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पुपुथिषकः-पुपोथिषकः-षिका (puputhiSakaH-pupothiSakaH-SikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पुथ हिंसायाम्”@} 2 ‘पुथ्येत् पुन्थति हिंसार्थे, भाषार्थे पोथयेदिति।।’ 3 इति देवः।
पोथकः-थिका, पोथकः-थिका, पुपुथिषकः-पुपोथिषकः-षिका, पोपुथकः-थिका
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि दैवादिककुथ्यतिवत् 4 ज्ञेयानि।
पोथ्यम् 5।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१०१८)
02
=>
(४-दिवादिः-१११९। सक। सेट्। पर।)
03
=>
(श्लो। १००)
04
=>
(२१८)
05
=>
[[B। ‘तं प्लुष्यद्दृष्टिनृत्यद्रुषमपि गतत्रासमुत्कुथ्यदङ्गम् पोथ्यं प्रोचे स्वरेण स्वजनविगुधितं क्षिप्यता पुष्पमाध्वीम्।।’ धा। का। २। ५६।]]