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देहभुग् (dehabhug)

 
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
देहभुग्
त्रि०
देहे भुङ्क्ते कर्मफलानि भुज--क्विन् दे-हाभिमानिनि जीवे देहं भुङ्क्ते भोजयति कर्मसाक्षि-त्वात् भुज--अन्तर्भूतण्यर्थे क्विन् सूर्य्ये
पु०
“देह-भुग् देहिनां गतिः” भा० अनु० १६ अ० सूर्यनामोक्तौ