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द्यै (dyai)

 
शब्दसागरः
English
द्यै r. 1st cl. (द्यायति) To despise, to reprove, to treat or name with
contempt.
द्यै ind. Fie, for shame.
E.
द्यै, and क्विप्
aff.
Yates
English
द्यै द्यायति 1.
a. To despise
to reprove.
द्यै
interj. Fie.
Wilson
English
द्यै r. 1st cl. (द्यायति) To despise, to reprove, to treat or name
with contempt.
द्यै ind. Fie, for shame.
E.
द्यै, and क्विप्
aff.
Apte
English
द्यै [dyai], 1
P.
(द्यायति)
To despise, treat with contempt.
To disfigure.
Apte 1890
English
द्यै {c1c} P. (द्यायति) 1 To despise, treat with contempt.
2 To disfigure.
Monier Williams Cologne
English
1. द्यै
cl.
1.
P.
द्यायति (Dhātup. xxii, 9), to despise, ill-treat.
2. द्यै
ind.
fie! for shame!
W.
Monier Williams 1872
English
द्यै 1. द्यै, cl. 1. P. द्यायति, दद्यौ, &c.,
to despise, reprove, treat with contempt
to
disfigure.
2. द्यै, ind. fie! for shame!
Benfey
English
द्यै द्यै, i. 1, Par. To treat
contemptuously or to disfigure.
Apte Hindi
Hindi
द्यै
भ्वा* पर* - -
"घृणा करना, तिरस्कार युक्त व्यवहार करना"
द्यै
भ्वा* पर* - -
विरूप करना
L R Vaidya
English
dyE {% vt. 1P (pres. द्यायति) %} To despise, to treat with contempt.
Kridanta Forms
Sanskrit
द्यै (द्यै॒ न्यक्करणे - भ्वादिः - अनिट्)
ल्युट् = द्यानम्
अनीयर् = द्यानीयः - द्यानीया
ण्वुल् = द्यायकः - द्यायिका
तुमुँन् = द्यातुम्
तव्य = द्यातव्यः - द्यातव्या
तृच् = द्याता - द्यात्री
क्त्वा = द्यात्वा
ल्यप् = प्रद्याय
क्तवतुँ = द्यानवान् - द्यानवती
क्त = द्यानः - द्याना
शतृँ = द्यायन् - द्यायन्ती
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
द्यै
मूलधातुः:
धात्वर्थः:
न्यक्करणे
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
अनिट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
द्यायति
अनुबन्धादिविशेषः:
ऐकारान्तः
धातुप्रदीपः
Sanskrit
द्यै न्यक्करणे
- द्यायति दद्यौ द्यानः ।। 909 ।।
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
द्यै, न्यक्वरणे इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वां-परं-सकं-अनिट् ।) अन्त्यस्थाद्ययुक्तः द्यायति दुष्टंलोकः इति दुर्गादासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
द्यै न्यक्करणे
भ्वा०
सक०
अनिट् द्यायति अद्यासीत् दद्यौ
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
द्यै न्यङ्गविधाने
- (अर्थविवरणम्) न्यङ्गं कुत्सिताङ्गम्
द्यायति 875
धातुवृत्तिः
Sanskrit
द्यै (अर्थः) न्यक्करणे
न्यङ्गविभानइति क्षीरस्वामी (अर्थविवरणम्) न्यङ्गं कुत्सिताङ्गम्
( द्यायति दद्यावित्यादि ) ग्लायतिवत् 889
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“द्यै न्यक्करणे”@} 2 ‘न्यङ्गविधाने’ इति क्षीरस्वामी।
न्यङ्गम् = कुत्सिताङ्गम्।
द्यायकः-यिका, द्यापकः-पिका, दिद्यासकः-सिका, दाद्यायकः-यिका
3 इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिवकायतिवत् 4 ज्ञेयानि।
निष्ठायाम्- 5 द्यानम् 6 -द्यानः-द्यानवान् इति रूपाणीति विशेषः।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(८७५)
02
=>
(१-भ्वादिः-९०५। सक। अनि- पर।)
03
=>
[पृष्ठम्०७७६+ २५]
04
=>
(२६३)
05
=>
[[१। ‘संयोगादेरातो धातोर्यण्वतः’ (८-२-४३) इति निष्ठानत्वम्।]]
06
=>
[[आ। ‘धयन् दृशा ग्लानरुचिं कृष्णं म्लानिं त्यजन् द्यानमले जलान्ते।’ धा। का। २। ३०।]]