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ज्या (jyA)

 
शब्दसागरः
English
ज्या r. 9th cl. (जिनाति) To decay, to be or become old. क्य्रा० प्वा० पर० अक० अनिट्
ज्या
f.
(ज्या)
1. A mother.
2. The earth, 3. A bowstring.
4. The chord
of an are.
E.
ज्या to become old, to decay, affixes अघ्न्या० यक्
Capeller Eng
English
1 ज्या जिना॑ति
pp.
जित॑ overpower, oppress, deprive of (2
acc.
),
P.
जीय॑ते (जी॑यते),
D.
जि॑ज्यासति अधि & प्र
overwhelm.
2 ज्या॑
f.
force, violence.
3 ज्या॑
f.
bow-string.
Yates
English
ज्या (ग) जिनाति 9.
a. To decay.
ज्या (ज्या) 1.
f.
A mother
the earth
a bow-string
chord of an arc.
Wilson
English
ज्या r. 9th cl. (जिनाति) To decay, to be or become old.
ज्या
f.
(-ज्या)
1 A mother.
2 The earth.
3 A bowstring.
4 The chord of an arc.
E.
ज्या to become old, to decay, affixes अङ्, and टाप्.
Apte
English
ज्या [jyā], 9
P.
(जिनाति)
To overpower, oppress.
To grow old.
Ā. (जीयते) To be oppressed.
ज्या [jyā], 1 A bow-string
विश्रामं लभतामिदं शिथिलज्याबन्ध- मस्मद्धनुः
Ś.*
2.6
R.*
3.59
11.15
12.14.
The chord of an arc.
The earth.
A mother.
Overpowering force or strength.
Excessive demand, importunity.
A kind of wooden stick (शम्या).
The rear of the army
ज्या भूमिमौर्व्योः शम्यायां वाहिन्याः पृष्ठभागके Nm. Hence ˚घातवारणम् A handguard used by the archers and ˚घोषः The twanging of the bow.
Apte 1890
English
ज्या I. {c9c} P. (जिनाति) 1 To overpower, oppress.
2 To grow old.
3 A. (जीयते) To be oppressed.
ज्या 1 A bow-string
विश्रामं लभतामिदं शिथिलज्याबंधमस्मद्धनुः Ś. 2. 6
R. 3. 59, 11. 15
12. 104.
2 The chord of an arc.
3 The earth.
4 A mother.
5 Overpowering force or strength.
6 Excessive demand, importunity.
Monier Williams Cologne
English
1. ज्या (cf. जि)
cl.
9.
P.
जिना॑ति (Pot. °नीया॑त्
p.
°न॑त्
pf. जिज्यौ॑
fut. ज्यास्यति,
Pāṇ.
vi, 1, 16
f.
ind.
p.
-ज्याय, 42)
Ved.
to overpower, oppress, deprive any one (acc. ) of property (acc. ),
RV.
AV.
&c.
(derived
fr.
ज्या॑यस्, ‘senior’) to become old,
Dhātup.
xxxi, 29 :
cl.
4. Ā. जी॑यते or
Pass.
°य॑ते,
Ved.
to be oppressed or treated badly, be deprived of property (or everything, सर्व-ज्यानि॑म्,
TS.
vii),
RV.
&c.
:
Caus.
ज्यापयति, to call any one old,
Pāṇ.
iii, 1, 21
Siddh.
46 :
Desid.
(p. जि॑ज्यासत्) to wish to overpower,
RV.
x, 152, 5 :
Intens.
जेजीयते,
Pāṇ.
vi, 1, 16,
Kāś.
cf.
परि-
βιάω.
2. ज्या॑
f.
=
βία, see परम-ज्या॑
excessive demand,
ŚBr.
v, 4, 5, 4.
3. ज्या॑
f.
a bow-string, βιός
RV.
AV.
VS.
&c.
(in
geom.
) the chord of an arc
=
ज्यार्ध,
Sūryas.
cf.
अधि-, उज्-, परम-, वि- and स-ज्य
एक-, क्रम-, क्रान्ति-.
4. ज्या
f.
the earth,
L.
a mother,
L.
Monier Williams 1872
English
ज्या 1. ज्या, cl. 9. P., 4. A. जिनाति, जीयते,
जिज्यौ, जिज्ये, ज्यास्यति, -ते, अज्यासीत्, ज्या-
तुम्, to overpower, oppress, to deprive of property,
&c., (in the Veda often connected with rt. हन्, e. g.
जीयते हन्ति, ‘he oppresses and kills
and in the
Brāhmaṇas applied to the oppressions of the Brāhmans
and Vaiśyas by the Kṣatriyas)
(cl. 4. A.) to be
oppressed, treated badly, deprived of property, &c.
