नन्दिनी (nandinI)
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Spoken Sanskrit
Englishनन्दिनी - nandinI - - particular composition
नन्दिनी - nandinI - - daughter
नन्दिनी - nandinI - - husband's sister
नन्दिनी - nandinI - - kind of metre
नन्दिनी - nandinI - - kind of perfume
नन्दिनी - nandinI - - sister of husband
Monier Williams Cologne
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Chandas
Sanskritसम-वृत्तम्, 52, 13
मात्राः - 18
सङ्ख्याजातिः - अतिजगती
द द दा द दा द द द दा द द दा दा
लक्षण-मूलम् - वृत्तरत्नाकरः
Apte Hindi
Hindiनन्दिनी
- -
पुत्री
नन्दिनी
- -
"ननद, पति की बहन"
नन्दिनी
- -
"काल्पनिक गाय, कामधेनु"
नन्दिनी
- -
गंगा का विशेषण
नन्दिनी
- -
पवित्र काली तुलसी
Shabdartha Kaustubha
Kannadaनन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದುರ್ಗಾದೇವಿ /ಪಾರ್ವತಿ
निष्पत्तिः - > टुनदि (समृद्धौ) - "णिनिः" (३-१-१३४) । "ङीप्" (४-१-५)
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಮಗಳು
प्रयोगाः - > "नन्दगोपस्य नन्दिनी" । "तेषां वधूस्त्वमसि नन्दिनि पार्थिवानाम्"
उल्लेखाः - > उ० रा० १-९
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪತಿಯ ಸಹೋದರಿ /ಗಂಡನ ಒಡಹುಟ್ಟಿದವಳು
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ನಂದಿನೀಧೇನು /ವಸಿಷ್ಠಮಹರ್ಷಿಯ ಹೋಮಧೇನು
प्रयोगाः - > "इति वादिन एवास्य होतुराहुतिसाधनम् ।अनिन्द्या नन्दिनी नाम धेनुराववृते वनात् ॥"
उल्लेखाः - > रघु० १-८२
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಗಂಗಾನದಿ
विस्तारः - > "नन्दिन्युमायां गङ्गायां ननन्दृधेनुभेदयोः" - मेदि० ।
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಸುರಸುರಕೆ ಗಿಡ
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ವ್ಯಾಡಿಯ ತಾಯಿ
नन्दिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಜಟಾಮಾಂಸಿ
L R Vaidya
EnglishBopp
LatinEdgerton Buddhist Hybrid
EnglishWordnet
Sanskrit नन्दिनी
वर्णवृत्तविशेषः।
"नन्दिन्यां त्रयोदश वर्णाः सन्ति।"
नन्दिनी
हिन्दूधर्मग्रन्थेषु वर्णिता वसिष्ठमुनेः धेनुः।
"नन्दिनीं सेवित्वा राजा दिलीपः रघुनामकं पुत्रं प्राप्तवान्।"
ननान्दा, नन्दिनी, नन्दा, पतिस्वसा
भर्तुः भगिनी।
"सुभद्रा सत्यभामायाः ननान्दा आसीत्।"
दुर्गा, उमा, कात्यायनी, गौरी, ब्रह्माणी, काली, हैमवती, ईश्वरा, शिवा, भवानी, रुद्राणी, सर्वाणी, सर्वमङ्गला, अपर्णा, पार्वती, मृडानी, लीलावती, चणडिका, अम्बिका, शारदा, चण्डी, चण्डा, चण्डनायिका, गिरिजा, मङ्गला, नारायणी, महामाया, वैष्णवी, महेश्वरी, कोट्टवी, षष्ठी, माधवी, नगनन्दिनी, जयन्ती, भार्गवी, रम्भा, सिंहरथा, सती, भ्रामरी, दक्षकन्या, महिषमर्दिनी, हेरम्बजननी, सावित्री, कृष्णपिङ्गला, वृषाकपायी, लम्बा, हिमशैलजा, कार्त्तिकेयप्रसूः, आद्या, नित्या, विद्या, शुभह्करी, सात्त्विकी, राजसी, तामसी, भीमा, नन्दनन्दिनी, महामायी, शूलधरा, सुनन्दा, शुम्यभघातिनी, ह्री, पर्वतराजतनया, हिमालयसुता, महेश्वरवनिता, सत्या, भगवती, ईशाना, सनातनी, महाकाली, शिवानी, हरवल्लभा, उग्रचण्डा, चामुण्डा, विधात्री, आनन्दा, महामात्रा, महामुद्रा, माकरी, भौमी, कल्याणी, कृष्णा, मानदात्री, मदालसा, मानिनी, चार्वङ्गी, वाणी, ईशा, वलेशी, भ्रमरी, भूष्या, फाल्गुनी, यती, ब्रह्ममयी, भाविनी, देवी, अचिन्ता, त्रिनेत्रा, त्रिशूला, चर्चिका, तीव्रा, नन्दिनी, नन्दा, धरित्रिणी, मातृका, चिदानन्दस्वरूपिणी, मनस्विनी, महादेवी, निद्रारूपा, भवानिका, तारा, नीलसरस्वती, कालिका, उग्रतारा, कामेश्वरी, सुन्दरी, भैरवी, राजराजेश्वरी, भुवनेशी, त्वरिता, महालक्ष्मी, राजीवलोचनी, धनदा, वागीश्वरी, त्रिपुरा, ज्वाल्मुखी, वगलामुखी, सिद्धविद्या, अन्नपूर्णा, विशालाक्षी, सुभगा, सगुणा, निर्गुणा, धवला, गीतिः, गीतवाद्यप्रिया, अट्टालवासिनी, अट्टहासिनी, घोरा, प्रेमा, वटेश्वरी, कीर्तिदा, बुद्धिदा, अवीरा, पण्डितालयवासिनी, मण्डिता, संवत्सरा, कृष्णरूपा, बलिप्रिया, तुमुला, कामिनी, कामरूपा, पुण्यदा, विष्णुचक्रधरा, पञ्चमा, वृन्दावनस्वरूपिणी, अयोध्यारुपिणी, मायावती, जीमूतवसना, जगन्नाथस्वरूपिणी, कृत्तिवसना, त्रियामा, जमलार्जुनी, यामिनी, यशोदा, यादवी, जगती, कृष्णजाया, सत्यभामा, सुभद्रिका, लक्ष्मणा, दिगम्बरी, पृथुका, तीक्ष्णा, आचारा, अक्रूरा, जाह्नवी, गण्डकी, ध्येया, जृम्भणी, मोहिनी, विकारा, अक्षरवासिनी, अंशका, पत्रिका, पवित्रिका, तुलसी, अतुला, जानकी, वन्द्या, कामना, नारसिंही, गिरीशा, साध्वी, कल्याणी, कमला, कान्ता, शान्ता, कुला, वेदमाता, कर्मदा, सन्ध्या, त्रिपुरसुन्दरी, रासेशी, दक्षयज्ञविनाशिनी, अनन्ता, धर्मेश्वरी, चक्रेश्वरी, खञ्जना, विदग्धा, कुञ्जिका, चित्रा, सुलेखा, चतुर्भुजा, राका, प्रज्ञा, ऋद्भिदा, तापिनी, तपा, सुमन्त्रा, दूती, अशनी, कराला, कालकी, कुष्माण्डी, कैटभा, कैटभी, क्षत्रिया, क्षमा, क्षेमा, चण्डालिका, जयन्ती, भेरुण्डा
सा देवी यया नैके दैत्याः हताः तथा च या आदिशक्तिः अस्ति इति मन्यते।
"नवरात्रोत्सवे स्थाने स्थाने दुर्गायाः प्रतिष्ठापना क्रियते।"
गङ्गा, मन्दाकिनी, जाह्नवी, पुण्या, अलकनन्दा, विष्णुपदी, जह्नुतनया, सुरनिम्नगा, भागीरथी, त्रिपथगा, तिस्त्रोताः, भीष्मसूः, अर्घ्यतीर्थम्, तीर्थरीजः, त्रिदशदीर्घिका, कुमारसूः, सरिद्वरा, सिद्धापगा, स्वरापगा, स्वर्ग्यापगा, खापगा, ऋषिकुल्या, हैमव्रती, सर्वापी, हरशेखरा, सुरापगा, धर्मद्रवी, सुधा, जह्नुकन्या, गान्दिनी, रुद्रशेखरा, नन्दिनी, सितसिन्धुः, अध्वगा, उग्रशेखरा, सिद्धसिन्धुः, स्वर्गसरीद्वरा, समुद्रसुभगा, स्वर्नदी, सुरदीर्घिका, सुरनदी, स्वर्धुनी, ज्येष्ठा, जह्नुसुता, भीष्मजननी, शुभ्रा, शैलेन्द्रजा, भवायना, महानदी, शैलपुत्री, सिता, भुवनपावनी, शैलपुत्री
भारतदेशस्थाः प्रधाना नदी या हिन्दुधर्मानुसारेण मोक्षदायिनी अस्ति इति मन्यन्ते।
"धर्मग्रन्थाः कथयन्ति राज्ञा भगीरथेन स्वर्गात् गङ्गा आनीता। "
तनया, कन्या, सुता, आत्मजा, दुहिता, पुत्री, कन्यका, नन्दिनी, अकृता, अङ्गजा
स्त्री अपत्यम्।
"स उत्तरस्य तनयाम् उपयेमे इरावतीम्।"
पार्वती, अम्बा, उमा, गिरिजा, गौरी, भगवती, भवानी, मङ्गला, महागौरी, महादेवी, रुद्राणी, शिवा, शैलजा, हिमालयजा, अम्बिका, अचलकन्या, अचलजा, शैलसुता, हिमजा, शैलेयी, अपर्णा, शैलकुमारी, शैलकन्या, जगद्जननी, त्रिभुवनसुन्दरी, सुनन्दा, भवभामिनी, भववामा, जगदीश्वरी, भव्या, पञ्चमुखी, पर्वतजा, वृषाकपायी, शम्भुकान्ता, नन्दा, जया, नन्दिनी, शङ्करा, शताक्षी, नित्या, मृड़ानी, हेमसुता, अद्रितनया, हैमवती, आर्या, इला, वारुणी
