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भुजङ्गम (bhujaGgama)

 
शब्दसागरः
English
भुजङ्गम
m.
(-मः) A snake.
E.
भुज् bending, गम् to go, and खच्
aff.
also
भुजग and भुजङ्ग
Capeller Eng
English
भुजंगम
m.
= भुजग.
Yates
English
भुज-ङ्गम (मः) 1.
m.
A snake.
Wilson
English
भुजङ्गम
m.
(-मः) A snake.
E.
भुज bending, गम to go, and खच्
aff.
also भुजग, and
भुजङ्ग.
Apte
English
भुजङ्गमः [bhujaṅgamḥ], 1 A snake
गजभुजङ्गमयोरपि बन्धनम्
Bh.*
2.91.
An epithet of Rāhu.
The number 'eight'.
The constellation आश्लेषा. -मी A female snake. -मम् Lead.
Apte 1890
English
भुजंगमः 1 A snake.
2 An epithet of Rāhu.
3 The number ‘eight’.
4 The constellation आश्लेषा.
मी A female snake.
मं Lead.
Monier Williams Cologne
English
भुज-ं-ग and -ं-गम, see भुजंग and भुजंगम.
भुजंगम b
m.
(भुजं-गम) a serpent, serpent-demon,
Kāv.
Suśr.
N.
of the number eight,
Sūryas.
of Rāhu,
L.
of a Nāga,
L.
भुजंगम
n.
lead,
L.
Macdonell
English
भुजंगम bhujaṃ-gama,
m.
(moving in 🞄curves), serpent, snake: ā,
f.
female snake
🞄a‿indra,
m.
lord of serpents
-īśa,
m.
id., ep. 🞄of Piṅgala.
Benfey
English
भुजंगम भुजंगम, i. e. 1. भुज् +
+ म्-गम् + अ,
m.
A snake, Pañc.
174, 11
Bhartṛ. 2, 87.
Apte Hindi
Hindi
भुजङ्गमः
पुं*
- "भुजं +गम् +खच्, मुम्"
साँप
भुजङ्गमः
पुं*
- "भुजं +गम् +खच्, मुम्"
राहु का विशेषण
भुजङ्गमः
पुं*
- "भुजं +गम् +खच्, मुम्"
आठ की संख्या
L R Vaidya
English
BujaMgama {% m. %} 1. a serpent
2. an epithet of Rāhu
3. the number ‘eight.’
भूतसङ्ख्या
Sanskrit
८, अनीक, अनुष्टुभ्, अहि, इभ, उरग, करटिन्, करिन्, करेणु, कर्मन्, कुज्जर, गज, गहन, गह्वर, तक्ष, तनु, दन्तिन्, दिक्, दिग्गज, दिङ्नाथ, दिश्, दुरित, द्विप, द्विरद, धी, धीगुण, नाग, नागेन्द्र, पद्मी, पन्नग, पवनभुक्, पीलुक, पुष्करिन्, प्रधान, प्रभावक, फणिन्, बुद्धिगुण, भद्र, भुजग, भुजङ्ग, भुजङ्गम, भूति, मङ्गल, मतङ्गज, मति, मद, मातङ्ग, यूथप, वन, वसु, वारण, विषभृद्वपु, व्याल, श्रिय, सर्प, सिद्धगुण, सिद्धि, सिन्धुर, सुण्डिप, स्तम्बेरम, स्तम्भेरम, हस्तिन्
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
द्विजिह्व
पु
द्विजिह्व, सूचक, भुजङ्गम
द्विजिह्वः सूचको ज्ञेयो द्विजिह्वस्तु भुजङ्गमः
verse 2.1.1.52
page 0011
Lanman
English
bhujaṃ-gama, m. serpent. [‘going
with bending or with crooking’: bhujam,
grd of √1bhuj, 995: for mg, cf. khaga.]
