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श्वि (zvi)

 
शब्दसागरः
English
श्वि (इर टु and ओ) टुओश्वि r. 1st cl. (श्वयति)
1. To move, to go, or go to.
2. To grow, to increase.
3. To swell. With उद्, To swell.
Yates
English
श्वि (औ ट) श्वयति 1.
a. To move
to increase.
Wilson
English
श्वि (इर टु and ओ) टुओश्वि r. 1st cl. (श्वयति)
1 To move, to go, or go to.
2 To grow, to increase.
Apte
English
श्वि [śvi], 1
P.
(श्वयति, शिश्वाय-शुशाव, अश्वत्-अश्वयीत्-अशिश्वियत्, श्वयिष्यति, श्वयितुम्, शून)
To grow, increase (fig. also), so swell (as the eye)
रुदतो$शिश्वियच्चक्षुरास्यं हेतोस्तवाश्वयीत्
Bk.*
6.19, 31
14.79
15.3.
To thrive, prosper.
To go, approach, move towards. -With उद्
to swell, increase, grow
प्रबलरुदितोच्छूननेत्रम् (मुखम्)
Me.*
86.
to be proud, be puffed up with pride.
Apte 1890
English
श्वि {c1c} P. (श्वयति, शिश्वाय-शुशाव, अश्वत्-अश्वयीत्-अशिश्वियत्, श्वयिष्यति, श्वयितुं, शून) 1 To grow, increase (fig. also), to swell (as the eye)
रुदतोऽशिश्वियच्चक्षुरास्यं हेतोस्तवाश्वयीत् Bk. 6. 19, 31
14. 79, 15. 30.
2 To thrive, prosper.
3 To go, approach, move towards.
WITH उद् {1} to swell, increase, grow
प्रबलरुदितोच्छूननेत्रं (मुखं) Me. 84. {2} to be proud, be puffed up with pride.
Monier Williams Cologne
English
श्वि (connected with शू
sometimes written श्वा)
cl.
1.
P.
(Dhātup. xxiii, 41) श्व॑यति (pf. शिश्वाय, or शुशाव
Gr.
aor.
अ॑श्वत्,
ŚBr.
, अश्वयीत्,
HPariś.
Prec. शूयात्
Gr.
fut. श्वयिता, श्वयिष्यति, ib.
inf.
श्व॑यितुम्,
Br.
),
to swell, grow, increase,
TS.
ŚBr.
&c.
:
Pass.
शूयते (aor. अश्वायि) id.,
Car.
:
Caus.
श्वाययति (aor. अशिश्वयत् [Bhaṭṭ. ] or अशूशवत्) id.
Gr.
:
Desid.
of
Caus.
शिश्वाययिषति or शुशावयिषति, ib. :
Desid.
शिश्वयिषति, ib. :
Intens.
शेश्वीयते (Bhaṭṭ. ), शोशूयते
शेश्वयीति, शेश्वेति, to swell much.
Monier Williams 1872
English
श्वि श्वि (this rt. assumes the form शु,
q. v., in some of its tenses and derivatives
cf. rt. शव्), cl. 1. P. श्वयति, शुशाव or शिश्वाय
(2nd sing. शुशविथ or शिश्वयिथ, 3rd du. शुशु-
वतुस् or शिश्वियतुस्), श्वयिष्यति, अश्वयीत् or
अश्वत् or अशिश्वियत्, Prec. शूयात्, श्वयितुम्, to
swell, increase, grow
to thrive
to appear (Ved.,
see वि-श्वि, referred by some to rt. श्वित्)
to go, ap-
proach: Pass. शूयते, Aor. अश्वायि: Caus. श्वाय-
यति, -यितुम्, Aor. अशूशवत् or अशिश्वयत्, (accord-
ing to others also अशीशवत्): Desid. of Caus. शुशा-
वयिषति or शिश्वाययिषति, to cause to swell or
grow or be prosperous: Desid. शिश्वयिषति: Intens.