शिवस्य पत्नी।
"पार्वती गणेशस्य माता अस्ति।"
नन्दिनी
एका टीका ।
"नन्दिनी इति मनुस्मृतेः टीका वर्तते"
नन्दिनी
व्याडेः माता ।
"नन्दिनी कोशे परिगणिता"
नन्दिनी
स्कन्दस्य एका माता ।
"नन्दिन्याः उल्लेखः महाभारते वर्तते"
नन्दिनी, बाणनाशा
एका नदी ।
"नन्दिन्याः उल्लेखः ब्रह्मपुराणे वर्तते"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskritननान्दा तु स्वसा पत्युर्ननन्दा नन्दिनीत्यपि ।
ननान्दृ (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री)
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskritगौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ॥ ४७ ॥
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा ।
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ॥ ४८ ॥
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी ।
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ॥ ४९ ॥
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा ।
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ॥ ५० ॥
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया ।
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ॥ ५१ ॥
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा ।
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ॥ ५२ ॥
चारणा च पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी ।
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ॥ ५३ ॥
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी ।
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ॥ ५४ ॥
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी ।
प्रकीर्णकेशी कुण्डा च नीलवस्त्रोग्रचारिणी ॥ ५५ ॥
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा ।
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ॥ ५६ ॥
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना ।
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ॥ ५७ ॥
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी ।
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ॥ ५८ ॥
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा ।
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ॥ ५९ ॥
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी ।
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
मुरंदरा तु मुरला सुरवेला तु नन्दिनी ॥ १६५ ॥
मुरन्दरा (स्त्री), मुरला (स्त्री), सुरवेला (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री)
नाममाला
Sanskritसुता, पुत्री, आत्मजा, तनया, दारिका, नन्दिनी, अर्भका, स्तनन्धयी, उत्तानशया, दुहितृ
देहापघनकायाङ्गं वपुः संहननं तनुः ॥ ३८ ॥
कलेवरं शरीरं च मूर्तिः अस्मिन् भवः सुतः ।
पुत्रः सूनुरपत्यं च तुक् तोकं चात्मजः प्रजा ॥ ३९ ॥
उद्वहस्तनयः पोतो दारको नन्दनोऽर्भकः ।
स्तनन्धयोत्तानशयौ स्त्री चेद् दुहितरं विदुः ॥ ४० ॥
verse 0.1.1.38
page 0020
Tamil
Tamilநந்தி3னீ : மகள், கணவனின் சஹோதரி, தெய்வீகப் பசு, கங்கை, கருப்பு துளசி.
