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जाजंसिता-त्री (jAjaMsitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“जसि रक्षणे”@} 2 मोक्षणे इति देवः।
इदित्करणात् णिचो वैकल्पिकत्वम्।
‘मोक्षणे जस्यतीति स्याण्णावत्रार्थे तु जंसयेत्।’ 3 इति देवः।
4 जंसकः-सिका, जिजंसयिषकः-षिका, जंसकः-सिका, जिजंसिषकः-षिका, जाजंसकः-सिका
जंसयिता-त्री, जिजंसयिषिता-त्री, जंसिता-त्री, जिजंसिषिता-त्री, जाजंसिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि चपिधातुवत् 5 ज्ञेयानि।
प्रासङ्गिक्यः
01
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(५९४)
02
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(१०-चुरादिः-१६६७। सक। सेट्। उभ।)
03
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(श्लो। १८८)
04
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[[आ। ‘मञ्चाग्रपूर्वितनृपे शिशुना रणं वः स्यादेव मानपरिजंसकमीड्यधाम्नाम्।।’ धा। का। ३। ३१।]]
05
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(४९९)