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रेरिखिता-त्री (rerikhitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“रिख गत्यर्थः”@} 2 ‘द्रमिडास्तु रिख 3 मपि पठन्ति।’ इति मा।
धा।
वृत्त्यादिषु दर्शनादयं लिख्यते।
रेखकः-खिका, रेखकः-खिका, रिरिखिषकः-रिरेखिषकः-षिका, रेरिखकः-खिका
रेखिता-त्री, रेखयिता-त्री, रिरिखिषिता-रिरेखिषिता-त्री, रेरिखिता-त्री
इत्यादीनि रूपाणि सर्वाणि भौवादिककिटतिवत् 4 बोध्यानि।
रेखा 5।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१४००)
02
=>
(१-भ्वादिः-१५५। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(खि)
04
=>
(१९०)
05
=>
[[३। स्त्रियाम्, भिदादि (३-३-१०४) पाठात् अङि रूपमेवम्।]]