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णय (Naya)

 
शब्दसागरः
English
णय r. 1st cl. (नयते प्रणयते)
1. To go, to move or approach.
2. To pres-
erve, to protect, to defend. भ्वादि-पर-सक-सेट्
Yates
English
णय (ञ) नयति, ते 1.
c. To go, to ap-
proach
to preserve
to defend.
Wilson
English
णय r. 1st cl. (नयते प्रणयते)
1 To go, to move or approach.
2 To preserve, to protect, to defend.
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
नय्
मूलधातुः:
णय
धात्वर्थः:
गतौ
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
आत्मनेपदी
रूपम्:
नयते
धातुप्रदीपः
Sanskrit
णयँ णय रक्षणे
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
णय, गतौ रक्षे इति कविकल्पद्रुमः
(दिवां-आत्मं-सकं-सेट् ।) ङ, नयते इति दुर्गा-दासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
णय गतौ रक्षणे
भ्वा०
पर०
सक०
सेट् नयति प्रणयति अनयीत् ननाय नेयतुः
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“णय गतौ”@} 2 ‘--रक्षणे च’ इति मैत्रेयः।
क्षीरस्वामी तु ‘नय--’ इति पपाठ।
पाठश्चिन्त्यः।
सर्वत्र णोपदेशेनैवोपलम्भात्।
नायकः-यिका, नायकः-यिका, निनयिषकः-षिका, नानयकः-यिका
3 नयितः, 4 प्रणयमानः, इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि भौवादिकचयतिवत् 5 ज्ञेयानि।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(६६५)
02
=>
(१-भ्वादिः-४८०। सक। सेट्। आत्म।)
03
=>
[[आ। ‘प्रतय्य किञ्चिन्नयितो गृहान्तिकं ददर्श धन्यः दयालुमीश्वरम्।’ धा। का। १। ६२।]]
04
=>
[[४। ‘उपसर्गादसमासेऽपि णोपदेशस्य’ (८-४-१४) इति णत्वम्।]]
05
=>
(५०२)