(cl. 9. P.) to become old: Caus. ज्यापयति, see
ज्यापय below: Desid. P. जिज्यासति, to wish to over-
power or oppress: Intens. जेजीयते, जाज्याति
[cf.
Gr. βιάω.]
2. ज्या, f. overpowering force or strength (βία, cf.
परम-ज्या)
excessive demand, importunity.
ज्या 3. ज्या, f. (perhaps fr. rt. 1. ज्या), the
string of a bow, a bow-string
the chord of an arc, a
sine in geometry
[cf. अधि-ज्य, उज्-ज्य, &c.
cf.
also Gr. βιός.]
—ज्या-कार, अस्, m., Ved. one who
makes bow-strings.
—ज्या-घोष, अस्, m. the twang
of a bow.
—ज्या-पाश, अस्, m. a bow-string.
—ज्या-
पिण्ड or ज्या-पिण्डक, a sine expressed in figures.
—ज्या-मघ, अस्, m., N. of the father of Vi-
darbha.
—ज्यार्ध (ज्या-अर्°), अस्, m. the sine of an
arc.
—ज्यार्ध-पिण्ड, a sine expressed in figures.
—ज्या-वाज, अस्, आ, अम्, Ved. having the elasticity
of a bow-string
(Sāy.) a stout or strong bow (as if
a substantive).
—ज्या-वाणेय, आस्, m. pl., N. of a
warrior-tribe
(अस्), m. a prince of this tribe.
—ज्या-
ह्रोड, अस्, m. a peculiar kind of bow
(औ), m.
du., N. of a Sāman.
—ज्योत्पत्ति (ज्या-उत्°), इस्, f.
‘the calculation of the length of a chord, derivation
of (semi)-chords.
ज्या 4. ज्या, f. the earth
a mother.
Macdonell
English
ज्या 1. JYĀ, Ⅸ. P. jínā, overpower
oppress
🞄deprive of (√ ac.)
ps. jī́ya or jīya: 🞄pp. jītá.
ज्या 2. jyā́,
f.
superior power or force
excessive 🞄requirement.
ज्या 3. jyā́,
f.
bowstring.
Benfey
English
ज्या ज्या, ii. 9, जिना, नी, Par. i. 4,
जीय, Ātm. ved.
1. To overpower (ved.).
2. To be overpowered (जीय, ved.).
3.
To decay, to become old. जीन, see
separately. -- Cf. βία (= ved. ज्या), βιάω,
etc., probably also βῑνέω.
ज्या ज्या,
f.
A bow-string, MBh.
1, 8193.
--
Comp.
स-ज्य,
adj.
strung. --
Cf. βιός.
Apte Hindi
Hindi
ज्या
स्त्री*
- ज्या+अङ्+टाप्
धनुष की डोरी
ज्या
स्त्री*
- -
चाप के सिरों को मिलाने वाली सीधी रेखा
ज्या
स्त्री*
- -
पृथ्वी
ज्या
स्त्री*
- -
माता
ज्या
स्त्री*
- ज्या+अङ्+टाप्
एक प्रकार की लकड़ी की सोटी
ज्या
स्त्री*
- ज्या+अङ्+टाप्
सेना का पृष्ठभाग
Shabdartha Kaustubha
Kannada
ज्या -वयोहानौ (क्र्या० पर० अक० से०) जिनाति
पदविभागः - > धातुः
कन्नडार्थः - > ಮುದುಕನಾಗು /ಇಳಿವಯಸ್ಸಿನವನಾಗು /ಶಕ್ತಿಕುಂದಿದವನಾಗು
ज्या
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಮೌರ್ವಿ /ಬಿಲ್ಲಿನ ಅಂಬು /ಧನುಸ್ಸಿನ ಗುಣ
निष्पत्तिः - > ज्या (वयोहानौ)- "डः" (३-२-१०१)
प्रयोगाः - > "भिनाकृतिं ज्यां ददृशुः स्फुरन्तीं क्रुद्धस्य जिह्वामिव तक्षकस्य"
उल्लेखाः - > किरा० १७-२४
ज्या
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಮಾತೆ /ತಾಯಿ
ज्या
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಭೂಮಿ
विस्तारः - > "ज्या मातरि वसुधायां मौर्व्याम्"- मेदि०
ज्या
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ವೃತ್ತವನ್ನು ಭಾಗಿಸುವ ಸರಳರೇಖೆ /ಗೋಳದೊಳಗಿರುವ ಧನುರಾಕಾರವಾದ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಮಧ್ಯದಿಂದ ಎರಡೂ ಕಡೆಗೂ ಹೊರಟಿರುವ ಒಂದು ರೇಖೆ
L R Vaidya
English
jyA {% vi. 9P (pp. जिन
pres. जिनाति) %} To become old, to decay.
jyA {% f. %} 1. A bow-string, ज्यानिनादमथ गृह्णंती तयोः R.xi.15, Megh.ii.10
2. the earth
3. a mother
4. the chord of an arc.
