| YouTube Channel

राखयिता-त्री (rAkhayitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“रख गत्यर्थः”@} 2 ‘सर्पणे’ इति वोपदेवः।
राखकः-खिका, राखकः-खिका, रिरखिषकः-षिका, रारखकः-खिका
रखिता-त्री, राखयिता-त्री, रिरखिषिता-त्री, रारखिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककखतिवत् 3 ज्ञेयानि।
शतरि रखन् 4 इति।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१३६०)
02
=>
(१-भ्वादिः-१३६। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(१४१)
04
=>
[[आ। ‘रखच्छशं रङ्खितरङ्कु रिङ्खितद्विपं लखत्केसरिलङ्खदारवम्।।’ धा। का। १-१९।]]
1 {@“राखृ शोषणालमर्थयोः”@} 2 राखकः-खिका, राखकः-खिका, रिराखिषकः-षिका, रराखः-खिका
राखिता-त्री, राखयिता-त्री, रिराखिताषिता-त्री, राराखिता-त्री
इत्यादीनि समस्तान्यपि रूवाणि भौवादिकद्रास्वतिवत् 3 ज्ञेयानि।
4 राखितः।
5
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१३९२)
02
=>
(१-भ्वादिः-१२२ सक। सेट्। आत्म।)
03
=>
(८७९)
04
=>
[[आ। ‘अराखितत्वग्भिरलाखितच्छदैः प्रद्राखिताध्राखिफलैश्च शाखिभिः।’ धा। का। १। १८।]]
05
=>
[पृष्ठम्१११३+ ३०]