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मन्त्रजिह्व (mantrajihva)

 
शब्दसागरः
English
मन्त्रजिह्व
m.
(-ह्वः) A name of fire.
E.
मन्त्र prayer, and जिह्वा the tongue.
Yates
English
मन्त्र-जिह्व (ह्वः) 1.
m.
A name of Fire.
Spoken Sanskrit
English
मन्त्रजिह्व mantrajihva
m.
fire or name of god of fire
मन्त्रजिह्व mantrajihva
m.
having sacred text for tongues
Wilson
English
मन्त्रजिह्व
m.
(-ह्वः) A name of fire.
E.
मन्त्र prayer, and जिह्वा the tongue.
Monier Williams Cologne
English
मन्त्र—जिह्व
m.
‘having for tongues’, fire or
N.
of Agni,
Śiś.
L.
Shabdartha Kaustubha
Kannada
मन्त्रजिह्व
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಅಗ್ನಿ /ಬೆಂಕಿ
व्युत्पत्तिः - > मन्त्र एव जिह्वा यस्य
प्रयोगाः - > "अमृतं नाम यत्सन्तो मन्त्रजिह्वेषु जुह्वति"
उल्लेखाः - > माघ० २-१०७
विस्तारः - > "मन्त्रजिह्वः सप्तजिह्वः सुजिह्वो हव्यवाहनः" - वैज०
L R Vaidya
English
maMtra-jihva {% m. %} an epithet of fire, अमृतं नाम यत्सम्तो मंत्रजिह्वेषु जुह्वति शोभैव मंदरक्षुब्धक्षुभितांभोधिवर्णना Sis.ii.107.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
वह्निर्बृहद्भानुहिरण्यरेतसौ धनंजयो हव्यहविर्हुताशनः
कृपीटयोनिर्दमुना विरोचनाशुशुक्षणी छागरथस्तनूनपात् १०९७
कृशानुवैश्वानरवीतिहोत्रा वृषाकपिः पावकचित्रभानू
अप्पित्तधूमध्वजकृष्णवर्त्मार्चिष्मच्छमीगर्भतमोघ्नशुक्राः १०९८
शोचिष्केशः शुचिहुतवहोषर्बुधाः सप्तमन्त्र-
ज्वालाजिह्वो ज्वलनशिखिनौ जागृविर्जातवेदाः
बर्हिःशुष्मानिलसखवसू रोहिताश्वाश्रयाशौ
बर्हिर्ज्योतिर्दहनबहुलौ हव्यवाहोऽनलोऽग्निः १०९९
विभावसुः सप्तोदर्चिः स्वाहाग्नेयी प्रियास्य
-wordlist-
वह्नि (पुं), बृहद्भानु (पुं), हिरण्यरेतस् (पुं), धनञ्जय (पुं), हव्याशन (पुं), हविराशन (पुं), हुताशन (पुं), कृपीटयोनि (पुं), दमुनस् (पुं), विरोचन (पुं), आशुशुक्षणि (पुं), छागरथ (पुं), तनूनपाद् (पुं), कृशानु (पुं), वैश्वानर (पुं), वीतिहोत्र (पुं), वृषाकपि (पुं), पावक (पुं), चित्रभानु (पुं), अप्पित्त (क्ली), धूमध्वज (पुं), कृष्णवर्त्मन् (पुं), अर्चिष्मत् (पुं), शमीगर्भ (पुं), तमोघ्न (पुं), शुक्र (पुं), शोचिष्केश (पुं), शुचि (पुं), हुतवह (पुं), उषर्बुध (पुं), सप्तजिह्व (पुं), मन्त्रजिह्व (पुं), ज्वालाजिह्व (पुं), ज्वलन (पुं), शिखिन् (पुं), जागृवि (पुं), जातवेदस् (पुं), बर्हिःशुष्मन् (पुं), अनिलसख (पुं), वसु (पुं), रोहिताश्व (पुं), आश्रयाश (पुं), बर्हिर्ज्योति (पुं), दहन (पुं), बहुल (पुं), हव्यवाह (पुं), अनल (पुं), अग्नि (पुं), विभावसु (पुं), सप्तार्चिस् (पुं), उदर्चिस् (पुं), स्वाहा (स्त्री), आग्नेयी (स्त्री)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
मन्त्रजिह्वः,
पुं,
(मन्त्र एव जिह्वा यस्य ।) अग्निः ।इति हेमचन्द्रः १६५
(यथा, माघः ।२ १०७ ।“अमृतं नाम यत् सन्तो मन्त्रजिह्वेषु जुह्वति ।शोभैव मन्दरक्षुब्धक्षुभिताम्भोधिवर्णना
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
मन्त्रजिह्व
पु०
मन्त्र एव जिह्वा आस्वादनसाधनं यस्य अग्नौहेमच० मन्त्रेण दत्तहविरास्त्रादकत्वात्तस्य तथात्वम्