भूतसङ्ख्या
Sanskrit
१, अंशुमान्, अचला, अब्ज, अमृतांशु, अवनि, आदि, आस्य, इन्दु, इला, उडुपति, उर्वरा, उर्वी, ऋक्षेश, एक, एणधर, औषधीश, क, कलाधर, कलि, कु, कुमुदाकरप्रिय, क्षपाकर, क्षमा, क्षिति, क्षोणि, क्षोणी, क्षमा, गो, गोत्र, गोत्रा, ग्लौ, चन्द्र, चन्द्रमस्, जगती, जैवातृक, ज्या, तनु, दाक्षायणीप्राणेश, धरणी, धरा, धरित्री, नायक, निशाकर, निशेश, पितामह, पृथिवी, पृथ्वी, प्रालेयांशु, ब्रह्मा, भुवन्यु, भू, भूमि, मही, मुख, मृगलाञ्छन, मृगाङ्क, मेदिनी, रजनीकर, रजनीश, रात्रिप, रात्रीश, रुग्ण, रूप, लपन, वक्त्र, वदन, वसुधा, वसुन्धरा, वाक्, विधु, विरञ्चि, विश्वम्भरा, शशधर, शशभृत्, शशलाञ्छन, शशाङ्क, शशि, शशी, शीतकर, शीतकिरण, शीतद्युति, शीतमयूख, शीतरश्मि, शीतांशु, शुभ्रभानु, श्वेत, श्वेतांशु, सितरश्मि, सुधांशु, सोम, स्थिरा, हरिणधृत्, हरिणाङ्क, हिमकर, हिमगु, हिमरश्मि, हिमांशु
Bopp
Latin
ज्या 9. P. जिनामि, gr. 386. (जरायाम्) tabescere, senes-
cere
cf. जै.
ज्या f. nervus arcûs. (Cf. gr. βιός, v. जीव्.)
Lanman
English
√jyā or ji or (jinā́ti
jijyaú [785]
ájyāsīt
jyāsyáti
jītá). βιάω
overpower.
[cf. 1jyā́, ‘power, and √1ji,
‘overpower.’]
1jyā́, f. superior power
βία
force. [√jyā:
cf. βία, ‘force.’]
2jyā́, f. bow-string. [cf. βιός, ‘bow.’]
Kridanta Forms
Sanskrit
ज्या (ज्या॒ वयोहानौ - क्र्यादिः - अनिट्)
ल्युट् = ज्यानम्
अनीयर् = ज्यानीयः - ज्यानीया
ण्वुल् = ज्यायकः - ज्यायिका
तुमुँन् = ज्यातुम्
तव्य = ज्यातव्यः - ज्यातव्या
तृच् = ज्याता - ज्यात्री
क्त्वा = जीत्वा
ल्यप् = प्रज्याय
क्तवतुँ = जीनवान् - जीनवती
क्त = जीनः - जीना
शतृँ = जीनन् - जीनती
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
ज्या
मूलधातुः:
धात्वर्थः:
वयोहानौ
गणः:
क्र्यादिः
कर्मकत्वं:
अकर्मकः
इट्त्वं:
अनिट्
उपग्रहः:
परस्मैपदी
रूपम्:
जिनाति
अनुबन्धादिविशेषः:
ल्वादिः
धातुप्रदीपः
Sanskrit
ज्या वयोहानौ
- जिनाति जीयते जिज्यौ ज्याता ज्यास्यति जीयात् अज्यासीत् जिज्यासति जेजीयते ज्यापयति जीत्वा जीनः प्रज्याय ज्यानिः ब्रह्मज्यः (8) 30
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
1. ज्या mit सम् (संजीयते) = Simpl. 2. AV. 11, 3, 55 in der Paipp.-Rez. (सर्वः संजीयते st. सर्वज्यानिं जीयते).
