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प्रगल्भा (pragalbhA)

 
Monier Williams Cologne
English
प्र-°गल्भा
f.
a bold and confident woman (esp. one of the classes of heroines in dram. composition),
Sāh.
N.
of Durgā,
L.
Apte Hindi
Hindi
प्रगल्भा
स्त्री*
- प्र+गल्भ्+अच्+ टाप्
साहसी स्त्री
प्रगल्भा
स्त्री*
- प्र+गल्भ्+अच्+ टाप्
"कर्कशा, झगड़ालू स्त्री"
प्रगल्भा
स्त्री*
- प्र+गल्भ्+अच्+ टाप्
"उद्धत या प्रौढ़ स्त्री, काव्यनाटक को नायिकों में से एक"
Shabdartha Kaustubha
Kannada
प्रगल्भा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಧೈರ್ಯಶಾಲಿಯಾದ ಹೆಂಗಸು /ಚಂಡಿ /ಗಯ್ಯಾಳಿ /ಬೈಗುಳದ ಹೆಂಗಸು
L R Vaidya
English
pragalBa {% a. (f. ल्भा) %} 1. Bold, daring
2. eloquent, पुंवत्प्रगल्भा R.vi.20
3. spirited, courageous, R.ii.41
4. audacious, arrogant, officious, R.xiii.9
5. shameless
6. strong
7. mature, K.S.v.30
8. illustrious, eminent
9. developed, great.
pragalBA {% f. %} 1. A bold woman
2. a scolding woman, a shrew
3. a bold woman experienced in love-matters considered as a character in poetic composition. See मध्यमा and मुग्धा.
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
गौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ४७
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ४८
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ४९
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ५०
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ५१
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ५२
चारणा पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ५३
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ५४
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी
प्रकीर्णकेशी कुण्डा नीलवस्त्रोग्रचारिणी ५५
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ५६
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ५७
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ५८
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ५९
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी
-wordlist-
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शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
प्रगल्भा,
स्त्री,
(प्रगल्भते धृष्टा भवतीति प्र +गल्भ धार्ष्ट्ये + पचादित्वादच् ततष्टाप् ।)नायिकाभेदः अस्या लक्षणम् पतिमात्र-विषयकेलिकलापकोविदा अस्याश्चेष्टा रति-प्रीतिः आनन्दादात्मसंमोहः रतिप्रीति-र्यथा, --“संस्पृश्य स्तनमाकलय्य वदनं संश्लिष्य कण्ठस्थलंनिष्पीयाधरविम्बमम्बरमपाकृष्य व्युदस्यालकम् ।देवस्याम्बुजिनीपतेः समुदयं जिज्ञासमाने प्रियेवामाक्षी वसनाञ्चलैः श्रवणयोर्नीलोत्पलंनिह्नुते
”आनन्दादात्मसंमोहो यथा, --“नखाङ्कितमुरःस्थलेऽधरतले रदस्य क्षतंच्युता वकुलमालिका विगलिता मुक्तावली ।रतान्तसमये मया सकलमेतदालोचितंस्मृतिः क्व पतिः क्व क्व तवालिशिक्षा-विधिः
”सा मानावस्यायां त्रिविधा धीरा अधीराधीराधीरा व्यङ्ग्यकोपप्रकाशा धीरा ।अव्यङ्ग्यकोपप्रकाशा अधीरा व्यङ्ग्याव्यङ्ग्यकोप-प्रकाशा धीराधीरा प्रौढाधीरायास्तु रता-वौदास्यम् अधीरायास्तर्ज्जनताडनादि ।धीराधीराया रतावौदास्यं तर्ज्जनादि चकोपस्य प्रकाशकम् प्रौढाधीरा यथा, --“नो तल्पं भजसे जल्पसि सुधाधारानुकारागिरोदृक्पातं कुरुषे वा परिजने कोपप्रकाश-च्छलात् ।इत्थं केतकगर्भगौरि दयिते कोपस्य संगोपनंकिं स्यादेव नचेत् पुनः सहचरी कुर्व्वीत साचिस्मितम्
”प्रगल्भा अधीरा यथा, --“प्रतिफलमवलोक्य स्वीयमिन्दोः कलायांहरशिरसि परस्या वासमाशङ्कमाना ।गिरिशमचलकन्या तर्ज्जयामास कम्पप्रचलबलयवेल्लत्कान्तिभाजा करेण
”प्रगल्भा धीराधीरा यथा, --“तल्पोपान्तमुपेयुषि प्रियतमे साचीकृतग्रीवयाकाकुव्याकुलवाचि साचिहसितस्फुर्जत्कपोल-श्रिया ।हस्तन्यस्तकरे पुनर्मृगदृशा लाक्षारसक्षालित-प्रोष्ठीपृष्ठमयूखमांसलरुचो विस्फारिता दृष्टयः
”इति रसमञ्जरी
(तल्लक्षणञ्च यथा साहित्यदर्पणे १०१ ।“स्मरान्धा गाढतारुण्या समस्तरतकोविदा ।भावोन्नता दरव्रीडा प्रगल्भाक्रान्तनायका
”तस्या उदाहरणभेदादिकं तत्रैव विशेषतो द्रष्ट-व्यम्
)