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पुंस (puMsa)

 
शब्दसागरः
English
पुंस r. 10th cl. (-पुंसयति-ते)
1. To punish, to pain.
2. To crush, to
grind. चु० उभ० सक० सेट्
Wilson
English
पुंस r. 10th cl. (पुसयति) To punish, to pain.
Monier Williams Cologne
English
पुंस in comp. for 2. पुंस्.
Monier Williams 1872
English
पुंस (at the end of a comp.) = 2. पुंस्
[cf.
न-प्°, महा-प्°, स्त्री-प्°।]
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
पुंस्
मूलधातुः:
पुंस
धात्वर्थः:
अभिवर्धने
गणः:
चुरादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
उभयपदी
रूपम्:
पुंसयति-ते
धातुप्रदीपः
Sanskrit
पुंसँ पुंस अभिवर्धने
- पुंसयति पुंसयामास 98
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
पुंस, मर्द्दे इति कविकल्पद्रुमः
(चुरां-परं-सकं-सेट् ।) ओष्ठ्यवर्गशेषोपधः संयोगादनु-स्वारः तेन क्विपि पुंसोऽसुङ्घावित्यसुङि पुमान् ।मर्द्दोऽभिमर्द्दनम् क, पुंसयति खलं राजा ।इति दुर्गादासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
पुंस मर्दे
चु०
उभ०
सक०
सेट् पुंसयति ते अपुपुंसत्
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
पुंसँ पुंस अभिमर्दने
- उत्पुंसयति 95
धातुवृत्तिः
Sanskrit
पुंसँ पुंस (अर्थः) अभिवर्द्धने
( पुंसयति ) 103
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“पुंस अभिवर्धने”@} 2 ‘--अभिमर्दने’ इति क्षीरस्वामी।
पुंसकः-सिका, पुपुंसयिषकः-षिका
3 पुन्-पुंसौ-पुंसः
4 पुंसना, इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि चौरादिकगन्धयतिवत् 5 ज्ञेयानि।
अस्योभयपदि- त्वात् शतरि पुंसयन्-न्ती, पुंसयिष्यन्-न्ती-ती, इति रूपे अधिके इति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१०३१)
02
=>
(१०-चुरादिः-१६३८। सक। सेट्। उभ।)
03
=>
[[१। ‘नकारजावनुस्वारपञ्चमौ झलि धातुषु। सकारजश्शकारश्चेर्षाट्टवर्गस्तवर्गजः।।’ इति अभियुक्तोक्त्याऽत्रानुस्वारो नकारस्थानिकः। तेन क्विपि संयोगान्तलोपे नकारान्तं रूपं प्रथमैकवचने बोध्यम्।]]
04
=>
[[आ। ‘न स्फिट्टयामि किमु चुम्बभिया स्थितोऽसि किं पूलितान्नकृतपुंसनयाऽत्र पुंसाम्।।’ धा। का। ३। २६।]]
05
=>
(३७५)