शेश्वीयते, शोशूयते, शेश्वयीति, शेश्वेति, to swell
much
[cf. Gr. κυ-έ-ω, κύ-ος, κῦ-μα, κύ-η-μα,
κύ-αρ, κύ-τ-ος, κοῖ-λο-ς, κοιλ-ία, καυλό-ς, κύ-λο-ν,
ἐγ-κισσάω, κίσσα, κύαμος, κύαθος, κῶνος, κηκίς,
κίκυς, (probably also) κίων, κίω, κινέω, perhaps also
κό-μη (for κύ-μη): Lat. in-ci-ens, cu-mu-lu-s,
cavu-s, cau-li-s, cau-lœ, cœlu-m, ciliu-m, super-
cili-um, cuneus, crescere
coma: Goth. us-hul-
on, hul-undi: Old Germ. hol, (according to some)
wī-t, ‘wide’ (= श्वित): Angl. Sax. hol: Hib. cin-
neas, cinneachdin, ‘growth, increase.’]
Macdonell
English
श्वि ŚVI, v. श्वा ŚVĀ.
Benfey
English
श्वि श्वि, i. 1, Par.
1. To swell,
Bhaṭṭ. 6, 19.
2. To increase
ved.
शूशुवंस्, anomal. ptcple. of the red. pf.
Large, Chr. 291, 15 = Rigv. i. 92, 15.
3. To go. Ptcple. of the pf. pass.
शून।
1. Swelled, swollen, Suśr. 2,
134, 3.
2. Increased.
3. Morbidly
swollen. -- With the prep. उद् उद्, उच्-
छून,
1. Swollen, Megh. 82
Rājat.
5, 271
turgid.
2. Lofty, high.
3. Fat,
bulky. -- With प्रोद् प्र-उद्, प्रोच्-
छून, Swelled, swollen. -- Cf.
κίων, κίω, κινέω
κύω, κῦμα, ἐγ-κισσάω, κίσσα, κύαμος, κοῖλος, κύλα, κύτος, κυτίς, κύαθος, κῶνος, κηκίς
and κίκυς
(based on the
frequent.)
Lat. cuneus, cumulus,
super-cilia, crescere
Goth. us-hulon
A.S. hol
see शून्य।
Apte Hindi
Hindi
श्वि
"भ्वा* पर* , " - -
"विकसित होना, बढ़ना , सूजना (जैसे आँख का)"
श्वि
"भ्वा* पर* , " - -
"फलना-फूलना, समृद्ध होना"
श्वि
"भ्वा* पर* , " - -
"जाना, पहुँचना, अभिमुख चलना"
L R Vaidya
English
Svi {% vt. or vi. 1P (pp. शून
pres. श्वयति) %} 1. To swell, रुदतोऽशिश्वियच्चक्षुः Bt.vi.19
2. to grow, to increase, to thrive
3. to go, to move.With उद्-, to swell, प्रबलरुदितोच्छूननेत्रं प्रियायाः Megh.ii.21.
Bopp
Latin
श्वि 1. P. श्वयामि, praet. mltf. अश्वयिषम् (gr. 403.), अ-
श्वम् (gr. 416.) et अशिश्वियम् (gr. 423.), praet. redupl.
शिश्वय, शिश्वाय vel शुशव, शुशाव, a correptâ formâ
शु (PAN. VI. 1. 30.), prec. शूयासम्
pass. शूये (gr.
426.), part. शून.
1) crescere, accrescere, tumescere.
RIGV. V. 74. 6. (v. Westerg.): ते स्वेन शवसा शूशुवुः,
producto in syll. redupl., ita शूशुवस् qui crevit, tur-
gidus, magnus. RIGV. 64. 15.: शूशुवांसम्. -- Caus.
facere ut crescat, augere. RIGV. 54. 7.: शूशुवत्. (Lat.
crescere, mutato v in r, sicut in cras = श्वस्, v. gr. comp.
