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देदेवकः-विका (dedevakaH-vikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“देवृ देवने”@} 2 ‘अर्दने देवयेत् दीव्येत् क्रीडादौ परिकूजने।।
देवयेतेदितो दिन्वेद् देवेर्देवेत देवने।’ 3 इति देवः।
देवकः-विका, देवकः-विका, दिदेविषकः-षिका, देदेवकः-विका
इत्यादीनि सर्वाणि रूपाणि भौवादिककेपतिवत् 4 ज्ञेयानि।
5 देवनम्।
6 आदेवकः, 7 परिदेवी 8, 9 दयूः-दय्वौ-दय्वः, 10 इति अरन्प्रत्ययः।
देवरः = पति- भ्राता।]] देवरः, 11 इति कलप्रत्ययः।
देवलः = ऋषिः।]] देवलः, देवनः युजन्तोऽयम्।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(८७०)
02
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(१-भ्वादिः-५००। अक। सेट्। आत्म।)
03
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(श्लो। १६०-६१)
04
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(२६१)
05
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[[आ। ‘कलोरुकल्लोलकलिन्दजाजले बालैस्तयूभिस्सह देवनोत्सुकम्।।’ धा। का। १। ६४।]]
06
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[[२। ‘देविक्रुशोश्चोपसर्गे’ (३-२-१४७) इति तच्छीलादिषु कर्तृषु वुन्प्रत्ययः।]]
07
=>
[[३। ‘सम्पृचानुरुधाङ्यमाङ्यसपरिसृसंसृजपरिदेवि--’ (३-२-१४२) इति तच्छीलादिषु कर्तृषु घिनुण्प्रत्ययः।]]
08
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[[B। ‘श्रुत्वा विस्फूर्जथुप्रख्यं निनादं परिदेविनी।’ भ। का। ५। ५३।]]
09
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[[४। क्विपि, वकारस्य ऊठि, अयादेशे, रूपम्।]]
10
=>
[[५। ‘अर्त्तिकमिभ्रमिदेवि--’ [द। उ। ८-६२]
11
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[[६। ‘वृषादिभ्यश्चित्’ [द। उ। ८-१०९]