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
भुजंगम m. °Lebemann, S I, 86, 1.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
जाहको गात्रसंकोची मण्डली नकुलः पुनः
पिङ्गलः सर्पहा बभ्रुः सर्पोऽहिः पवनाशनः १३०२
भोगी भुजंगभुजगावुरगो द्विजिह्वव्यालौ भुजंगमसरीसृपदीर्घजिह्वाः
काकोदरो विषधरः फणभृत्पृदाकुर्दृक्कर्णकुण्डलिबिलेशयदन्दशूकाः १३०३
दर्वीकरः कञ्चुकिचक्रिगूढपात्पन्नगा जिह्मगलेलिहानौ
कुम्भीनसाशीविषदीर्घपृष्ठाः स्याद्राजसर्पस्तु भुजंगभोजी १३०४
-wordlist-
जाहक (पुं), गात्रसङ्कोचिन् (पुं), मण्डलिन् (पुं), नकुल (पुं), पिङ्गल (पुं), सर्पहन् (पुं), बभ्रु (पुं), सर्प (पुं), अहि (पुंस्त्री), पवनाशन (पुं), भोगिन् (पुं), भुजङ्ग (पुं), भुजग (पुं), उरग (पुं), द्विजिह्व (पुं), व्याल (पुं), भुजङ्गम (पुं), सरीसृप (पुं), दीर्घजिह्व (पुं), काकोदर (पुं), विषधर (पुं), फणभृत् (पुं), पृदाकु (पुं), दृक्कर्ण (पुं), कुण्डलिन् (पुं), बिलेशय (पुं), दन्दशूक (पुं), दर्वीकर (पुं), कञ्चुकिन् (पुं), चक्रिन् (पुं), गूढपाद् (पुं), पन्नग (पुं), जिह्मग (पुं), लेलिहान (पुं), कुम्भीनस (पुं), आशीविष (पुं), दीर्घपृष्ठ (पुं), राजसर्प (पुं), भुजङ्गभोजिन् (पुं)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
विषधर
विषधर, दन्दशूक, पवनाशन, सर्प, सरीसृप, उरुग, व्याल, भुजग, भुजङ्ग, कुम्भीनस, पन्नग, नाग, भोगिन्, अहि, फणभृत्, पृदाकु, काकोदर, कञ्चुकि, चक्रिन्, गूढपाद्, द्विरसन, काद्रवेय, दर्वीकर, अदृक्श्रुति, भुजङ्गम, आशीविष, दीर्घपृष्ठ, कुण्डलिन्, जिह्मग
विषधरदन्दशूकपवनाशनसर्पसरीसृपोरुगव्याल-
भुजगभुजङ्गकुम्भीनसपन्नगनागभोगिनः
अहिफणभृत्पृदाकुकाकोदरकञ्चुकिचक्रिगूढपाद्,
द्विरसनकाद्रवेयदर्वीकरदृक्श्रुतयो भुजङ्गमाः ६४०
आशीविषो दीर्घपृष्ठः कुण्डली जिह्मगः स्मृतः
verse 3.1.1.640
page 0073
नाममाला
Sanskrit
पन्नग, अहि, विषधर, लेलिहान, भुजङ्गम, नाग, उरग, फणिन्, सर्प
पन्नगोऽहिर्विषधरो लेलिहानो भुजङ्गमः
नागोरगौ फणी सर्पः तद्वैरी विनतात्मजः १२८
सुपर्णो गरुडस्तार्क्ष्यो गरुत्मान् शकुनीश्वरः
इन्द्रजिन्मन्त्रपूतात्मा वैनतेयो विषक्षयः १२९
verse 0.1.1.128
page 0065
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
भुजङ्गमः,
पुं,
(भुज कौटिल्ये + इगुपधेति कः ।भुजः कुटिलीभवन् गच्छतीति भुज +गम् + “गमेः सुपि बाच्यः ।” ३८८ ।इत्यस्य वार्क्तिकात् खच् “खच्चडिद्वाच्यः ।” इतिडिदभावे टिलोपाभावः ।) सर्पः इत्य-मरः (यथा, रघुः ७७ ।“आरूढमद्रीनुदधीन् वितीर्णंभुजङ्गमानां वसतिं प्रविष्टम्
”)सीसके, क्ली इति राजनिर्घण्टः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
भुजङ्गम पुंस्त्री० भुजः कुटिलीभवन् सन् गच्छति गम--खच्मुम् सर्पे अमरः स्त्रियां जातित्वात् ङीष् सीसकेन० राजनि० अश्लेषानक्षत्रे
पु०
Capeller
German
भुजंगम
m.
Schlange, Schlangendämon.