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शौटिता-त्री (zauTitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“शौटृ गर्वे”@} 2 गर्वः = अभिमानः।
काशकृत्स्न-हेमचन्द्रादयः धातुममुं पठन्ति।
‘शौडृ--’ इति काशकृत्स्नीये दृश्यते।
शौटकः-टिका, शौटकः-टिका, 3 शुशौटिषकः-षिका, शोशौटकः-टिका
शौटिता-त्री, शौटयिता-त्री, शुशौटिषिता-त्री, शोशौटिता-त्री
इत्यादिकानि रूपाणि सर्वाण्यपि भौवादिककेपतिवत् 4 बोध्यानि।
शतरि 5 प्रशौटन्, 6 शौटीरः इति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(१७५७)
02
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(१-भ्वादिः-२९०। अक। सेट्। पर।)
03
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[[२। सन्नन्ते अभ्यासे ‘एच इग्घ्रस्वादेशे’ (१-१-४८) इति ह्रस्वः इकाररूपः। यङन्तेऽप्येवमेव। परं तु गुणस्तस्येति विशेषः।]]
04
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(२६१)
05
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[[B। ‘प्रशौटदुस्रागणयौटितान्तिकान्…।’ धा। का। १-३९।]]
06
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[[३। औणादिके (द। उ। ८-७२) ईरन्प्रत्यये रूपमेवम्। शौटीरः = गर्वः।]]