2. ज्या꣡ 2. Instr. (gleichlautend) mit Überlast, lästig, SV. 1, 4, 1, 2, 5.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
पृथिवी, भूः, भूमिः, अचला, अनन्ता, रसा, विश्वम्भरा, स्थिरा, धरा, धरित्री, धरणी, क्षौणी, ज्या, काश्यपी, क्षितिः, सर्वसहा, वसुमती, वसुधा, उर्वी, वसुन्धरा, गोत्रा, कुः, पृथ्वी, क्ष्मा, अवनिः, मेदिनी, मही, धरणी, क्षोणिः, क्षौणिः, क्षमा, अवनी, महिः, रत्नगर्भा, सागराम्बरा, अब्धिमेखला, भूतधात्री, रत्नावती, देहिनी, पारा, विपुला, मध्यमलोकवर्त्मा, धारणी, गन्धवती, महाकान्ता, खण्डनी, गिरिकर्णिका, धारयित्री, धात्री, अचलकीला, गौः, अब्धिद्वीपा, इडा, इडिका, इला, इलिका, इरा, आदिमा, ईला, वरा, आद्या, जगती, पृथुः, भुवनमाता, निश्चला, श्यामा
noun
मर्त्याद्यधिष्ठानभूता।
"पृथिवी पञ्चमम् भूतम्"
Synonyms:
ज्या, गुणः, चापगुणः, धनुर्गुणः, जीवम्, गव्या, गव्यम्, गौः, पिङ्गा, भारवः, मौर्विका, मौर्वी, शिञ्जिनी, लोचकः, शरसनज्या, शिञ्जा, शिञ्जालता, स्थावरम्, स्रावन्, ज्यायुः
noun
धनुषः सूत्रं यस्य साहाय्येन बाणान् क्षिपन्ति।
"सः ज्यां बध्नाति।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
मौर्वी जीवा गुणो गव्या शिञ्जा बाणासनं द्रुणा
शिञ्जिनी ज्या गोधा तु तलं ज्याघातवारणम् ७७६
-wordlist-
मौर्वी (स्त्री), जीवा (स्त्री), गुण (पुं), गव्या (स्त्री), शिञ्जा (स्त्री), बाणासन (क्ली), द्रुणा (स्त्री), शिञ्जिनी (स्त्री), ज्या (स्त्री), गोधा (स्त्री), तल (स्त्रीक्ली), ज्याघातवारण (क्ली)
--source--
भूर्भूमिः पृथिवी पृथ्वी वसुधोर्वी वसुंधरा
धात्री धरित्री धरणी विश्वा विश्वंभरा धरा ९३५
क्षितिः क्षोणी क्षमानन्ता ज्या कुर्वसुमती मही
गौर्गोत्रा भूतधात्री क्ष्मा गन्धमाताचलावनिः ९३६
सर्वंसहा रत्नगर्भा जगती मेदिनी रसा
काश्यपी पर्वताधारा स्थिरेला रत्नबीजसूः ९३७
विपुला सागराच्चाग्रे स्युर्नेमीमेखलाम्बराः
-wordlist-
भू (स्त्री), भूमि (स्त्री), पृथिवी (स्त्री), पृथ्वी (स्त्री), वसुधा (स्त्री), उर्वी (स्त्री), वसुन्धरा (स्त्री), धात्री (स्त्री), धरित्री (स्त्री), धरणी (स्त्री), विश्वा (स्त्री), विश्वम्भरा (स्त्री), धरा (स्त्री), क्षिति (स्त्री), क्षोणी (स्त्री), क्षमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), ज्या (स्त्री), कु (स्त्री), वसुमती (स्त्री), मही (स्त्री), गो (स्त्री), गोत्रा (स्त्री), भूतधात्री (स्त्री), क्ष्मा (स्त्री), गन्धमाता (स्त्री), अचला (स्त्री), अवनि (स्त्री), सर्वंसहा (स्त्री), रत्नगर्भा (स्त्री), जगती (स्त्री), मेदिनी (स्त्री), रसा (स्त्री), काश्यपी (स्त्री), पर्वताधारा (स्त्री), स्थिरा (स्त्री), इला (स्त्री), रत्नसू (स्त्री), बीजसू (स्त्री), विपुला (स्त्री), सागरनेमी (स्त्री), सागरमेखला (स्त्री), सागराम्बरा (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भू
भू, भूमि, वसुधा, अवनि, वसुमती, धात्री, धरित्री, धरा, गो, गोत्रा, जगती, रसा, क्षिति, इला, क्षोणी, क्षमा, क्ष्मा, अचला, कु, पृथ्वी, पृथिवी, स्थिरा, धरणी, विश्वम्भरा, मेदिनी, ज्या, अनन्ता, विपुला, समुद्रवसना, सर्वंसहा, ऊर्वी, मही, काश्यपी, भूतधात्री, रत्नगर्भा, वसुन्धरा, धराधारा
भूर्भूमिर्वसुधावनिर्वसुमती धात्री धरित्री धरा,
गौर्गोत्रा जगती रसा क्षितिरिला क्षोणी क्षमा क्ष्माचला
कुः पृथ्वी पृथिवी स्थिरा धरणी विश्वम्भरा मेदिनी,
ज्यानन्ता विपुला समुद्रवसना सर्वंसहोर्वी मही १५६
काश्यपी भूतधात्री रत्नगर्भा वसुन्धरा
धराधारा विज्ञेया तद्विशेषान्निबोधत १५७
verse 2.1.1.156
page 0020
बाणासन
बाणासन, द्रुणा, मौर्वी, ज्या, सिञ्जिनी, गुण, जीवा
बाणासनं द्रुणा स्यान्मौर्वी ज्या सिञ्जिनी गुणो जीवा ४६४
verse 2.1.1.464
page 0053
नाममाला
Sanskrit
मौर्वी, जीवा, गुण, गव्या, ज्या
मौर्वी जीवा गुणो गव्या ज्याऽलिर्भृङ्गः शिलीमुखः
भ्रमरः षट्पदो ज्ञेयो द्विरेफश्च मधुव्रतः ८२
verse 0.1.1.82
page 0042
Tamil
Tamil
ஜ்யா : வில்லின் நாண் கயிறு, பூமி, தாயார்.
