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लाज (lAja)

 
शब्दसागरः
English
लाज
m.
(-जः) Grain, wetted or sprinkled.
n.
(-जं) The root of the
Andropogon muricatum.
f.
(-जा) or masc. plu. (-जाः) Fried grain.
E.
लाज् to fry,
aff.
अच्
Capeller Eng
English
लाज॑
m.
f.
pl.
parched or roasted grain.
Yates
English
लाज (जः) 1.
m.
f.
Grain moist.
f.
or
m.
plu. Fried grain.
n.
Root
of a fragrant grass.
Wilson
English
लाज r. 1st cl. (लाजति) (इ) लाजि (लांजति)
1 To blame or censure.
2 To fry.
लाज
m.
(-जः) Grain, wetted or sprinkled.
n.
(-जं) The root of
the Andropogon muricatum.
f.
(-जा) or masc. plu. (-जाः) Fried grain.
E.
लाज to fry,
aff.
घञ्.
Apte
English
लाजः [lājḥ], [लाज्-अच्] Wetted grain. -जाः (pl. ) Parched or fried grain (f. also)
(तम्) अवाकिरन् बाललताः प्रसूनै- राचारलाजैरिव पौरकन्याः
R.*
2.1
4.27
7.25
Ku.*
7.69, 8. -जम्
=
उशीर q. v.
लाजोल्लापिकधूमाढ्यमुच्चप्राकारतोरणम्
Mb.
* 5.191.21.
Comp.
-पेयाः rice-gruel. -मण्डः the scum of parched grain.
Apte 1890
English
लाजः [लाज्-अच्] Wotted grain.
जाः (pl.) Parched or fried grain (f. also)
(तं) अवाकिरन्बाललताः प्रसूनैराचारलाजैरिव पौरक्रन्याः R. 2. 10, 4. 27, 7. 25
Ku. 7. 69, 80.
जं = उशीर q. v.
Monier Williams Cologne
English
लाज॑
m.
(or f(आ). )
pl.
fried or parched grain (esp. rice grain),
VS.
&c.
&c.
लाज॑
n.
the root of Andropogon Muricatus,
L.
Monier Williams 1872
English
लाज, अस्, m. (supposed by some to be connected
with rt. 1. भ्रज्ज् or भृज्), fried or parched grain
wetted or sprinkled grain
(आस्), m. pl. parched or
roasted grain, (also आ, f.)
(अम्), n. the root of
Andropogon Muricatus.
Macdonell
English
लाज lāj-á,
m.
pl.
parched grain.
Benfey
English
लाज लाज,
I.
m.
Grain wetted or
sprinkled.
II.
f.
जा, or pl.
m.
Fried
grain, Pañc. 158, 3
Chr. 57, 22.
Apte Hindi
Hindi
लाजः
पुं*
- लाज+अच्
गीला धान
Shabdartha Kaustubha
Kannada
लाज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ನೆನೆಸಿದ ಅಕ್ಕಿ /ಒದ್ದೆಯಾದ ಅಕ್ಕಿ
निष्पत्तिः - > लज (भर्जने भर्त्सने च) - "घञ्" (३-३-१९)
लाज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಅಕ್ಷತೆ /ಒಡೆಯದ (ಪೂರ್ಣವಾದ)ಅಕ್ಕಿ
लाज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಹುರಿದ ಅಕ್ಕಿ /ಪುರಿ
प्रयोगाः - > "अवाकिरन् बाललताः प्रसूनैराचारलाजैरिव पौरकन्याः"
उल्लेखाः - > रघु० २-१०
लाज
पदविभागः - > नपुंसकलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಲಾಮಂಚದ ಬೇರು
विस्तारः - > "लाजाः पुम्भूम्निचाक्षताः" - अम० "लाजः स्यादाद्रतण्डुले लाजास्तु भ्रष्टधान्ये स्युर्लाजं पुनरुशीरके" - हेम०
L R Vaidya
English
lAja {% (I) m. %} Wetted grain.
lAja {% (II) m. pl. %} Parched grain, आचारलाजैरिव पौरकन्याः R.ii.10, iv.27, K.S.vii.69, R.vii.25.
Lanman
English
lājá, m. pl. parched or roasted grain.
[perhaps akin w. √bhṛjj.]
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
लाज्
मूलधातुः:
लाज
धात्वर्थः:
भर्जने-भर्त्सने
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
लाजति
धातुप्रदीपः
Sanskrit
लाजँ लाज
मानकरूपान्तरम् - लाजिँ
लाजि भर्त्सने
- चकारो भिन्नक्रमः एतावपि भर्जने पठ्येते इत्यर्थः लाजति लाजाः लाञ्जति ।। 237, 238 ।।
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भृष्ट-धान्य
भृष्ट-धान्य, लाज
भृष्टं धान्यं लाजाः पृथुकाश्चिपिटाश्च कुट्टितास्ते स्युः
verse 2.1.1.585
page 0066
Vedic Reference
English
Lāja, masc. plur., in the later Saṃhitās^1 and the Brāhmaṇas^2
denotes ‘fried or parched grain.’
1) Maitrāyaṇī Saṃhitā, iii. 11, 2, etc.
Vājasaneyi Saṃhitā, xix. 13. 81
xxi. 42,
etc.
