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लुम्बकः-लुम्बिका (lumbakaH-lumbikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“लुबि अर्दने”@} 2 ‘लुम्बयेत् तुम्बयेदर्दे शपि लुम्बति तुम्बति।।’ 3 इति देवः।
क्षीरतरङ्गिण्यामयं धातुः दृश्यते।
लुम्बकः-म्बिका, लुम्बकः-लुम्बिका, लुलुम्बिषकः-षिका, लोलुम्बकः-म्बिका
लुम्बिता-त्री, लुम्बयिता-त्री, लुलुम्बिषिता-त्री, लोलुम्बिता-त्री
इत्यादीनि रूपाणि सर्वाण्यपि भौवादिककुण्ठतिवत् 4 ऊह्यानि।
कर्मणि क्तप्रत्यये 5 परिलुम्बितः इति।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(१५१२)
02
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(१-भ्वादिः-४२७। सक। सेट्। पर।)
03
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(श्लो। १३९)
04
=>
(२०९)
05
=>
[[आ। ‘… दिक्कुम्बितेऽर्के परिलुम्बिताम्बुजे।।’ धा। का। १-५५।]]