20.
cu-mulus, nisi pertinet ad चि
gr. ϰύω, ϰύημα, ϰῦμα, ϰυΐσϰω, ϰύτος,
v. शून्य
fortasse ϰίων e ϰϜίων
cf. Benfey II. 164. sq. Huc etiam traxerim germ. vet.
wî-t amplus, latus, vastus = श्वित, sicut regularis parti-
cipii pass. forma sonaret, abjectâ consonante initiali, si-
cut in wîz albus, v. श्वेत. Cf. etiam hib. cinneas «growth,
increase», cinneachdin id. Fortasse lat. coma, gr. ϰό-μη
e cu-ma, ϰύ-μη a crescendo dicta (v. रोमन्, शिरोरुह,
वृध्), nisi pertinent ad क, v. केश.)
c. वि crescere, tumescere, se dilatare, extendere, diffun-
dere. RIGV. 92. 12.: व्यश्वैत् (उषाः)
113. 15.: प्रथमो
ऽषा व्यश्वैत्.
Kridanta Forms
Sanskrit
श्वि (टुओँश्वि꣡ गतिवृद्ध्योः - भ्वादिः - सेट्)
ल्युट् = श्वयनम्
अनीयर् = श्वयनीयः - श्वयनीया
ण्वुल् = श्वायकः - श्वायिका
तुमुँन् = श्वयितुम्
तव्य = श्वयितव्यः - श्वयितव्या
तृच् = श्वयिता - श्वयित्री
क्त्वा = श्वयित्वा
ल्यप् = प्रशूय
क्तवतुँ = शूनवान् - शूनवती
क्त = शूनः - शूना
शतृँ = श्वयन् - श्वयन्ती
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
श्वि
मूलधातुः:
टुओश्वि
धात्वर्थः:
गति-वृद्ध्योः
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
अकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
श्वयति
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
श्वि, प्रस्फाय्, उत्स्फाय्, स्फाय्
verb
आघातेन रोगेण वा शरीरस्य अवयवस्य वर्धनानुकूलः व्यापारः।
"आघातेन तस्य जानु श्वयति।"
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
श्वि, टु इर् गतिवृद्ध्योः इति कविकल्प-द्रुमः
भ्वा०-पर०-सक०-सेट् ।) तालव्यादिः ।टु, श्वयथुः ऐ, शूयात् ओ, शूनः इर्, अश्वत अश्वयीत् इति दुर्गादासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
श्वि गतौ
सक०
वृद्धौ अक०
भ्वा०
पर०
यजा० सेट् श्वयति अशि-श्वत्--अश्वत्--अश्वयात् ट्वित् श्वयथुः ओदित् निष्ठा तस्यनः शूनः
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“2 श्वि गतिवृद्ध्योः”@} 3 यजादिः।
श्वायकः-यिका, श्वायकः-यिका, शिश्वयिषकः-षिका, 4 शेश्वीयकः-शोशूयकः-यिका
श्वयिता-त्री, श्वाययिता-त्री, शिश्वयिषिता-त्री, शेश्वीयिता-शोशूयिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककिधातुवत् 5 बोध्यानि।
6 शूनः- 7 उच्छूनः-शूनवान्, 8 उदश्वित्, 9 श्वयथुः, 10 इति निपातनात् साधुः।
मातरि = सर्वस्य परिच्छेत्तरि आकाशे श्वयति = वर्धते इति मातरिश्वा वायुः।
