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शद्रु (zadru)

 
शब्दसागरः
English
शद्रु
mfn.
(-द्रुः-द्रुः-द्रु)
1. Wasting, decaying, falling, perishing.
2. Going,
moving.
E.
शद् to go, क्रु
aff.
Yates
English
शद्रु (द्रुः-द्रुः-द्रु)
a. Wasting
going.
Spoken Sanskrit
English
शद्रु zadru
adj.
falling
शद्रु zadru
adj.
perishing
Wilson
English
शद्रु
mfn.
(-द्रुः-द्रुः-द्रु)
1 Wasting, decaying.
2 Going, moving.
E.
शद to go, रु
aff.
Apte
English
शद्रु [śadru],
a.
Going, moving.
Falling, perishing, decaying,
P.
III.2.159.
Apte 1890
English
शद्रु a. 1 Going, moving.
2 Falling, perishing, decaying.
Monier Williams Cologne
English
शद्रु
mfn.
falling, perishing
&c.
,
Pāṇ.
iii, 2, 159
शद्रु
m.
N.
of Viṣṇu,
L.
Monier Williams 1872
English
शद्रु, उस्, उस्, उ, falling, perishing, wasting, de-
caying
going, moving.
Apte Hindi
Hindi
शद्रु:
वि* - शद् + रु
"जाने वाला, गतिशील"
शद्रु:
वि* - शद् + रु
"पतनशील, नश्वर, क्षय होने वाला ।"
L R Vaidya
English
Sadru {% a. %} 1. Falling, perishing
2. going, moving.
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
नारायणे तीर्थपादः पुण्यश्लोको वलिंदमः
उरुक्रमोरुगायौ तमोघ्नः श्रवणोऽपि ६३
उदारथिर्लतापर्णः समुद्रः पांसुजालिकः
चतुर्व्यूहो नवव्यूहो नवशक्तिः प्रगण्डजित् ६४
द्वादशमूलः शतको दशावतार एकदृक्
हिरण्यकेशः सोमोऽहिस्त्रिधामा त्रिककुन्त्रिपात् ६५
मानंजरः पराविद्धः पृश्निगर्भोऽपराजितः
हिरण्यनाभः श्रीगर्भो वृषोत्साहः सहस्रजित् ६६
उर्ध्वकर्मा यज्ञधरो धर्मनेमिरसंयुतः
पुरुषो योगनिद्रालुः खण्डास्यः शलकाजितौ ६७
कालकुण्ठो वरारोहः श्रीकरो वायुवाहनः
वर्धमानश्चतुर्दंष्ट्रो नृसिंहवपुरव्ययः ६८
कपिलो भद्रकपिलः सुषेणः समितिंजयः
क्रतुधामा वासुभद्रो बहुरूपो महाक्रमः ६९
विधाताधार एकाङ्गो वृषाक्षः सुवृषोऽक्षजः
रन्तिदेवः सिन्धुवृषो जितमन्युर्वृकोदरः ७०
बहुशृङ्गो रत्नबाहुः पुष्पहासो महातपाः
लोकनाभः सूक्ष्मनाभो धर्मनाभः पराक्रमः ७१
पद्महासो महाहंसः पद्मगर्भः सुरोत्तमः
शतवीरो महामायो ब्रह्मनाभः सरीसृपः ७२
वृन्दाङ्कोऽधोमुखो धन्वी सुधन्वा विश्वभुक्स्थिरः
शतानन्दश्चरुश्चापि यवनारिप्रमर्दनः ७३
यज्ञनेमिर्लोहिताक्ष एकपाद्द्विपदः कपिः
एकशृङ्गो यमकील आसन्दः शिवकीर्तनः ७४
शद्रुर्वंशः श्रीवराहः सदायोगी सुयामुनः
-wordlist-
तीर्थपाद (पुं), पुण्यश्लोक (पुं), बलिन्दम (पुं), उरुक्रम (पुं), उरुगाय (पुं), तमोघ्न (पुं), श्रवण (पुं), उदारथि (पुं), लतापर्ण (पुं), सुभद्र (पुं), पांशुजालिक (पुं), चतुर्व्यूह (पुं), नवव्यूह (पुं), नवशक्ति (पुं), षडङ्गजित् (पुं), द्वादशमूल (पुं), शतक (पुं), दशावतार (पुं), एकदृश् (पुं), हिरण्यकेश (पुं), सोम (पुं), अहि (पुं), त्रिधामन् (पुं), त्रिककुद् (पुं), त्रिपाद् (पुं), मानञ्जर (पुं), पराविद्ध (पुं), पृश्निगर्भ (पुं), अपराजित (पुं), हिरण्यनाभ (पुं), श्रीगर्भ (पुं), वृषोत्साह (पुं), सहस्रजित् (पुं), ऊर्ध्वकर्मन् (पुं), यज्ञधर (पुं), धर्मनेमि (पुं), असंयुत (पुं), पुरुष (पुं), योगनिद्रालु (पुं), खण्डास्य (पुं), शलिक (पुं), अजित (पुं), कालकुण्ठ (पुं), वरारोह (पुं), श्रीकर (पुं), वायुवाहन (पुं), वर्धमान (पुं), चतुर्दंष्ट्र (पुं), नृसिंहवपुस् (पुं), अव्यय (पुं), कपिल (पुं), भद्रकपिल (पुं), सुषेण (पुं), समितिञ्जय (पुं), क्रतुधामन् (पुं), वासुभद्र (पुं), बहुरूप (पुं), महाक्रम (पुं), विधातृ (पुं), धार (पुं), एकाङ्ग (पुं), वृषाक्ष (पुं), सुवृष (पुं), अक्षज (पुं), रन्तिदेव (पुं), सिन्धुवृष (पुं), जितमन्यु (पुं), वृकोदर (पुं), बहुशृङ्ग (पुं), रत्नबाहु (पुं), पुष्पहास (पुं), महातपस् (पुं), लोकनाभ (पुं), सूक्ष्मनाभ (पुं), धर्मनाभ (पुं), पराक्रम (पुं), पद्महास (पुं), महहंस (पुं), पद्मगर्भ (पुं), सुरोत्तम (पुं), शतवीर (पुं), महामाय (पुं), ब्रह्मनाभ (पुं), सरीसृप (पुं), वृन्दाङ्क (पुं), अधोमुख (पुं), धन्विन् (पुं), सुधन्वन् (पुं), विश्वभुज् (पुं), स्थिर (पुं), शतानन्त (पुं), शरु (पुं), यवनारि (पुं), प्रमर्दन (पुं), यज्ञनेमि (पुं), लोहिताक्ष (पुं), एकपाद् (पुं), द्विपद (पुं), कपि (पुं), एकशृङ्ग (पुं), यमकील (पुं), आसन्द (पुं), शिवकीर्तन (पुं), शद्रु (पुं), वंश (पुं), श्रीवराह (पुं), सदायोगिन् (पुं), सुयामुन (पुं)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
शद्रुः, त्रि, (शद शाते + “दाधेट्सिशदसदो रुः ।”३ १५९ इति रुः ।) पतनकर्त्ता ।गन्ता इति शदधातो रुप्रत्ययेन निष्पन्नमेतत् ।इति व्याकरणम्
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
शद्रु
त्रि०
शद--क्रु पतनककर्त्तरि गन्तरि
Burnouf
French
शद्रु शद्रु a. (शद्) qui va, qui tombe.
Au c. qui
détruit, qui dévaste.