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दिद्रेकिषकः-षिका (didrekiSakaH-SikA)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“द्रेकृ शब्दनोत्साहयोः”@} 2 ‘उत्साहः = वृद्धिरौद्धत्यञ्च।
‘शब्दोत्साहे’ इति केचित्।
यदाह काश्यपः- ‘द्रेकते = शब्देनोत्साहं करोति।’ इति मा।
धा।
वृत्तिः।
द्रेककः-किका, द्रेककः-किका, दिद्रेकिषकः-षिका, देद्रेककः-किका
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिकगेपतिवत् 3 ज्ञेयानि।
घञि 4 द्रेकः-उद्द्रेकः।
5
प्रासङ्गिक्यः
01
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(८८७)
02
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(१-भ्वादिः-७८। अक। सेट्। आत्म।)
03
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(४२९)
04
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[[B। ‘तमुत्तमश्लोकमवेक्ष्य तत्स्तुतिद्रेकैरुपध्रेकयिताऽस्मि दिक्तटम्।।’ धा। का। १। ११।]]
05
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[पृष्ठम्०७८५+ २५]