Vedic Reference
English
Jyā is the regular word for ‘bowstring’ in the Rigveda^1
and later.^2 The making of bowstrings was a special craft, as
is shown by the occurrence of the Jyā-kāra, or ‘maker of bow-
strings, among the victims at the Puruṣamedha, or human
sacrifice, in the Yajurveda.^3 The bowstring consisted of a
thong of ox-hide.^4 It was not usually kept taut, ^5 but was
specially tightened when the bow was to be used.^6 The sound
of the bowstring (jyā-ghoṣa) is referred to in the Atharvaveda.^7
Cf. Ārtnī.
1) iv. 27, 3
vi. 75, 3
x. 51, 6, etc.
2) Av. i. 1, 3
v. 13, 6
vi. 42, 1
Vājasaneyi Saṃhitā, xvi. 9
xxix. 51,
etc.
3) Vājasaneyi Saṃhitā, xxx. 7
Tait-
tirīya Brāhmaṇa, iii. 4, 3, 1.
4) Rv. vi. 75, 3
Av. i. 1, 3. In the
Epic the bowstring is made of hemp
(maurvī)
Hopkins, Journal of the
American Oriental Society, 13, 271.
5) Av. vi. 42, 1.
6) Rv. x. 166, 3.
7) v. 21, 9.
Cf. Zimmer, Altindisches Leben, 298
299.
अमरकोशः
Sanskrit
Word: ज्या
Root: ज्या
Gender: स्त्री
Number: all
Meaning(s):
earth
mother
bowstring
Sine [math.]
excessive demand
chord of an arc [Geom.]
Shloka(s):
2|8|85|1 लस्तकस्तु धनुर्मध्यं मोर्वी ज्या शिञ्जिनी गुणः। (क्षत्रियवर्गः)
Synonym(s):
2|8|85|1 मोर्वी (मोर्वी) (स्त्री)
2|8|85|1 ज्या (ज्या) (स्त्री) earth, mother, bowstring, Sine [math.], excessive demand, chord of an arc [Geom.]
2|8|85|1 शिञ्जिनी (शिञ्जिनी) (स्त्री) bow-string, sine of an arc, tinkling rings worn round the toes or feet
2|8|85|1 गुणः (गुण) (पुं) use, lace, kind, cook, rope, sinew, times, merit, talent, credit, virtue, garland, species, epithet, quality, vowels a, efficacy, side-dish, attribute, requisite, advantage, bhImasena, efficiency, bow-string, multiplier, excellence, good result, subdivision, peculiarity, good quality, number three, co-efficient, auxiliary act, secondary dish, organ of sense, string or thread, secondary element, feature [computer], merit of composition, attribute or property, first gradation of a vowel, attribute of the 5 elements, string of a musical instrument, peculiar properties of the letters, chief quality of all existing beings, ingredient or constituent of prakRti, single thread or strand of a cord or twine, subordinate or unessential part of any action, secondary or less immediate object of an action, property or characteristic of all created things, 6 subdivisions of action for a king in foreign politics
Related word(s):
अवयव_अवयवीसंबन्धः धनुः
परा_अपरासंबन्धः आयुधम्
उपाधि आयुधम्
