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म्रुञ्चिता-त्री (mruJcitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“म्रुन्चु गत्यर्थः”@} 2 अयं नोपधः, सन्धिवशाञ्ञकार इति ज्ञेयम्।
म्रुञ्चकः-ञ्चिका, म्रुञ्चकः-ञ्चिका, मुम्रुञ्चिषकः-षिका, मोम्रुचकः-चिका
म्रुञ्चिता-त्री, म्रुञ्चयिता-त्री, मुम्रुञ्चिषिता-त्री, मोम्रुचिता-त्री
इत्यादिकानि समस्तान्यपि रूपाणि भौवादिकग्लुञ्चतिवत् 3 ज्ञेयानि।
4 म्रुक्तम्।
5
प्रासङ्गिक्यः
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(१३२४)
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(१-भ्वादिः-१९३। सक। सेट्। पर।)
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(४४७)
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[[आ। ‘आवक्रचञ्चूपुटतञ्चदारबत्वञ्चत्खगम्रुक्तशिखैर्लताद्रुमैः।’ धा। का। १-२६।]]
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[पृष्ठम्१०६१+ २५]