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श्रीकर (zrIkara)

 
शब्दसागरः
English
श्रीकर
mfn.
(-रः-रा or री-रं) Giving fortune or prosperity.
m.
(-रः)
VISHṆU.
n.
(-रं) The red lotus.
E.
श्री fortune, and कर who makes or
confers.
Capeller Eng
English
श्रीकर
a.
causing welfare or splendour.
Yates
English
श्री-कर (रः) 1.
m.
Vishnu.
n.
Red
lotus.
a. Giving prosperity.
Spoken Sanskrit
English
श्रीकर zrIkara
adj.
giving good fortune
श्रीकर zrIkara
adj.
causing prosperity
श्रीकर zrIkara
m.
of various authors
श्रीकर zrIkara
n.
red lotus
Wilson
English
श्रीकर
mfn.
(-रः-रा-री-रं) Giving fortune or prosperity.
m.
(-रः) VIṢṆU.
n.
(-रं) The red lotus.
E.
श्री fortune, and कर who makes or confers.
Monier Williams Cologne
English
श्री—कर mf(आ, or ई)n. causing prosperity, giving good fortune,
Hcat.
श्री—कर
m.
N.
of Viṣṇu,
L.
(also with मिश्र, भट्ट, आचार्य) of various authors
&c.
,
Cat.
श्री—कर
n.
the red lotus,
L.
Apte Hindi
Hindi
श्रीकरः
पुं*
श्री-करः -
विष्णु का विशेषण
श्रीकरम्
नपुं*
श्री-करम् -
लाल कमल
L R Vaidya
English
SrI-kara {% (I) m. %} an epithet of Vishṇu.
SrI-kara {% (II) n. %} the red lotus.
Aufrecht Catalogus Catalogorum
English
श्रीकर father of Śrīnātha (Ācāracandrikā etc.).
श्रीकर poet. Skm. Padyāvalī.
श्रीकर a writer on dharma. Quoted by Vijñāneśvara
Oxf. 356^a, by Śūlapāṇi Oxf. 283^a, in Smṛtyarthasāra
Burnell 135^a, in Vivādārṇavabhaṅga Peters. 2, 118.
श्रीकर a grammarian. Quoted in Mādhavīyadhātuvṛtti
and by Rāyamukuṭa.
श्रीकर
Tripurasundarīpūjana.
श्रीकर a writer on dharma. Quoted by Devaṇṇa in
Smṛticandrikā, by Hemādri in Pariśiṣṭakhaṇḍa 2,
900. 903.
श्रीकर grammarian. Quoted in Tattvacintāmaṇi by
Gaṅgeśa.
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
नारायणे तीर्थपादः पुण्यश्लोको वलिंदमः
उरुक्रमोरुगायौ तमोघ्नः श्रवणोऽपि ६३
उदारथिर्लतापर्णः समुद्रः पांसुजालिकः
चतुर्व्यूहो नवव्यूहो नवशक्तिः प्रगण्डजित् ६४
द्वादशमूलः शतको दशावतार एकदृक्
हिरण्यकेशः सोमोऽहिस्त्रिधामा त्रिककुन्त्रिपात् ६५
मानंजरः पराविद्धः पृश्निगर्भोऽपराजितः
हिरण्यनाभः श्रीगर्भो वृषोत्साहः सहस्रजित् ६६
उर्ध्वकर्मा यज्ञधरो धर्मनेमिरसंयुतः
पुरुषो योगनिद्रालुः खण्डास्यः शलकाजितौ ६७
कालकुण्ठो वरारोहः श्रीकरो वायुवाहनः
वर्धमानश्चतुर्दंष्ट्रो नृसिंहवपुरव्ययः ६८
कपिलो भद्रकपिलः सुषेणः समितिंजयः
क्रतुधामा वासुभद्रो बहुरूपो महाक्रमः ६९
विधाताधार एकाङ्गो वृषाक्षः सुवृषोऽक्षजः
रन्तिदेवः सिन्धुवृषो जितमन्युर्वृकोदरः ७०
बहुशृङ्गो रत्नबाहुः पुष्पहासो महातपाः
लोकनाभः सूक्ष्मनाभो धर्मनाभः पराक्रमः ७१
पद्महासो महाहंसः पद्मगर्भः सुरोत्तमः