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
ज्या, गि जरायाम् इति कविकल्पद्रुमः
(क्र्यां-परं-अकं-अनिट् ।) जरा गतबहुवयोभावः ।गि, जिनाति वृद्धः जीनः इति दुर्गादासः
ज्या,
स्त्री,
(ज्या + अन्येभ्योऽपीति डस्ततष्टाप् ।)धनुर्गुणः तत्पर्य्यायः मौर्व्वी शिञ्जिनी ३गुणः इत्यमरः ८५
शिञ्ज्या जीवा ६पतञ्चिका इति शब्दरत्नावली
गव्या ८वाणासनः द्रुणा १० इति हेमचन्द्रः
(यथा, महाभारते २२६ २० ।“जग्राह बलमास्थाय ज्यया युयुजे धनुः
”)माता वसुधा इति मेदिनी ये,
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
ज्या जरायां क्य्रा० प्वा०
पर०
अक० अनिट् जिनाति अ-ज्यासीत् जिज्यौ जिज्यतुः जिनः
ज्या स्त्री ज्या--अघ्न्या० यक् नि० घनुर्गुणे अमरःतस्य निरन्तराकर्षणेन धनुषो जराकरणात्तथात्वम् ।२ वसुधायां तस्याः प्रतिक्षणं क्षीयमानत्वात् तथात्वं३ मातरि स्वप्रसवेन तस्याः वयोहानेस्तथात्वम्मेदि० गोलक्षेत्रान्तर्गते धनुराकारक्षेत्रस्थकेन्द्रस्थानात्उभयपार्श्वसंलग्ने सरलरेखाभेदे क्रमज्याशब्दे २३०३पृ० जीवाशब्दे ३१३५ पृ० दृश्यम् ताश्च चतुर्विं शतिसंख्यि-कास्तत्र क्रमज्याशब्दे उक्तावशिष्टा उत्क्रमज्यामानसंख्या-ङ्काश्च सू० सि० उक्ता यथा “मुनयोरन्ध्रयमलारसषट्कामुनीश्वराः” द्व्यष्टैकारूपषड्दस्राः सागरार्थहुताशनाः ।खर्तुवेदानवाद्र्यर्थादिङ्नगास्त्र्यर्थकुञ्जराः नगाम्बरवि-यच्चन्द्रारूपधरणिशङ्कराः शरार्णवहुताशैकाभुजङ्गाक्षिशरेन्दवः नवरूज्पमहीर्ध्रैकागजैकाङ्कनिशाकराः गुणाश्विरूपनेत्राणि पावकाग्निगुणाश्विनः वस्वर्णवार्धय-मलास्तुरङ्गर्तुनगाश्विनः नवाष्टनवनेत्राणि पावकैकय-माग्नयः गजाग्निसागरगुणा उत्क्रमज्यार्द्धपिण्डकाः”
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
ज्या वयोहानौ
- इतो नवानिटः ग्रहिज्यावयि (6116) इति सम्प्रसारणम्-जिनाति, सम्प्रसारणस्य दीर्घः (द्र0 642), प्वादीनां ह्रस्वः (7380) जीनः जीनिरिति दुर्गः, नन्दी त्वाह-क्तिनि प्राप्ते ग्लाम्लाज्याहाभ्यो निः (3394 वा0)-ज्यानिः, वीज्याज्वरिभ्यो निर् उणादौ (उ0 448) कविधौ प्रसारिभ्यो डः (द्र0 323 वा0)-ब्रह्मज्यः उणादौ नक् (द्र0 उ0 32)-जिनः ल्यपि च, ज्यश्च (6141, 42)-प्रज्याय 27
धातुवृत्तिः
Sanskrit
ज्या (अर्थः) वयोहानौ
एतदादयो बध्नात्यन्ता अनुदात्ता उदात्तेतः ( जिनाति जिनीतः जिनासि जिनामि जिनीवः ) ग्रहिज्यादिना सम्प्रसारणे पूर्वरूपत्वे "हल'' इति दीर्घेप्वादित्वाद्ध्रस्वः ( जिज्ज्यौ जिज्यतुः जिज्यिथ जिज्ज्याथ जिज्यिव ) क्रादिनियमादिट् थलि भारद्वाजनियमाद्विकल्पः किति परत्वात् पूर्वं सम्प्रसारणे द्विर्वचनम् अकिति "लिट्यभ्यासस्योभयेषाम्'' इत्यभ्यासस्य सम्प्रसारणम् ( ज्याता ज्यास्यति जिनातु जिनीताम् जिनीहि जिनानि जिनाव अजिनात् अजिनीताम् अजिनाः अजिनाम् अजिनिव जिनीयात् जिनीयाताम् जिनीयाः जिनीयाम् ) आशिषि ( जीयात् जीयास्ताम् अज्यासीत् अज्यासिष्टाम् ) "यमरमनमाताम्'' इति सगिटौ (जिज्यासति जेजायते जाज्याति ज्यापयति अजिज्यपत् जीत्वा जीनः) "ल्वादिभ्यः'' इति निष्ठानत्वं, "हलः'' इति दीर्घः ( प्रज्याय ) "ज्यश्च'' इति ल्यपि सम्प्रसारणनिषेधः ( ज्यानिः ) ( 1 ) ( 1 ) "विज्याज्वरिभ्यो निः'' "वहिश्रिशुयुदुग्लाहात्वरिभ्यो नित्'' इत्येताभ्यां ज्यानिः, ग्लानिरिति संमाध्य बाहुलकात् म्लनिरित्युक्तमुणादिव्याख्याने कौमुद्याम् भट्टोजोदीक्षितैः "ग्लाम्लाज्याहाभ्यो निः'' इति निः 28
