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मेशिता-त्री (mezitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“मिश शब्दे रोषकृते च”@} 2 ‘शब्दने रोषक्रियायाञ्चार्थे’ इति क्षीरस्वामी।
“-- ‘शब्दकोपयोः’ इति द्रुमोक्त्या रोषकृतम् = रोष एव।” इति धा।
का।
व्या।
3।
मेशकः-शिका, मेशकः-शिका, मिमेशिषकह्-मिमिशिषकः-षिका, मेमिशकः- शिका
मेशिता-त्री, मेशयिता-त्री, मिमेशिषिता-मिमिशिषिता-त्री, मेमिशिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककेटतिवत् 4 ज्ञेयानि।
कप्रत्यये मिशः = व्याजः।
5 मेशः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१२६२)
02
=>
(१-भ्वादिः-७२३। अक। सेट्। पर।)
03
=>
(१-९०)
04
=>
(१९०)
05
=>
[[आ। ‘… मेशोद्धुतारिमशकस्य नृपस्य वृत्तम्।।’ धा। का। १-९०।]]