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पेपेषकः-षिका (pepeSakaH-SikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पेषृ प्रयत्ने”@} 2 ‘एषृ--’ इति धातोः पाठान्तरमिदम्।
पेषकः-षिका, पेषकः-षिका, पिपेषिषकः-षिका, पेपेषकः-षिका
इत्यादीनि रूपाणि भौवादिकगेपतिवत् 3 ज्ञेयानि।
क्विपि तु 4 पेट्-पेङ्-पेषौ- पेषः इति रूपम्।
कर्तरि क्तप्रत्यये अपेषितम् 5 इति।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(१०६०)
02
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(१-भ्वादिः-६१५। अक। सेट्। आत्म।)
03
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(४२९)
04
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[[१। ‘झलां जशोऽन्ते’ (८-२-३९) इति जश्त्वे चर्त्वविकल्पे रूपमेवम्।]]
05
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[[आ। ‘येषणाप्तहरिजेषसंभ्रमान्नेषितस्मृतिरपेषितो रथात्।।’ धा। का। १। ७८।]]