शतवीरो महामायो ब्रह्मनाभः सरीसृपः ७२
वृन्दाङ्कोऽधोमुखो धन्वी सुधन्वा विश्वभुक्स्थिरः
शतानन्दश्चरुश्चापि यवनारिप्रमर्दनः ७३
यज्ञनेमिर्लोहिताक्ष एकपाद्द्विपदः कपिः
एकशृङ्गो यमकील आसन्दः शिवकीर्तनः ७४
शद्रुर्वंशः श्रीवराहः सदायोगी सुयामुनः
-wordlist-
तीर्थपाद (पुं), पुण्यश्लोक (पुं), बलिन्दम (पुं), उरुक्रम (पुं), उरुगाय (पुं), तमोघ्न (पुं), श्रवण (पुं), उदारथि (पुं), लतापर्ण (पुं), सुभद्र (पुं), पांशुजालिक (पुं), चतुर्व्यूह (पुं), नवव्यूह (पुं), नवशक्ति (पुं), षडङ्गजित् (पुं), द्वादशमूल (पुं), शतक (पुं), दशावतार (पुं), एकदृश् (पुं), हिरण्यकेश (पुं), सोम (पुं), अहि (पुं), त्रिधामन् (पुं), त्रिककुद् (पुं), त्रिपाद् (पुं), मानञ्जर (पुं), पराविद्ध (पुं), पृश्निगर्भ (पुं), अपराजित (पुं), हिरण्यनाभ (पुं), श्रीगर्भ (पुं), वृषोत्साह (पुं), सहस्रजित् (पुं), ऊर्ध्वकर्मन् (पुं), यज्ञधर (पुं), धर्मनेमि (पुं), असंयुत (पुं), पुरुष (पुं), योगनिद्रालु (पुं), खण्डास्य (पुं), शलिक (पुं), अजित (पुं), कालकुण्ठ (पुं), वरारोह (पुं), श्रीकर (पुं), वायुवाहन (पुं), वर्धमान (पुं), चतुर्दंष्ट्र (पुं), नृसिंहवपुस् (पुं), अव्यय (पुं), कपिल (पुं), भद्रकपिल (पुं), सुषेण (पुं), समितिञ्जय (पुं), क्रतुधामन् (पुं), वासुभद्र (पुं), बहुरूप (पुं), महाक्रम (पुं), विधातृ (पुं), धार (पुं), एकाङ्ग (पुं), वृषाक्ष (पुं), सुवृष (पुं), अक्षज (पुं), रन्तिदेव (पुं), सिन्धुवृष (पुं), जितमन्यु (पुं), वृकोदर (पुं), बहुशृङ्ग (पुं), रत्नबाहु (पुं), पुष्पहास (पुं), महातपस् (पुं), लोकनाभ (पुं), सूक्ष्मनाभ (पुं), धर्मनाभ (पुं), पराक्रम (पुं), पद्महास (पुं), महहंस (पुं), पद्मगर्भ (पुं), सुरोत्तम (पुं), शतवीर (पुं), महामाय (पुं), ब्रह्मनाभ (पुं), सरीसृप (पुं), वृन्दाङ्क (पुं), अधोमुख (पुं), धन्विन् (पुं), सुधन्वन् (पुं), विश्वभुज् (पुं), स्थिर (पुं), शतानन्त (पुं), शरु (पुं), यवनारि (पुं), प्रमर्दन (पुं), यज्ञनेमि (पुं), लोहिताक्ष (पुं), एकपाद् (पुं), द्विपद (पुं), कपि (पुं), एकशृङ्ग (पुं), यमकील (पुं), आसन्द (पुं), शिवकीर्तन (पुं), शद्रु (पुं), वंश (पुं), श्रीवराह (पुं), सदायोगिन् (पुं), सुयामुन (पुं)
Mahabharata
English
Śrīkara = Vishṇu (1000 names).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
श्रीकरं,
क्ली,
रक्तोत्पलम् इति त्रिकाण्डशेषः
श्रीकरः,
पुं,
विष्णुः इति त्रिकाण्डशेषः
स्मृति-ग्रन्थकारविशेषः यथा श्रीकराचार्य्यादि-ग्रन्थादरपराहतविवेकानाम् इति दायभागा-द्यश्लोकटीमायां श्रीकृष्णतर्कालङ्कारः
(श्रियःशोभायाः करः) श्रीकारके, त्रि
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
श्रीकर
न०
श्रियं शोभां करोति कृ--अच् रक्तोत्पले त्रिका०२ विष्णौ
पु०
दायनिबन्धमेदकारके पण्डितभेदे
पु०
।४ शोभाकारके
त्रि०
Capeller
German
श्रीकर u.
°क॑रण Herrlichkeit bewirkend.