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चक्रभेदिनी (cakrabhedinI)

 
शब्दसागरः
English
चक्रभेदिनी
f.
(-नी) Night.
E.
चक्र the ruddy goose, and भेदिनी what di-
vides, (male and female
) these birds being condemned, according
to the Hindus, to be separated at night. भिद-णिनि ङीप्
Yates
English
चक्र-भेदिनी (नी) 3.
f.
Night.
Spoken Sanskrit
English
चक्रभेदिनी cakrabhedinI
f.
night
चक्रभेदिनी cakrabhedinI
f.
dividing the cakra couples
Wilson
English
चक्रभेदिनी
f.
(-नी) Night.
E.
चक्र the ruddy goose, and भेदिनी what divides, (male and female
)
these birds being condemned, according to the Hindus, to be separated at
night.
Monier Williams Cologne
English
चक्र—भेदिनी
f.
‘dividing the Cakra (-vāka) couples (cf. -बान्धव)’, night,
L.
Shabdartha Kaustubha
Kannada
चक्रभेदिनी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಚಕ್ರವಾಕಪಕ್ಷಿ ದಂಪತಿಗಳನ್ನು ಬೇರ್ಪಡಿಸುವ ರಾತ್ರಿ
L R Vaidya
English
cakra-BedinI {% f. %} the night.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
रात्रिः, निशा, रजनी, क्षणदा, क्षपा, शर्वरी, निश्, निद्, त्रियामा, यानिनी, यामवती, नक्तम्, निशीथिनी, तमस्विनी, विभावरी, तमी, तमा, तमिः, ज्योतष्मती, निरातपा, निशीथ्या, निशीथः, शमनी, वासुरा, वाशुरा, श्यामा, शताक्षी, शत्वरी, शर्या, यामिः, यामी, यामिका, यामीरा, याम्या, दोषा, घोरा, वासतेयी, तुङ्गी, कलापिनी, वायुरोषा, निषद्वरी, शय्या, शार्वरी, चक्रभेदिनी, वसतिः, काली, तारकिणी, भूषा, तारा, निट्
noun
दीपावच्छिन्न-सूर्यकिरणानवच्छिन्नकालः।
"यदा दिक्षु अष्टासु मेरोर् भूगोलकोद्भवा। छाया भवेत् तदा रात्रिः स्याच्च तद्विरहाद् दिनम्।"
Sanskrit Tibetan
Tibetan
khor lo byed pa
चक्रभेदिनी
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskrit
--source--
व्युष्टे निशात्यय(न्त)गोसर्गौ निशा चक्रभेदिनी १७
निषद्वरी निशीथ्या निट् घोरा वासरकन्यका
शताक्षी राक्षसी याम्या घृतार्चिस्तामसी तमिः १८
शार्वरीक्षणिनीनक्तापैशाचीवासुरा उशाः
-wordlist-
निशात्यय (पुं), गोसर्ग (पुं), चक्रभेदिनी (स्त्री), निषद्वरी (स्त्री), निशीथ्या (स्त्री), याम्या (स्त्री), घृतार्चिस् (स्त्री), तामसी (स्त्री), तमि (स्त्री), शार्वरी (स्त्री), क्षणिनी (स्त्री), नक्तम् (अ), पैशाची (स्त्री), वासुरा (स्त्री), उशस् (स्त्री)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
चक्रभेदिनी,
स्त्री,
(चक्रं चक्रवाकमिथुनं भिनत्तिपृथक् करोतीति भिद् + णिनिः ततो ङीप् ।निशायां हि चक्रवाकयोर्वियोजनं भवतीतिलोकप्रसिद्धम् ।) रात्रिः इति त्रिकाण्डशेषः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
चक्रभेदिनी स्त्री चक्रौ चक्रवाकौ भिनत्ति वियोजयतिभिद--णिनि ङीप् रात्रौ त्रिका० रात्रौ हि तयो-र्वियोगात्तथात्वम्