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महाविद्या (mahAvidyA)

 
शब्दसागरः
English
महाविद्या
f.
(-द्या) The name of the following ten goddess:--
“काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी
भैरवी छिन्नमस्ता विद्या धूमावती तथा
वगला सिद्धविद्या मातङ्गी कमलात्मिका ॥”
Monier Williams Cologne
English
महा—विद्या
f.
a gr° or exalted science,
MW.
N.
of Lakṣmī,
VP.
(= विश्व-रूपोपासना Comm. )
of Durgā,
MārkP.
of a Mantra,
Cat.
pl.
of a class of personifications of the Śakti or female energy of Śiva (10 in number),
RTL.
187
Shabdartha Kaustubha
Kannada
महाविद्या
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಹತ್ತು ವಿಧ ವಿದ್ಯೆಗಳಲ್ಲೊಂದು
Aufrecht Catalogus Catalogorum
English
महाविद्या tantr. Oppert 6770. 7486. II, 1789. C. I, 6973.
महाविद्या tantr. Gov. Or. Libr. Madras 67.
महाविद्या tantr. CS 5, 93.
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
गौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ४७
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ४८
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ४९
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ५०
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ५१
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ५२
चारणा पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ५३
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ५४
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी
प्रकीर्णकेशी कुण्डा नीलवस्त्रोग्रचारिणी ५५
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ५६
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ५७
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ५८
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ५९
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी
-wordlist-
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
महाविद्या,
स्त्री,
(विद्यते ज्ञायते इति विद् +क्यप् टाप् महती विद्या ज्ञानं तत्त्वसाक्षात्-कारो वा यस्याः ।) देवीविशेषः सा दशधा ।यथा चामुण्डातन्त्रे ।“काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी ।भैरवी छिन्नमस्ता विद्या धूमावती तथा
वगला सिद्धविद्या मातङ्गी कमलात्मिका ।एता दश महाविद्याः सिद्धविद्याः प्रकीर्त्तिताः
नात्र सिद्धाद्यपेक्षास्ति नक्षत्रविचारणा ।कालादिशोधनं नास्ति चामित्रादिदूषणम्
सिद्धविद्यातया नात्र युगसेवापरिश्रमः ।नास्ति किञ्चिन्महादेवि ! दुःखसाध्यं कथञ्चन
”मालिनीविजये ।“अथ वक्ष्याम्यहं या या महाविद्या महीतले ।दोषजालैरसंस्पृष्टास्ताः सर्व्वा हि फलैः सह
काली नीला महादुर्गा त्वरिता छिन्नमस्तका ।वाग्वादिनी चान्नपूर्णा तथा प्रत्यङ्गिरा पुनः
कामाख्या वासली बाला मातङ्गी शैलवासिनी ।इत्याद्याः सकला विद्याः कलौ पूर्णफलप्रदाः
सिद्धमन्त्रतया नात्र युगसेवापरिश्रमः ।अथ चैता महाविद्याः कलिदोषान्न बाधिताः
”इति तन्त्रसारः
*
तासां दशावतारत्वं यथा, --“प्रकृतिर्विष्णुरूपा पुंरूपश्च महेश्वरः ।एवं प्रकृतिभेदेन भेदास्तु प्रकृतेर्द्दश
कृष्णरूपा कालिका स्यात् रामरूपा चतारिणी ।वगला कूर्म्ममूर्त्तिः स्यान्मीनो धूमावती भवेत्
छिन्नमस्ता नृसिंहः स्याद्वराहश्चैव भैरवी ।सुन्दरी यामदग्न्यः स्याद्वामनो भुवनेश्वरी
कमला बौद्धरूपा स्यात् दुर्गा स्यात् कल्कि-रूपिणी ।स्वयं भगवती काली कृष्णस्तु भगवान् स्वयम् ।स्वयञ्च भगवान् कृष्णः कालीरूपो भवेद्व्रजे
”इति मुण्डमालातन्त्रम्
(गङ्गा यथा, काशीखण्डे २९ १३९ ।“महाविद्या महामाया महामेधा महौ-षधम्
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
महाविद्या स्त्री कर्म० “काली तारा महाविद्या षोडशीभुवनेश्वरी भैरवी छिन्नमस्ता विद्या धूमावती तथा ।वगला सिद्धविद्या मातङ्गी कमलात्मिका एताः दश-महाविद्याः” इत्युक्तासु काल्यादिषु दशसु देवीसु