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रङ्खिता-त्री (raGkhitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“रखि गत्यर्थः”@} 2 “द्रमिडानाम् रिखिरपि--रिङ्खति” इति क्षीरस्वामी।
मा।
धा।
वृत्तावपि एवमेव।
रङ्खकः-ङ्खिका, रङ्खकः-ङ्खिका, रिरङ्खिषकः-षिका, रारङ्खकः-ङ्खिका
रङ्खिता-त्री, रङ्खयिता-त्री, रिरङ्खिषिता-त्री, रारङ्खिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककङ्कतिवत् 3 ज्ञेयानि।
4 प्ररङ्खणम्।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(१३६१)
02
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(१-भ्वादिः-१३७। सक। सेट्। पर।)
03
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(१४०)
04
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[[२। ‘रषाभ्याम्--’ (८-४-१) इति णत्वम्। ‘इजादेः--’ (८-४-३२) इति नियमस्तु ‘कृत्यचः’ (८-४-२९) इति प्राप्तस्यैव। तेनात्र नियमः।]]