Mahabharata
EnglishNandinī^1, the cow of Vasishṭha: § 164 (Āpavop.): I, 99, 3933 (daughter of Surabhi and Kaśyapa).--§ 223 (Vāsishṭha): I, 175, 6663, 6664, 6665, 6669, 6670, 6672, 6673, 6675, (6677).
Nandinī^2, a tīrtha. § 370 (Tīrthayātrāp.): III, 84, 8133 (bathing there one acquires the merit of a human sacrifice).
Nandinī^3, a mātṛ. § 615u (Skanda): IX, 46, 2623.
पुराणम्
Englishनन्दिनी १ / NANDINĪ I. A cow of the world of the gods (devas). (See under kāmadhenu).
नन्दिनी २ / NANDINĪ II. A holy place. In this place there is a well esteemed by the gods. It is mentioned in mahābhārata, Vana Parva, Chapter 84, Stanza 15, that those who bathe in this holy well will obtain the fruits of Naramedhayajña (human sacrifice).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskritनन्दिनी, (नन्दयतीति । नन्दि + णिर्निः ।ङीप् ।) रेणुका । इति राजनिर्घण्टः ॥
(अस्यपर्य्यायो यथा, भावप्रकाशे ।“रेणुका राजपुत्त्री च नन्दिनी कपिला द्विजा ॥
”जटामांसी । तत्पर्य्यायो यथा, वैद्यकरत्न-मालायाम् ।“नलदं नन्दिनी पेषी मांसी कृष्णजटा जटी ।किरातिनी च जटिला लोमशा तु तपस्विनी ॥
”)उमा । गङ्गा । ननान्दा । वशिष्ठधेनुः । इतिमेदिनी । ने, ८१ ॥
सा च धेनुः सुरभिकन्या ।यथा, दिलीपं प्रति वशिष्ठवाक्यम् ।“पुरा शक्रमुपस्थाय तवोर्व्वीं प्रति यास्यतः ।आसीत् कल्पतरुच्छायामाश्रिता सुरभिः पथि ॥
इमां देवीमृतुस्नातां श्रुत्वा सपदि सत्वरः ।प्रदक्षिणक्रियार्हायां तस्यां त्वं साधुनाचरः ॥
अवजानासि मां यस्मादतस्ते न भविष्यति ।मत्प्रसूतिमनाराध्य प्रजेति त्वां शशाप सा ॥
”“इति वादिन एवास्य होतुराहुतिसाधनम् ।अनिन्द्या नन्दिनी नाम धेनुराववृते वनात् ॥
”इति रघुः । १ । ७५-८२ ॥
इमामेवाराध्य लब्धवरो दिलीपो रघुनामानंवंशतिलकं पुत्त्रं लब्धवान् ॥
* ॥
द्योनामा वसुः पत्नीवाक्यात् एनां हृत्वा वशिष्ठ-शापतः पृथिव्यां भीष्मनाम्ना विख्यात आसीत् ।एतत्कथा यथा, महाभारते । १ । ९९ । ११-३९ ।“अथ तद्वनमाजग्मुः कदाचिद्भरतर्षभ ! ।पृथ्वाद्या वसवः सर्व्वे देवा देवर्षिसेवितम् ॥
