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विपुला (vipulA)

 
Apte
English
विपुला [vipulā], The earth.
Apte 1890
English
विपुला The earth.
Monier Williams Cologne
English
वि-पुला (आ),
f.
the earth,
L.
a form of the Āryā metre (in which the caesura is irregular
divided into 3 species, Ādi-, Antya-, and Ubhaya-vipulā),
Col.
(in music) a kind of measure,
Saṃgīt.
Apte Hindi
Hindi
विपुला
स्त्री*
- विपुल + टाप्
पृथ्वी
L R Vaidya
English
vipula {% (I) a. (f. ला) %} 1. Large, extensive, broad, wide, capacious, विपुलेन सागरशयस्य कुक्षिणा Sis.xiii.40, क्षितिरतिविपुलतरे तव तिष्ठति पृष्ठे Git.G.i., Rt.i.27
2. abundant
3. deep, profound.
vipulA {% f. %} The earth.
Edgerton Buddhist Hybrid
English
Vipulā, n. of a river: Māy 〔253.9〕. Not in BR, pw
cited Kirfel, Kosm., 〔68〕 from Mbh. Calc. 〔6.321〕, which however seems to be wrong reading
Crit. ed. 〔6.10.13〕 seems right in reading bahulā.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
विपुला
noun
आर्याछन्दसः भेदः।
"विपुलायाः प्रथमे चरणे अष्टादश द्वितीये चरणे द्वादश तृतीये चतुर्दश तथा चतुर्थे त्रयोदश मात्राः सन्ति।"
Synonyms:
पृथिवी, भूः, भूमिः, अचला, अनन्ता, रसा, विश्वम्भरा, स्थिरा, धरा, धरित्री, धरणी, क्षौणी, ज्या, काश्यपी, क्षितिः, सर्वसहा, वसुमती, वसुधा, उर्वी, वसुन्धरा, गोत्रा, कुः, पृथ्वी, क्ष्मा, अवनिः, मेदिनी, मही, धरणी, क्षोणिः, क्षौणिः, क्षमा, अवनी, महिः, रत्नगर्भा, सागराम्बरा, अब्धिमेखला, भूतधात्री, रत्नावती, देहिनी, पारा, विपुला, मध्यमलोकवर्त्मा, धारणी, गन्धवती, महाकान्ता, खण्डनी, गिरिकर्णिका, धारयित्री, धात्री, अचलकीला, गौः, अब्धिद्वीपा, इडा, इडिका, इला, इलिका, इरा, आदिमा, ईला, वरा, आद्या, जगती, पृथुः, भुवनमाता, निश्चला, श्यामा
noun
मर्त्याद्यधिष्ठानभूता।
"पृथिवी पञ्चमम् भूतम्"
Synonyms:
पर्याप्तम्, यथेष्टम्, यथेष्टः, यथेष्टा, प्रचुरः, प्रचुरा, प्रचुरम्, विपुलः, विपुलम्, विपुला
adjective
यावद् वाञ्च्छितं तावद् अथवा क्वचिद् वाञ्च्छिताद् अधिकम् अपि।
"शतानां कृते पर्याप्तं भोजनं पचतु। / भोः, यथेष्टं भुक्तं मया अधुना कणमात्रम् अपि भक्षितुम् असमर्थः अहम्।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
भूर्भूमिः पृथिवी पृथ्वी वसुधोर्वी वसुंधरा
धात्री धरित्री धरणी विश्वा विश्वंभरा धरा ९३५
क्षितिः क्षोणी क्षमानन्ता ज्या कुर्वसुमती मही
गौर्गोत्रा भूतधात्री क्ष्मा गन्धमाताचलावनिः ९३६
सर्वंसहा रत्नगर्भा जगती मेदिनी रसा
काश्यपी पर्वताधारा स्थिरेला रत्नबीजसूः ९३७
विपुला सागराच्चाग्रे स्युर्नेमीमेखलाम्बराः
-wordlist-
भू (स्त्री), भूमि (स्त्री), पृथिवी (स्त्री), पृथ्वी (स्त्री), वसुधा (स्त्री), उर्वी (स्त्री), वसुन्धरा (स्त्री), धात्री (स्त्री), धरित्री (स्त्री), धरणी (स्त्री), विश्वा (स्त्री), विश्वम्भरा (स्त्री), धरा (स्त्री), क्षिति (स्त्री), क्षोणी (स्त्री), क्षमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), ज्या (स्त्री), कु (स्त्री), वसुमती (स्त्री), मही (स्त्री), गो (स्त्री), गोत्रा (स्त्री), भूतधात्री (स्त्री), क्ष्मा (स्त्री), गन्धमाता (स्त्री), अचला (स्त्री), अवनि (स्त्री), सर्वंसहा (स्त्री), रत्नगर्भा (स्त्री), जगती (स्त्री), मेदिनी (स्त्री), रसा (स्त्री), काश्यपी (स्त्री), पर्वताधारा (स्त्री), स्थिरा (स्त्री), इला (स्त्री), रत्नसू (स्त्री), बीजसू (स्त्री), विपुला (स्त्री), सागरनेमी (स्त्री), सागरमेखला (स्त्री), सागराम्बरा (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भू
भू, भूमि, वसुधा, अवनि, वसुमती, धात्री, धरित्री, धरा, गो, गोत्रा, जगती, रसा, क्षिति, इला, क्षोणी, क्षमा, क्ष्मा, अचला, कु, पृथ्वी, पृथिवी, स्थिरा, धरणी, विश्वम्भरा, मेदिनी, ज्या, अनन्ता, विपुला, समुद्रवसना, सर्वंसहा, ऊर्वी, मही, काश्यपी, भूतधात्री, रत्नगर्भा, वसुन्धरा, धराधारा
भूर्भूमिर्वसुधावनिर्वसुमती धात्री धरित्री धरा,
गौर्गोत्रा जगती रसा क्षितिरिला क्षोणी क्षमा क्ष्माचला
कुः पृथ्वी पृथिवी स्थिरा धरणी विश्वम्भरा मेदिनी,
ज्यानन्ता विपुला समुद्रवसना सर्वंसहोर्वी मही १५६
काश्यपी भूतधात्री रत्नगर्भा वसुन्धरा
धराधारा विज्ञेया तद्विशेषान्निबोधत १५७
verse 2.1.1.156
page 0020
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
विपुला,
स्त्री,
(वि + पुल महत्त्वे + कः ततस्त्रियांटाप् ।) पृथिवी आर्य्याच्छन्दोभेदः इतिहेमचन्द्रः
अस्या लक्षणादिर्यथा, --“पथ्या विपुला चपला मुखचपला जघन-चपला ।गीत्युपगीत्युद्गीतय आर्य्यागीतिश्च नवधार्य्या
संलङ्व्य गणत्रयमादिमं सकलयोर्द्वयोर्भवतिपादः ।यस्यास्तां पिङ्गलनागो विपुलामिति समा-ख्याति
पंसां कलिकालव्यालहतानां नास्त्युपहतिर-ल्पापि ।वीर्य्यविपुला मुखे चेत् स्यात् गोविन्दाख्यमन्त्र-कला
”इति छन्दोमञ्जरी
(विपुलपर्व्वतस्थादेवी इति देवीभागवतम् ।७ ३० ६६
)