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“ज्या वयोहानौ”@} 2 प्वादिः, ल्वादिः, ग्रह्यादिश्च।
3 ज्यायकः-यिका, 4 ज्यापकः-पिका, 5 जिज्यासकः-सिका, 6 जेजीयकः-यिका
ज्याता-त्री, ज्यापयिता-त्री, जिज्यासिता-त्री, जेजीयिता-त्री
7 जिनन्-ती, ज्यापयन्-न्ती, जिज्यासन्-न्ती
-- ज्यास्यन्-न्ती-ती, ज्यापयिष्यन्-न्ती-ती, जिज्यासिष्यन्-न्ती-ती
-- -- ज्यापयमानः, -- जेजीयमानः
-- ज्यापयिष्यमाणः, -- जेजीयिष्यमाणः
8 प्रजीः-प्रज्यौ-प्रज्यः
-- -- -- 9 जीनम्- 10 जीनः-जीनवान्, ज्यापितः, जिज्यासितः, जेजीयितः-तवान्
11 12 ब्रह्मज्यः, प्रज्यः, 13 ज्यायः, ज्यापः, जिज्यासुः, 14 जेज्यः
ज्यातव्यम्, ज्यापयितव्यम्, जिज्यासितव्यम्, जेजीयितव्यम्
ज्यानीयम्, ज्यापनीयम्, जिज्यासनीयम्, जेजीयनीयम्
15 ज्येयम्, ज्याप्यम्, जिज्यास्यम्, जेजीय्यम्
16 ईषज्ज्यानः-दुर्ज्यानः-सुज्यानः
-- -- जीयमानः, ज्याप्यमानः, जिज्यास्यमानः, जेजीय्यमानः
ज्यायः, ज्यापः, जिज्यासः, जेजीयः
ज्यातुम्, ज्यापयितुम्, जिज्यासितुम्, जेजीयितुम्
17 ज्यानिः, ज्यापना, जिज्यासा, जेजीया
ज्यानम्, ज्यापनम्, जिज्यासनम्, जेजीयनम्
18 जीत्वा, ज्यापयित्वा, जिज्यासित्वा, जेजीयित्वा
19 प्रज्याय, प्रज्याप्य, प्रजिज्यास्य, प्रजेजीय्य
ज्यायम् २, जीत्वा २, ज्यापम् २, ज्यापयित्वा २, जिज्यासम् २, जिज्यासित्वा २, जेजीयम्
जेजीयित्वा २।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(६२७)
02
=>
(९-क्र्यादिः-१४९९। अक। अनि। पर।)
03
=>
[[१। ‘आतो युक् चिण्कृतोः’ (७-३-३३) इति णिति कृति प्रत्यये परे युगागमः। एवं णे, घञि, णमुलि ज्ञेयम्।]]
04
=>
[[२। ‘अर्तिह्रीव्लीरीक्नूयीक्ष्माय्यातां पुग् णौ’ (७-३-३६) इति आदन्तलक्षणः पुगागमो वोध्यः। एवं ण्यन्ते सर्वत्र ज्ञेयम्।]]
05
=>
[[३। द्वित्वे, हलादिशेषे, अभ्यासघटकाकारस्य ‘सन्यतः’ (७-४-७९) इतीत्वम्। एवं सन्नन्ते सर्वत्र ज्ञेयम्।]]
06
=>
[[४। यङि, ‘ग्रहिज्यावयिव्यधिवष्टिविचतिवृश्चतिपृच्छतिभृज्जतीनां ङीति च’ (६-१-१६) इति सम्प्रसारणे, पूर्वरूपे, ‘हलः’ (६-४-२) इति दीर्घे द्वित्वे, अभ्यासस्य गुणे रूपम्। एवं यङन्ते सर्वत्र प्रक्रियोह्या।]]
07
=>
[[५। ‘क्र्यादिभ्यः--’ (३-१-८१) इति श्ना विकरणप्रत्ययः। तस्य ङिद्वद्भावाद् अङ्गस्य सम्प्रसारणम्। पूर्वरूपं दीर्घश्च। ‘प्वादीनां ह्रस्वः’ (७-३-८०) इति ह्रस्वः। ‘श्नाऽभ्यस्तयोरातः’ (६-४-११२) इत्याकारलोपः।]]
08
=>
[[६। क्विपि, सम्प्रसारणपूर्वरूपदीर्घेषु सत्सु रूपम्। द्विवचने ‘एरनेकाचः--’ (६-४-८२) इति यण्।]]
09
=>
