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दण्डापूपन्यायः (daNDApUpanyAyaH)

 
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दण्डापूपन्यायः
पुं*
दण्डापूप-न्यायः -
"डंडे और पूड़े का न्याय, जब डंडा और पूड़ा एक ही स्थान पर रक्ख गये - और एक व्यल्ति ने कह कि डंडे को तो चूहे घसीट कर ले गये और खा लिया, तो दूसरा व्यक्ति स्वभावतः यह समझ् लेता है कि पूड़ा तो खा ही लिया गया होगा - क्योंकि व्ह उसके पास ही रक्खा था। इसलिए जब कोई वस्तु दूसरी के साथ विशेष रूप से अत्यंत संबद्ध होती है और् एक वस्तु के संबंध में हम कुछ कहते हैं तो वही बात दूसरी के साथ भी अपने आप लागू हो जाती है, "
लौकिकन्यायः
English
(i) मूषिकेण दण्डो भक्षित इत्यनेन तत्सहचरितमपूप भक्षणमर्थादायातं भवतीति नियतसमानन्यायाद थीन्तरमापतनीत्येव न्यायो दण्डापूपिकः।
(iii) याज्ञवल्क्यस्मृति मिताक्षराटीका --2.126
सम्भावितस्यस्वातन्त्रस्य पितृस्थानीयस्य ज्येष्ठस्यापि दोषं वदता ज्येष्ठपरतन्त्राणां कनीयसां पुत्रस्थानीयानां दण्डापूपनीत्या सुतरां दोषो दर्शित एव। Once some cakes were affixed to a stick. A person brought the news that the stick was eaten by a mouse. The eating up of a stick conveys that the cakes have also been eaten. The maxim based on this incident shows that when something is destroyed, things associated with it are also supposed to have been destroyed.