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पुटकः-टिका (puTakaH-TikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पुट संसर्गे”@} 2 कथादिः, अदन्तश्च।
‘भाषासंसर्गसंश्लेषे पोटयेत् पुटेत् पुटेत्।।’ 3 इति देवः।
पुटकः-टिका, पुपुटयिषकः-षिका
इत्यादीनि सर्वाणि रूपाणि प्रायः चौरादिककथयतिवत् 4 बोध्यानि।
5 पुटयितुम्।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(१०१२)
02
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(१०-चुरादिः-१९१३। सक। सेट्। उभ।)
03
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(श्लो। ७५)
04
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(१६२)
05
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[[आ। ‘दुष्पारदुश्चरिततीरणकृद्यथेशो नो चक्षमे पुटयितुं तमकत्रितोष्मा।।’ धा। का। ३। ५९।]]