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मर्विता-त्री (marvitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“मर्व पूरणे”@} 2 ‘गतौ द्रुमे’ इति धा।
का।
व्याख्यायाम् 3।
4 मर्वकः-विका, मर्वकः-र्विका, मिमर्विषकः-षिका, मामर्वकः-र्विका
मर्विता-त्री, मर्वयिता-त्री, मिमर्विषिता-त्री, मामर्विता-त्री
इत्यादीनि सर्वाणि रूपाणि भौवादिककर्वतिवत् 5 ज्ञेयानि।
क्विपि- 6 मः-मरौ-मरः इति रूपमिति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१२२६)
02
=>
(१-भ्वादिः-५७८। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(१। ७३।)
04
=>
[[B। ‘अफर्विताकाङ्क्षतमर्वकं सतां मांसादिसंचर्वकदुष्टभर्वकम्।’ धा। का। १। ७४।]]
05
=>
(१७३आ)
06
=>
[[१। ‘राल्लोपः’ (६-४-२१) इति वकारस्य लोपः। रुत्वविसर्गौ भवतः।]]