ते सदारा वनं तच्च सञ्चरन्तः समन्ततः ।रेमिरे रमणीयेषु पर्व्वतेषु वनेषु च ॥
तत्रैकस्याथ भार्य्या तु वसोर्वासवविक्रम ! ।सञ्चरन्ती वने तस्मिन् गां ददर्श सुमध्यमा ॥
नन्दिनीं नाम राजेन्द्र ! सर्व्वकामधुगुत्तमाम् ॥
सा विस्मयसमाविष्टा शीलद्रविणसम्पदा ।द्यवे वै दर्शयामास तां गां गोवृषभेक्षणाम् ॥
स्वापीनाञ्च सुदोग्ध्रीञ्च सुबालधिखुरां शुभाम् ।उपपन्नां गुणैः सर्व्वैः शीलेनानुत्तमेन च ॥
एवं गुणसमायुक्तां वसवे वसुनन्दिनी ।दर्शयामास राजेन्द्र पुरा पौरवनन्दन ! ॥
द्यौस्तदा तां तु दृष्ट्वैव गां गजेन्द्रेन्द्रविक्रम ! ।उवाच राजंस्तां देवीं तस्या रूपगुणान् वदन् ॥
एषा गौरुत्तमा देवी वारुणेरसितेक्षणा ।ऋषेस्तस्य वरारोहे ! यस्येदं वनमुत्तमम् ॥
अस्याः क्षीरं पिबेन्मर्त्यः स्वादु यो वै सुमध्यमे ! ।दशवर्षसहस्राणि स जीवेत् स्थिरयौवनः ॥
एतत् श्रत्वा तु सा देवी नृपोत्तम ! सुमध्यमा ।तमुवाचानवद्याङ्गी भर्त्तारं दीप्ततेजसम् ॥
अस्ति मे मानुषे लोके नरदेवात्मजा सखी ।नाम्ना जितवती नाम रूपयौवनशालिनी ॥
उशीनरस्य राजर्षेः सत्यसन्धस्य धीमतः ।दुहिता प्रथिता लोके मानुषे रूपसम्पदा ॥
तस्या हेतोर्महाभाग ! सवत्सां गां ममेप्सिताम् ।आनयस्वामरश्रेष्ठ ! त्वरितं पूण्यवर्द्धन ! ॥
यावदस्याः पयः पीत्वा सा सखी मम मानद ! ।मानुषेषु भवत्वेका जरारोगविवर्ज्जिता ॥
एतन्मम महाभाग कर्त्तुमर्हस्यनिन्दित ।प्रियं प्रियतरं ह्यस्मान्नास्ति मेऽन्यत् कथश्चन ॥
एतत् श्रुत्वा वचस्तस्या देव्याः प्रियचिकीर्षया ।पृथ्वाद्यैर्भ्रातृभिः सार्द्धं द्यौस्तदा तां जहार गाम् ॥
तया कमलपत्राक्ष्या नियुक्तो द्यौस्तदा नृप ! ।ऋषेस्तस्य तपस्तीव्रं न शशाक निरीक्षितुम् ।हृता गौः सा तदा तेन प्रपातस्तु न तर्कितः ॥
अथाश्रमपदं प्राप्तः फलान्यादाय वारुणिः ।न चापश्यत् स गां तत्र सवत्सां काननोत्तमे ॥
ततः स मृगयामास वने तस्मिंस्तपोधनः ।नाध्यगच्छच्च मृगयंस्तां गां मुनिरुदारधीः ॥
ज्ञात्वा तथापनीतां तां वसुभिर्दिव्यदर्शनः ।ययौ क्रोधवशं सद्यः शशाप च वसूंस्तदा ॥
यस्मान्मे वसवो जह्रुर्गां वै दोग्ध्रीं सुबालधिम् ।तस्मात् सर्व्वे जनिष्यन्ति मानुषेषु न संशयः ॥
एवं शशाप भगवान् वसूंस्तान् भरतर्षभ ! ।वशं क्रोधस्य संप्राप्त आपवो मुनिसत्तमः ।शप्त्वा च तान् महाभागस्तपस्येव मनो दधे ॥
