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पेलृ (pelR)

 
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
पेल्
मूलधातुः:
पेलृ
धात्वर्थः:
गतौ
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
पेलति
धातुप्रदीपः
Sanskrit
पेलृँ पेलृ
मानकरूपान्तरम् - फेलृँ
फेलृ
मानकरूपान्तरम् - शेलृँ
शेलृ गतौ
- पेलति अपिपेलत् फेलति फेला शेलति ।। 542-544 ।।
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
पेलृँ पेलृ
मानकरूपान्तरम् - फेलृँ
फेलृ
मानकरूपान्तरम् - शेलृँ
शेलृ गतौ
- पेलति पेलितम् अपिपेलत् पेलं वृषणः पेलवं तनु पेलकस्त्वग्गन्धः फेलति फेला भुक्तोझितम् के (द्र0 31135) फेलः पलः शेलति, अशिशेलत् 530-532
धातुवृत्तिः
Sanskrit
पेलृँ पेलृ
मानकरूपान्तरम् - शेलृँ
शेलृ
मानकरूपान्तरम् - फेलृँ
फेलृ (अर्थः) गतौ
( पेलति अपिपेलत् पेला) भुक्तमुञ्ज्ञतम् (शेलति-अशिशेलत् ) अत्र क्वचित्खेलृषेलृसेलृ इत्यपि त्रयः पठ्यनते तत्र खेलतिर्मैत्रेयाद्यनुसारेणाग्रे पठिष्यते सेलतेस्तु दन्त्यादेः पाठः षोपदेशपर्युदासकाक्येनुपादानादनार्षः मूर्द्धन्यादिस्तु सेलुः श्लेष्मान्तक इत्यादिदर्शनाद् ग्राह्मः 536
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पेलृ गतौ”@} 2 पेलकः-लिका, पेलकः-लिका, पिपेलिषकः-षिका, पेपेलकः-लिका
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिककेलतिवत् 3 ज्ञेयानि।
पेला भुक्तसमुञ्झितम्।
पेलकः = त्वग्गन्धः।
पेलवम् = तनु।
औणादिकोऽयम्।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१०५८)
02
=>
(१-भ्वादिः-५४१। सक। सेट्। आत्म।)
03
=>
(२६२)