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मत्स्यण्डी (matsyaNDI)

 
शब्दसागरः
English
मत्स्यण्डी
f.
(-ण्डी) Coarse or unrefined sugar, the juice of the sugar-cane,
either after its first boiling, or after it is partially freed from im-
purities by straining.
E.
मन्द slowly, स्यन्द् to trickle or ooze, अण्
aff.
, fem.
aff.
ङीप्,
deriv.
irr
.
also with कन् added, मत्स्यण्डिका
Yates
English
मत्स्यण्डी (ण्डी) 3.
f.
Course or un-
refined sugar. Also मत्स्यण्डिका.
Wilson
English
मत्स्यण्डी
f.
(-ण्डी) Coarse or unrefined sugar, the juice of the
sugar-cane, either after its first boiling, or after it is partially freed from
impurities by straining.
E.
मन्द slowly, स्यन्द to trickle or ooze, अण्
aff.
, fem.
aff.
ङीप्,
deriv.
irr
.
also with कन् added, मत्स्यण्डीका.
Monier Williams Cologne
English
मत्स्यण्डी
f.
id.,
Bhpr.
Benfey
English
मत्स्यण्डी मत्स्यण्डी, and मत्स्यण्डि-
का मत्स्यण्डिका, i. e. मत्स्यण्डी + क,
f.
The juice of the sugar-cane, unrefined,
Mālav. 30, 19.
Hindi
Hindi
गुड़ (नपु)
Apte Hindi
Hindi
मत्स्यण्डी
स्त्री*
- -
मोटी या बिना साफ की हुई चीनी
Shabdartha Kaustubha
Kannada
मत्स्यण्डी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕಾಕಂಬಿ /ಜೋನುಬೆಲ್ಲ /ಕಚ್ಚಾ ಸಕ್ಕರೆಯ ಪಾಕ
निष्पत्तिः - > स्यन्दू (प्रस्रवणे) - "अण्" (३-२-१) पृषो०
व्युत्पत्तिः - > मद् मधुररसं स्यन्दते
विस्तारः - > "मत्स्यण्डी फणितं खण्डविकारे" - अम० "इक्षो रसो यः सम्पक्वो घनं किञ्चिद्द्रवान्वितः मदवत् स्यन्दते यस्मात् मत्स्यण्डीति निगद्यते ॥" - भावप्र०
L R Vaidya
English
matsyaMqI {% f. %} Coarse sugar.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
गुड इक्षुरसक्वाथः शर्करा तु सितोपला ४०२
सिता मधुधूलिस्तु खण्डस्तद्विकृतिः पुनः
मत्स्यण्डी फाणितं चापि रसालायां तु भार्जिता ४०३
शिखरिण्यथ यूर्यूषो रसो दुग्धं तु सोमजम्
गोरसः क्षीरमूधस्यं स्तन्यं पुंसवनं पयः ४०४
-wordlist-
गुड (पुं), ईक्षुरसक्वाथ (पुं), शर्करा (स्त्री), सितोपला (स्त्री), सिता (स्त्री), मधुधूलि (स्त्री), खण्ड (पुंक्ली), मत्स्यण्डी (स्त्री), फाणित (क्ली), रसाला (स्त्री), मार्जिता (स्त्री), शिखरिणी (स्त्री), यू (पुं), यूष (पुंक्ली), रस (पुं), दुग्ध (क्ली), सोमज (क्ली), गोरस (पुं), क्षीर (पुंक्ली), ऊधस्य (क्ली), स्तन्य (क्ली), पुंसवन (क्ली), पयस् (क्ली)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
मत्स्यण्डी
मत्स्यण्डी, खण्डशर्करा
फाणितविकृतिर्गौडी मत्स्यण्डी खण्डशर्कराः ३२४
verse 2.1.1.324
page 0039
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
मत्स्यण्डी,
स्त्री,
खण्डविकारः इत्यमरः ४३
इक्षुविशेषस्य रसपाके खण्डयोग्ये सारभूते यागुडिकाकारा जायते सा मत्स्यण्डी खण्ड-शालूकं मिछिरि इति ख्याते नवात् इतिख्यातापि मत्स्यण्डीति केचित् मत्स्याण्डा-कारत्वात् मत्स्यण्डी मनीषादित्वादलुक् नदा-दित्वादीप् मत्स्यमनिति मत्स्यण्डी अन प्राणनेडः इत्यन्ये मदं स्यन्दते मत्सण्डीति केचित् ।इति भरतः
(यथास्या लक्षणं गुणाश्च
रावकाकव खण्डराव इति लोके ।“इक्षो रसो यः सम्पक्वो घनः किञ्चिद्रवान्वितः ।मन्दं यत् स्यन्दते यस्मात्तन्मत्स्यण्डी निगद्यते
मत्स्यण्डी मेदिनी बल्या लघ्वी पित्तानिला-पहा ।मधुरा बृंहणी वृष्या रक्तदोषपहा स्मृता
”इति भावप्रकाशस्य पूर्व्वखण्डे द्वितीये भागे
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
मत्स्यण्डी स्त्री (राव) ख्याते गुडविकारभेदे भावप्र० “इक्षोरसो यः संपक्वो धनः किञ्चिद्द्रवान्वितः मदवत्स्यन्दते यस्मान्मत्स्यण्डीति निगद्यते” अस्या गुणाः“मत्स्यण्डी भेदिनी बल्या लष्वी पितानिलापहा ।मधुरा वृंहणी वृष्या रक्तदोषापहा पाता”