एवं स शप्तवान् राजन् ! वसूनष्टौ तपोधनः ।महाप्रभावो ब्रह्मर्षिर्देवान् क्रोधसमन्वितः ॥
अथाश्रमपदं प्राप्तास्ते वै भूयो महात्मनः ।शप्ताः स्म इति जानन्त ऋषिं तमुपचक्रमुः ॥
प्रसादयन्तस्तमृषिं वसवः पार्थिवर्षभ ! ।लेभिरे न च तस्मात्ते प्रसादमृषिसत्तमात् ।आपवात् पुरुषव्याघ्र ! सर्व्वधर्म्मविशारदात् ॥
उवाच च स धर्म्मात्मा शप्ता यूयं धरादयः ।अनुसंवत्सरात् सर्व्वे शापमोक्षमवाप्स्यथ ॥
अयन्तु यत्कृते यूयं मया शप्ताः स वत्स्यति ।द्यौस्ततो मानुषे लोके दीर्घकालं स्वकर्म्मणा ॥
नानृतं तच्चिकीर्षामि युष्मान् क्रुद्धो यदब्रुवम् ।न प्रजास्यति चाप्येष मानुषेषु महामनाः ॥
भविष्यति च धर्म्मात्मा सर्व्वशास्त्रविशारदः ।पितुः प्रियहिते युक्तः स्त्रीभोगान् वर्ज्जयिष्यति ॥
”)तस्याः प्रभावो यथा, --“वशिष्ठस्याश्रमपदं ब्रह्मस्थानमनुत्तमम् ।अपश्यज्जयतां श्रेष्ठो विश्वामित्रो महामनाः ॥
ततो वशिष्ठो भगवान् कथान्ते मुनिसत्तमः ।विश्वामित्रमिदं वाक्यमुवाच प्रहसन्निव ॥
आतिथ्यं कर्त्तमिच्छामि बलस्यास्य महाबलः ।तव चैवाप्रमेयस्य यथार्हं प्रतिगृह्यताम् ॥
वाढमित्येव गाधेयो वशिष्ठं प्रत्युवाच ह ।एवमुक्तो महातेजा वशिष्ठो जपतां वरः ॥
आजुहाव ततः प्रीतः कल्माषीं धुतकल्मषाम् ।भोजनेन महार्हेण सत्कारं तद्बिधत्स्व मे ॥
एवमुक्ता वशिष्ठेन शबला शत्रुसूदन ! ।विदधे विविधान् कामान् यस्य यस्य यथेप्सितान् ॥
सान्तःपुरजनो राजा सब्राह्मणपुरोहितः ।युक्तः परमहर्षेण वशिष्ठमिदवब्रवीत् ॥
गवां शतसहसेण दीयतां शबला मम ।एवमुक्तस्तु भगवान् वशिष्ठो मुनिसत्तमः ॥
विश्वामित्रेण धर्म्मात्मा प्रत्युवाच महीपतिम् ।कारणैर्बहुभी राजन्न दास्ये नन्दिनीं तव ॥
कामधेनुं वशिष्ठोऽसौ न तत्याज यदा मुनिः ।ततोऽस्य शबलां राजा विश्वामित्रस्तदाहरत् ॥
तस्या हम्बारवाज्जाताः काम्बोजा रविसन्निभाः ।ऊधसश्चाभिसंजाताः पह्नवाः शस्त्रपाणयः ॥
योनिदेशाच्च यवनाः शकृद्देशाच्छकास्तथा ।रोमकूपेषु च म्लेच्छास्तथा रामकिरातकाः ॥
तैस्तन्निसूदितं सैन्यं विश्वामित्रस्य तत्क्षणात् ।सपदातिगजं साश्वं सरथं रघुनन्दन ! ॥
”इति रामायणे आदिकाण्डम् ॥
(एतद्विवरणं महाभारते । १ । १७७ । अध्याये चविस्तरशो द्रष्टव्यम् ॥
