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मखि (makhi)

 
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
मङ्ख्
मूलधातुः:
मखि
धात्वर्थः:
गतौ
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
मङ्खति
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“मखि गत्यर्थः”@} 2 मङ्खकः-ङ्खिका, मङ्खकः-ङ्खिका, मिमङ्खिषकः-षिका, मामङ्खकः-ङ्खिका
मङ्खिता-त्री, मङ्खयिता-त्री, मिमङ्खिषिता-त्री, मामङ्खिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककङ्कतिवत् 3 ज्ञेयानि।
णिनिप्रत्यये मङ्खी 4 इति।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(११९९)
02
=>
(१-भ्वादिः-१३३। अक। सेट्। पर।)
03
=>
(१४०)
04
=>
[[B। ‘मखत्कपोतं मदमङ्खिवर्हिणं लखत्पिकं नङ्खितखञ्जनोत्करम्।’ धा। का। १-१९।]]