[[७। निष्ठायाम्, सम्प्रसारणादिषु सत्सु, ‘ल्वादिभ्यः’ (८-२-४४) इति निष्ठानत्वम्]]
10
=>
[[आ। ‘इत्थं हरौ गृणति हस्तिपकोऽपि कोपी जीनोऽप्यहं तु रिणामि भियेति वादी।’ धा। का। ३। ८।]]
11
=>
[पृष्ठम्०५९७+ २२]
12
=>
[[१। ब्रह्म जिनातीति ब्रह्मज्यः। वयोहानिरूपार्थे धातुरकर्मकोऽपि, धातूनामनेकार्थकत्वेन चिन्तनाद्यर्थे सकर्मकत्वम्। ‘कविधौ सर्वत्र सम्प्रसारणिभ्यो डः’ (वा। ३-२-३) इति डप्रत्यये, डित्वसामर्थ्यादभस्यापि टेर्लोपे, रूपम्। एवं ‘प्रज्यः’ इत्यत्र ‘आतश्चोपसर्गे’ (३-१-१३६) इति कप्रत्ययस्थलेऽपि डो ज्ञेयः।]]
13
=>
[[२। ‘श्याऽऽद्व्यधास्रु--’ (३-१-१४१) इत्यादिना कर्तरि णप्रत्ययः। युगागमः।]]
14
=>
[[३। अच्प्रत्ययनिमित्तके यङो लुकि, ‘न धातुलोपः--’ (१-१-४) इति निषेधे, ‘एरेनकाचः--’ (६-४-८२) इति यणादेशः।]]
15
=>
[[४। ‘ईद्यति’ (६-४-६५) इति ईत्त्वे, गुणे रूपम्।]]
16
=>
[[५। ‘आतो युच्’ (३-३-१२८) इति ईषदाद्युपपदे खलपवादो युच्। अनादेशः।]]
17
=>
[[६। ‘ग्लाम्लास्नाज्याहाभ्यो निः’ (वा। ३-३-९४) इति क्तिनोऽपवादः निप्रत्ययः।]]
18
=>
[[७। क्त्वायाम्, सम्प्रसारणपूर्वरूपदीर्घाः।]]
19
=>
[[८। ‘ज्यश्च’ (६-१-४२) इति ल्यपि सम्प्रसारणनिषेघः।]]
Capeller
German
1. ज्या जिना॑ति überwältigen, unterdrücken
Pass. जी॑यते u. जीयते, p.p. जीत॑.
2. ज्या
f.
Übergewalt, Überlast.
3. ज्या॑
f.
Sehne (bes. am Bogen).
Grassman
German
√jyā, besiegen, überwältigen, aus 2. ji entstanden und im RV nur in der Desiderativform jíjyāsathas und in den aus dem Verbale jyā́ entwickelten Steigerungsgraden deutlich von 2. ji gesondert. Die Bedeutung ist von der in 2. ji 4 und in den Steigerungsgraden von der in 2. ji 5 nicht merklich verschieden.
Stamm I. jinā́, schwach vor Voc. jin:
-ā́mi ābhúm {853, 4}.
-ā́ti (ohne Obj.) {388, 5}
{767, 4}.
-anti tám {321, 5}.
Stamm II. jī́ya, mit pass. Bed.:
-ate {978, 1} neben hanyáte
{767, 4} Gegensatz jinā́ti und hánti.
jīya:
-ate {293, 2}
{408, 7} neben hanyate.
Part. des Desid. jíjyāsat:
-tas {978, 5} ápa vadhám.
Verbale jyā́
liegt zu Grunde in jyā́yas, jyéṣṭha
vgl. das folgende.
1. (jyā́, jiā́), f. [Cu. 〔639〕], Gewalt, Obergewalt [von jyā], enthalten in paramajyā́.
2. jyā́, jiā́, f. [Cu. 〔641〕], Bogensehne.
-iā́ {516, 3}.
-yā́m {323, 3}.
-yáyā {992, 3}.
-iā́yas-iā́yās [G.] {516, 14} (hetím)
{877, 6} (kṣeptós).
502, 8.b v. u.: -iā́yās st. -iā́yas
Burnouf
French
*ज्या ज्या। जिनामि 9
p. जिज्यौ
pp.
जीन। Vieillir, devenir vieux
s'user
dépérir.
Cf.
जै।
ज्या ज्या
f.
mère.
La terre.
Corde d'arc
gr.
βιός.
Stchoupak
French
ज्या-
f.
corde de l'arc.
°घोष-
m.
bruit, bourdonnement de la corde.
°पाश-
m.
= ज्या-।
°मघ-
m.
père de Vidarbha.
ज्याकृष्टि-
f.
fait de tendre la corde de l'arc.