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जषिता-त्री (jaSitA-trI)

 
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“जष हिंसार्थः”@} 2 जाषकः-षिका, जाषकः-षिका, जिजषिषकः-षिका, जाजषकः-षिका
जषिता-त्री, जाषयिता-त्री, जिजषिषिता-त्री, जाजषिता-त्री
इत्यादीनि सर्वाण्यपि रूपाणि खषधातुवत् 3 बोध्यानि।
जषन् 4।
5
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(५९३)
02
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(१-भ्वादिः-६८८। सक। सेट्। पर।)
03
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(३४६)
04
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[[C। ‘इत्युक्तः सुरकाषिखाषिणमसावूचे जगच्छेषकान् नित्यं ते जषते झषादिवपुषे रक्षश्चमूशाषिणे। धा। का। १। ८७।]]
05
=>
[पृष्ठम्०५६२+ २४]