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द्विजिह्व (dvijihva)

 
शब्दसागरः
English
द्विजिह्व (mfn. ) (-ह्वः-ह्वा-ह्वं) Double-tongued, (literally or figuratively.)
m.
(-ह्वः)
1. A snake.
2. An informer.
3. A rogue, a scoundrel, a
bad man.
4. A thief.
E.
द्वि two, जिह्वा the tongue. द्वे जिह्वे यस्य
Capeller Eng
English
द्वि॑जिह्व
a.
two-tongued, double-tongued (lit. &
fig.
)
m.
a snake.
Yates
English
द्वि-जिह्व (ह्वः) 1.
m.
A snake
inform-
er, rogue.
a. Double-tongued.
Spoken Sanskrit
English
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- one who has two tongues
सुहिता - suhitA -
f.
- one of the tongues of fire
अतिरक्ता - atiraktA -
f.
- one of agni's seven tongues
वसुप्रभा - vasuprabhA -
f.
- one of the 7 tongues of fire
सुप्रभ - suprabha -
m.
- one of the 7 tongues of Fire
मन्त्रजिह्व - mantrajihva -
m.
- having sacred text for tongues
कनका - kanakA -
f.
- one of the seven tongues of fire
विश्वदासा - vizvadAsA -
f.
- one of the seven tongues of fire
श्वेता - zvetA -
f.
- one of the seven tongues of Fire
हिरण्या - hiraNyA -
f.
- one of the seven tongues of fire
अनुवह - anuvaha -
m.
- one of the seven tongues of fire
आवह - Avaha -
m.
- one of the seven tongues of fire
उद्वह - udvaha -
m.
- one of the seven tongues of fire
विवह - vivaha -
m.
- of one of the seven tongues of fire
धूमिनी - dhUminI -
f.
- one of the seven tongues of god of fire
काली - kAlI -
f.
- one of the seven tongues or flames of fire
सहस्रभुजजिह्वाक्ष - sahasrabhujajihvAkSa -
adj.
- having a thousand arms and tongues and eyes
कराली - karAlI -
f.
- one of the seven tongues and nine samidhs of god of fire
जिह्व - jihva -
m.
- tongue or tongues of god of fire i.e. various forms of flame
द्विजिह्व - dvijihva -
adj.
- double-tongued
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- scoundrel
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- serpent
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- snake
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- thief
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- informer
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- villain
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- particular disease of the tongue
द्विजिह्व - dvijihva -
m.
- one who has two tongues
Wilson
English
द्विजिह्व
mfn.
(ह्वः-ह्वा-ह्वं) Double-tongued, (literally or
figuratively.)
m.
(-ह्वः)
1 A snake.
2 An informer.
3 A rogue, a scoundrel, a bad man.
4 A thief.
E.
द्वि two, जिह्वा the tongue.
Monier Williams Cologne
English
द्वि॑—जिह्व (द्वि॑-),
mfn.
double-tongued (lit. and fig.),
AV.
MBh.
&c.
(-ता
f.
-त्व,
n.
,
Kāv.
)
द्वि॑—जिह्व
m.
a partic. disease of the tongue,
Suśr.
a snake,
MBh.
R.
&c.
informer, thief, scoundrel, villain,
W.
N.
of a Rakṣas,
R.
Macdonell
English
द्विजिह्व dví-jihva,
a.
double-tongued (-tā, 🞄f. abst. ɴ.)
deceitful
m.
serpent.
Apte Hindi
Hindi
द्विजिह्वः
पुं*
द्वि- जिह्वः -
साँप
द्विजिह्वः
पुं*
द्वि- जिह्वः -
"संसूचक, मिथ्यानिन्दक, चुगलखोर"
द्विजिह्वः
पुं*
द्वि- जिह्वः -
कपटी पुरुष
Shabdartha Kaustubha
Kannada
द्विजिह्व
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಸರ್ಪ /ಹಾವು
व्युत्पत्तिः - > द्वे जिह्वे अस्य
द्विजिह्व
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಖಲ /ದುರ್ಜನ
विस्तारः - > "द्विजिह्वौ सर्पसूचकौ" - अम०
L R Vaidya
English
dvi-jihva {% m. %} 1. a snake, Bh.V.i.20, R.xi.64, xiv.41
2. an informer, a tale-bearer.
