृष्णवर्त्मन् (पुं), अर्चिष्मत् (पुं), शमीगर्भ (पुं), तमोघ्न (पुं), शुक्र (पुं), शोचिष्केश (पुं), शुचि (पुं), हुतवह (पुं), उषर्बुध (पुं), सप्तजिह्व (पुं), मन्त्रजिह्व (पुं), ज्वालाजिह्व (पुं), ज्वलन (पुं), शिखिन् (पुं), जागृवि (पुं), जातवेदस् (पुं), बर्हिःशुष्मन् (पुं), अनिलसख (पुं), वसु (पुं), रोहिताश्व (पुं), आश्रयाश (पुं), बर्हिर्ज्योति (पुं), दहन (पुं), बहुल (पुं), हव्यवाह (पुं), अनल (पुं), अग्नि (पुं), विभावसु (पुं), सप्तार्चिस् (पुं), उदर्चिस् (पुं), स्वाहा (स्त्री), आग्नेयी (स्त्री)
नाममाला
Sanskrit
पवनसख, पवमानसख, वायुसख, वातसख, अनिलसख, मरुत्सख, समीरणसख, गन्धवाहसख, श्वसनसख, सदागतिसख, नभस्वत्सख, मातरिश्वसख, चरण्युसख, जवनसख, प्रभञ्जनसख, अग्नि, शिखिन्, वह्नि, पावक, आशुशुक्षणि, हिरण्यरेतस्, सप्तार्चिस्, जातवेदस्, तनूनपात्, स्वाहापति, हुताश, ज्वलन, दहन, अनल, वैश्वानर, कृशानु, रोहिताश्व, विभावसु, वृषाकपि, समीगर्भ, हव्यवाह, हुताशन
तत्सखाऽग्निः शिखी वह्निः पावकश्चाशुशुक्षणिः
हिरण्यरेता सप्तार्चिर्जातवेदास्तनूनपात् ६४
स्वाहापतिर्हुताशश्च ज्वलनो दहनोऽनलः
वैश्वानरः कृशानुश्च रोहिताश्वो विभावसुः ६५
वृषाकपिः समीगर्भो हव्यवाहो हुताशनः
verse 0.1.1.64
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शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
हव्यवाहः,
पुं,
हव्यं वहतीति वह + अण् ।)अग्निः इति रत्नमाला
(यथा, महा-भारते २२४ ५८ ।“एतच्छ्रुत्वा हुतवहाद्भगवान् सर्व्वलोकभृत् ।हव्यवाहमिदं वाक्यमुवाच प्रहसन्निव
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
हव्यवाह
पु०
हव्यं वहति देवान् वह--अण् अग्नौ रत्नमा०२ चित्रकवृक्षे
Capeller
German
हव्यवाह॑ u.
°वाहन॑ dass.