‘तत्पुरुषे कृति--’ 11 इति सप्तम्या अलुक्।]] श्वा-मातरिश्वा, 12 शवः, 13 श्वयीचिः, इत्यादीनि विशेषरूपाणि।
14 शेश्वीयमानः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१८०३)
02
=>
[टु अओ]
03
=>
(१-भ्वादिः-१०१०। सक। अक। सेट्। पर।)
04
=>
[[५। यङन्ते ‘विभाषा श्वेः’ (६-१-३०) इति सम्प्रसारणविकल्पः। सम्प्रसारणपक्षे पूर्वरूपहलादिशेषादिषु शोशूयकः इत्यादीनि रूपाणि। सम्प्रसारणाभावपक्षे शेश्वीयकः इत्यादीनि रूपाणीति ज्ञेयम्।]]
05
=>
(१८९)
06
=>
[[६। निष्ठायाम् यजादित्वात् (६-१-१५) सम्प्रसारणम्, ‘श्वीदितः--’ (७-२-१४) इतीण्निषेधः। ‘ओदितश्च’ (८-२-४५) इति निष्ठातकारस्य नकारः। अत्र न्यासः “ओदितश्च’ (८-२-४५) इति ओदितोऽनन्तरस्य निष्ठातकारस्य नत्वविधानादेवेडभा- वस्य सिद्धेः श्वयतिग्रहणं (७-२-१४ सूत्रे इति शेषः) शक्यमकर्तुम्” इति। ‘वैचि- त्र्यार्थम् ग्रहणम्’ इति समाहितं च। परं तु ‘ओ लडि’ इत्यादिषु व्यवहितेऽपि निष्ठानत्वस्य कैश्चिदङ्गीकृतत्वात् तद्वदत्र मा भूदित्येवमर्थं ग्रहणमिति युक्तं समाधानम्।]]
07
=>
[पृष्ठम्१३३२+ ३०]
08
=>
[[१। उदकेन श्वयतीति उदश्वित् तक्रम्। क्विपि, तुकि रूपमेवम्। ‘उदकस्योदः संज्ञायाम्’ (६-३-५७) इति उदकशब्दस्य उदादेशः। ‘उदश्वितोऽन्यतरस्याम्’ (४-२-१९) इति निर्देशसामर्थात् यजादित्वेऽपि सम्प्रसारणं क्विब्विषये इत्यव- धेयम्।]]
09
=>
[[२। ‘ट्वितोऽथुच्’ (३-३-८९) इत्यथुच्प्रत्ययो भावे। श्वयथुः = कुष्ठरोगविशेषः। ‘रोगाख्यायाम्--’ (३-३-१०८) इति ण्वुलोऽपवादोऽप्ययमिति केचित्।]]
10
=>
[[३। श्वयति = गच्छति निरन्तरमिति श्वा = शुनकः। ‘श्वनुक्षन्--’ [द। उ। ६-५५]
11
=>
(६-३-१४)
12
=>
[[४। श्वयति सन्त्यक्तः प्राणिभिरिति शवः इति दशपाद्युणाद्याम् (९-५३) उक्तम्। ‘शवतिर्गतिकर्मा कम्बोजेषु, विकार एवैनमार्याः प्रभाषन्ते’ (पस्पशाह्निके) इति भाष्यविरोधादेतदुपेक्ष्यम्।]]
13
=>
[[५। श्वयति वर्धते इति श्वयीचिः चन्द्रमाः। औणादिके (द। उ। १-४०) ईचिप्रत्यये साधुः।]]
14
=>
[[आ। ‘आबद्धभीमभ्रुकुटिविभङ्गः शोश्वीयमानारुणरौद्रनेत्रः।’ भ। का। ३-३०।]]
Capeller
German
श्वि s. श्वा.
Burnouf
French
*श्वि श्वि। श्वयामि 1
p. शुशाव et
शिश्वाय
f2. श्वयिष्यामि
a1. अश्वयिषम्
a2.
अश्वम्
pqp. अशिश्वियम्
o. शूयासम्
ppf. vd.
शूशुवस्। {@Ps.@} शूये
pp. शून। S'enfler, grossir.
se tuméfier
अस्य कुक्षिस् शुशाव son ventre se gonfla.
Croître, s'accroître, grandir: उषा अश्वेत् l'aurore a grandi,
Vd.
Gr.
ϰύω, ϰῦμα.
Stchoupak
French
श्वि-
v. शू-।