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
द्विजिह्व
पु
द्विजिह्व, सूचक, भुजङ्गम
द्विजिह्वः सूचको ज्ञेयो द्विजिह्वस्तु भुजङ्गमः
verse 2.1.1.52
page 0011
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
दोषैकदृक्पुरोभागी कर्णेजपस्तु दुर्जनः
पिशुनः सूचको नीचो द्विजिह्वो मत्सरी खलः ३८०
-wordlist-
दोषैकदृश् (पुं), पुरोभागिन् (पुं), कर्णेजप (पुं), दुर्जन (पुं), पिशुन (पुं), सूचक (पुं), नीच (पुं), द्विजिह्व (पुं), मत्सरिन् (पुं), खल (पुं)
--source--
जाहको गात्रसंकोची मण्डली नकुलः पुनः
पिङ्गलः सर्पहा बभ्रुः सर्पोऽहिः पवनाशनः १३०२
भोगी भुजंगभुजगावुरगो द्विजिह्वव्यालौ भुजंगमसरीसृपदीर्घजिह्वाः
काकोदरो विषधरः फणभृत्पृदाकुर्दृक्कर्णकुण्डलिबिलेशयदन्दशूकाः १३०३
दर्वीकरः कञ्चुकिचक्रिगूढपात्पन्नगा जिह्मगलेलिहानौ
कुम्भीनसाशीविषदीर्घपृष्ठाः स्याद्राजसर्पस्तु भुजंगभोजी १३०४
-wordlist-
जाहक (पुं), गात्रसङ्कोचिन् (पुं), मण्डलिन् (पुं), नकुल (पुं), पिङ्गल (पुं), सर्पहन् (पुं), बभ्रु (पुं), सर्प (पुं), अहि (पुंस्त्री), पवनाशन (पुं), भोगिन् (पुं), भुजङ्ग (पुं), भुजग (पुं), उरग (पुं), द्विजिह्व (पुं), व्याल (पुं), भुजङ्गम (पुं), सरीसृप (पुं), दीर्घजिह्व (पुं), काकोदर (पुं), विषधर (पुं), फणभृत् (पुं), पृदाकु (पुं), दृक्कर्ण (पुं), कुण्डलिन् (पुं), बिलेशय (पुं), दन्दशूक (पुं), दर्वीकर (पुं), कञ्चुकिन् (पुं), चक्रिन् (पुं), गूढपाद् (पुं), पन्नग (पुं), जिह्मग (पुं), लेलिहान (पुं), कुम्भीनस (पुं), आशीविष (पुं), दीर्घपृष्ठ (पुं), राजसर्प (पुं), भुजङ्गभोजिन् (पुं)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
दुर्जन
दुर्जन, पिशुन, क्षुद्र, नीच, कर्णेजप, खल, दोषग्राहिन्, पुरोभागिन्, द्विजिह्व, मत्सरिन्
दुर्जनः पिशुनः क्षुद्रो नीचः कर्णेजपः खलः
दोषग्राही पुरोभागी द्विजिह्वो मत्सरी मतः ३४६
verse 2.1.1.346
page 0041
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
द्विजिह्वः,
पुं,
(द्वे जिह्वे यस्य ।) सर्पः (अस्यपर्य्यायो यथा वैद्यकरत्नमालायाम् ।“व्याडश्चाशीविषः सर्पोद्विजिह्वोऽहिः सरीसृपः ।चक्षुःश्रवा दन्दशूको गूढपात्पन्नगोरगाः
”)सूचकः इत्यमरः १३३
(यथा, माधे ६३ ।“परस्य मर्म्माविधमुज्झतां निजंद्विजिह्वतादोषमजिह्मगामिभिः
”)खलः इति मेदिनी वे, १२
चौरः ।दुःसाध्यः इति शब्दरत्नावली
(रोग-विशेषः यथा, सुश्रुते निदानस्थाने १४ अध्याये ।“ज्ञेयो द्विजिह्वः खलु रोग एषविवर्ज्जयेदागतपाकमेनम्
”त्रि, द्विजिह्वाविशिष्टः यथा, महाभारते ।१ ३४ २४ ।“द्बिजिह्वाश्च कृताः सर्पा गरुडेन महात्मना
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
द्विजिह्व पुंस्त्री० द्वे जिह्वे नस्य सर्पे स्त्रियां जातित्वात्ङीष् तेषां द्विजिह्वत्वकथा भा० आ० ३४ अ० यथा“अथ सर्पानुवाचेदं सर्वान् परमहृष्टवत् इदमा-नीतममृतं निक्षेप्स्यामि कुशेषु वः स्नाता मङ्गल-संयुक्तास्ततः प्राश्नीत पन्नगाः! भवद्भिरिदमासीनैर्यदुक्तंतद्वचस्तदा अदासी चैव मातेयमद्यप्रभृति चास्तु मे ।यथोक्तं भवतामेतद्वचो मे प्रतिपादितम् ततः स्नातुंगताः सर्पाः प्रत्युक्त्वा तं तथेत्युत शक्रोऽप्यमृतमाक्षिप्यजगाम त्रिदिवं पुनः अथागतास्तमुद्देशं सर्पाः सुधा-र्थिनस्तदा स्नाताश्च कृतजप्याश्च प्रहृष्टाः कृतमङ्गलाः ।यत्रैतदमृतं चापि स्थापित कुशसंस्तरे तद्विज्ञायहृतं सर्पाः प्रतिमायाकृतञ्च तत् सोमस्थानमिदं चेतिदर्भांस्ते लिलिहुस्तदा ततो द्विधाकृता जिह्वा सर्पाणांतेन कर्मणा अभवंश्चामृतस्पर्शाद्दर्भास्तेऽथ पवित्रि-णः एवं तदमृतं तेन हृतमा हृतमेव द्विजि-ह्वाश्च कृताः सर्पा गरुडेन महात्मना” सूचके चत्रि० अमरः खले मेदि० चौरे दुःसाध्ये चशब्दर० तेषां सर्पतुल्यमर्माविधत्वात्तथात्वम् “परस्यमर्माविधमुज्झतां निजम् द्विजिह्वतादोषमजिह्मगा-मिभिः” “तमिद्धमाराधयितुं सकर्णकैः कुलैर्न्न भेजेफणिनां भुजङ्गता” माघः
Capeller
German
द्वि॑जिह्व zweizünig (auch übertr.)
m.
Schlange.
Burnouf
French
द्विजिह्व द्विजिह्व a. (द्वि) qui a deux langues, bilingue.
-- S.
m.
serpent.
Délateur.
Imposteur
filou, escroc.