2) Śatapatha Brāhmaṇa, xii. 8, 2, 7.
10
9, 1, 2
xiii. 2, 1, 5
Taittirīya
Brāhmaṇa, ii. 6, 4.
Cf. Zimmer, Altindisches Leben, 269.
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
लाज, भर्त्सने भर्गे इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वा०-पर०-सक०-सेट् ।) लाजति
लाज, भर्त्सने भर्गे इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वा०-पर०-सक०-सेट् ।) द्बौ द्बितीय-स्वरिणौ लाजति इ, लाञ्ज्यते भर्त्सनएव कैश्चित् पठ्यते भर्गो भर्ज्जनम् इतिदुर्गादासः
लाजं,
क्ली,
(लाज् + अच् ।) उषीरम् इतिमेदिनी जे, १५
(भृष्टधान्यम् खै इतिभाषा
“येषां स्युस्तण्डुलास्तानि धान्यानि सतु-षाणि ।भृष्टानि स्फुटितान्याहुर्लाजानीति मनीषिणः
लाजाः स्युर्म्मधुराः शीता लघवो दीपनाश्च ते
स्वल्पमूत्रमला रूक्षा बल्याः पित्तकफच्छिदः ।छर्द्द्यतीसारदाहास्रमेहमेदस्तृषापहाः
”इति भावप्रकाशस्य पूर्व्वखण्डे प्रथमे भागे
)
लाजः,
पुं,
(लाज् + अच् ।) आर्द्रतण्डुलः इतिमेदिनी जे, १५
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
लाज भर्त्सने
भ्वा०
पर०
सक०
सेट् लाजति अलाजीत् इदि दयप्ययम् लाञ्जति जलाञ्जीत्
लाज
न०
लाज--अच् उशीरे आर्द्रतण्डुले
पु०
मेदि० ।३ भृष्टधान्ये (खै)
पु०
ब० व० अमरः स्त्रीत्वमप्यत्र मेदि०
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
लाजँ लाज
मानकरूपान्तरम् - लाजिँ
लाजि भर्जने
- लाजति, लाञ्जति, लाञ्जति, लाज्यते, लाञ्च्यते लाजाः, अजिव्रज्योश्च (7360) इति चात् कुत्वाभावः चत्वारो भर्त्सन इति चन्द्रः (च0 धातु 177) 235, 236
धातुवृत्तिः
Sanskrit
लाजँ लाज
मानकरूपान्तरम् - लाजिँ
लाजि (अर्थः) भर्त्सने
चकारो भिन्नक्रमः एतावपि भर्जनइति मैत्रेयः भर्त्सनग्रहणंभर्जनस्याप्युपलक्षणमिति पुरुषकारः ( लजति ललाज लेजतुः लजिता अलजीत् अलाजित् ) "अतो हलादे'' इति वा वृद्धिः ( लिलजिषति लालज्यते लालक्तिलाजयति अलीलजत् लञ्जति ललञ्ज लञ्जिता लिलञ्जिषति लालञ्ज्यते ) इदित्त्वान्नलोपाभावः ( लालङ्क्ति लञ्जयति अललञ्जत् एवं लाजति लाञ्जतीत्यादि लाजः ) ओलजी ओलस्जी व्रीडनइति तुदादौ अज प्रकाशनइति कथादौ लजिति दण्डके भाषार्थः 238
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“लाज भर्त्सने च”@} 2 ‘लञ्जेत् लाञ्जेत् लजेल्लाजेदित्येते भर्त्सने शपि।’ 3 इति देवः।
चकारो भिन्नक्रमः।
तेन पूर्वधात्वर्थं भर्जनमपि संगृह्णाति इति मैत्रेयरक्षितः।
‘भ4? र्त्सनग्रहणं भर्जनस्यापि काममुपलक्षणम्’ इति पुरुषकारः।
‘भर्जने च’ इति क्षीरस्वामी।
शाकटायनोऽप्यत्रैवानुकूलः।
लाजकः-जिका, लाजकः-जिका, लिलाजिषकः-षिका, लालाजकः-जिका
लाजिता-त्री, लाजयिता-त्री, लिलाजिषिता-त्री, लालाजिता-त्री
इत्यादिकानि समस्तान्यपि रूपाणि भौवादिककासतिवत् 5 बोध्यानि।
6 लाजः इति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१४८२)
02
=>
(१-भ्वादिः-२४०। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(श्लो। ६९)
04
=>
[र्ज]
05
=>
(१८८)
06
=>
[[१। अजादौ प्रत्यये ‘अजिव्रज्योश्च’ (७-३-६०) इत्यत्र चकारात् कुत्वाभावः इति क्षीरस्वामी। लाजाः इति नित्यबहुवचनान्तत्वमभिप्रयन्ति। वस्तुतः धातोरस्य निष्ठायां सेट्त्वात्, निष्ठायामनिट एव धातोः कुत्वविधानात् कुत्वस्यैवाप्रसक्तेश्चि- न्त्यमिदम्।]]
Capeller
German
लाज॑ u.
f.
Pl. geröstete Körner.
Burnouf
French
लाज लाज
m.
grain mouillé. -- F. et M. pl. grain rôti
ou frit. -- N. racine d'andropogon.
Stchoupak
French
लाज-
m.
pl.
grains grillés, not. de riz (aussi -आ-
f.
).