कन्या यथा, हरिवंशे ।१७६ । ७ ।“मेध्यां गोकुलसम्भूतां नन्दगोपस्य नन्दिनीम् ॥
”आनन्दजननात् पत्न्यपि । यथा, महाभारते ।१ । ९९ । १६ ।“एवं गुणसमायुक्तां वसवे वसुनन्दिनी ।दर्शयामास राजेन्द्र ! पुरा पौरवनन्दनः ॥
”“वसुनन्दिनी वसुप्रिया ।” इति नीलकण्ठः ॥
स्कन्दानुचरमातृगणविशेषः । यथा, महा-भारते । ९ । ४६ । ५ ।“शृणु मातृगणान् राजन् ! कुमारानुचरानि-मान् ॥
”“वसुदामा सुदामा च विशोका नन्दिनी तथा ॥
”तीर्थविशेषः । यथा, महाभारते । ३ । ८४ ।१४५ ।“नन्दिन्याञ्च समासाद्य कूपं देवनिषेवितम् ।नरमेधस्य यत् पुण्यं तदाप्नोति नराधिप ! ॥
”व्याडिमुनिमाता । इति हेमचन्द्रः । ३ । ५१६ ॥
त्रयोदशाक्षरवृत्तिविशेषः । अस्य विवरणं छन्दः-शब्दे द्रष्टव्यम् । दुर्गा । इयन्तु देविकातटे पीठ-स्थाने विराजते । यथा, देवीभागवते । ७ ।३३ । ६९ ।“शिवकुण्डे शुभा नन्दा नन्दिनी देविकातटे ॥
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskritनन्दिनी स्त्री नन्द--णिनि ङीप् । १ दुर्गायां २ गङ्गायां ३ न-न्ददरि ४ वसिष्ठधेन्याञ्च मेदि० । ५ रेणुकागन्धद्रव्ये राजनि० ।६ कन्यायां च “नन्दगोपस्य नन्दिनी” हरिवं० वसिष्ठ-धेनुश्च सुरभिकन्या । “सुनां तदीयां सुरभेः कृत्वाप्रतिनिधिं शुचिः । आराधय सपत्रीकः प्रीता काम-दुघा हि सा । इति वादिन एवास्य होतुराहुति-साधनम् । अनिन्द्या नन्दिनी नाम धेनुरावृते वनात्”रघुः । “इह नन्दिनीसजसैर्गुरुयुक्तैः” वृ० र० टी० उक्ते७ त्रयोदशाक्षरपादके वर्णवृत्तभेदेवसिष्टधेन्वा प्रभावो रामा० बालका० उक्तो यथा“युक्तःपरमहर्षेण बशिष्ठमिदमब्रवीत् । गवां शतसहस्रेणदीयतां शबला मम । एवमुक्तस्तु भगवान् वशिष्ठो मुनि-सत्तमः । विश्वामित्रेण धर्मात्मा प्रत्युवाच महीपतिम् ।कारणैर्बहुभीराजन्न दास्ये नन्दिनीं तव । कामधेनुंबशिष्ठोऽसौ न तत्याज यदा मुनिः । ततोऽस्य शबलांराजा विश्वामित्रस्तदाहरत् । तस्याहम्बारवाज्जाताःकाम्वोजा रविसन्निभाः । जधसश्चाभिसंजाताः पह्नवाःशस्त्रपाणयः । योनिदेशाच्च यवनाः शकृद्देशाच्छका-स्तथा । रोमकूपेषु च म्लेच्छास्तथा राम! किरातकाः ।तैस्तन्निसूदितं सैन्यं विश्वामित्रस्य तत्क्षणात्” ।८ व्याडिमातरि च ।
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