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गौरादि (gaurAdi)

 
Monier Williams Cologne
English
गौरादि
N.
of two Gaṇas of
Pāṇ.
iv, 1, 41 and vi, 2, 194.
Abhyankara Grammar
English
गौरादि a class of words to which the affix ( ङीष्) is added to form the feminine base
e.g. गौरी, मत्सी, हयी, हरिणी
the class contains a large number of words exceeding 150
for details see Kasika on P.IV.1. 41
(2) a small class of eleven words, headed by the word गौर which do not have the acute accent on the last syllable in a tatpurusa compound when they are placed after the preposition उप
cf. P. VI.2.194.
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
गौरादि
पु०
“षिद्गौरादिभ्यश्च” पा० उक्ते ङीष्निमित्तेशब्दगणभेदे गणः पा० ग० सू० उक्तोयथा“गौर मत्स्य मनुष्य शृङ्ग पिङ्गल हय गबय मुकयऋष्य पुट तूण द्रुण द्रोण हरिण काकण पटरउणक आमलक कुवल विम्ब वदर कर्कर तर्कार शर्कारपुष्कर शिखण्ड सलद शष्कण्ड सनन्द सुषम सुषमअलिन्द गडुल पापडश आढक आनन्द आश्वत्यंसृपाट आपच्चिक शष्कुल सूर्म शूर्प सूच यूष यूथसूप मेथ वल्लक धातक सल्लक मालक मालत माल्वकवेतस वृष अतस उभय भृङ्ग मह मठ छेद पेश मेदश्वन् तक्षन् अनडुह अनड्वाह एषण (करणे) देहदेहल काकादन गवादन तेजन रजन लवण औद्गा-हमानि गौतम पारक अयस्थूण भौरिकि भौलिकिभौलिङ्गि यान मेघ आलग्वि आलजि आलब्धि आलक्षिकेवाल आपक आरट नट टोट नोट मूलाट शातनपोतन पातन पानठ आस्तरण अधिकरण अधिकार आग्र-हायण प्रत्यवरोहिन् सेचन सुमङ्गल (संज्ञायाम्)अण्डर सुन्दर मण्डल मन्थर मङ्गल पट पिण्ड षण्डउर्द गुर्द शम सूद आर्द ह्रद पाण्ड भाण्ड लोहाण्डकदर कन्दर कदल तरुण तलुन कल्माष वृहत् महत्सोम सौधर्म रोहिणी (नक्षत्रे) रेबती (नक्षत्रे)विकल निष्कल पुष्कल कटी (श्रोणिवचने) पिप्प-ल्यादयश्च पिप्पली हरितकी कोशातकी शमी बरीशरी पृथिवी कोष्ट्री मातामही पितामही आकृतिगणः” ।गौरशब्दस्य तोपधभिन्नवर्णवाचित्वेऽपि प्रातिपदिक-स्वरेणोत्सर्गतः कृष्णेतिवदन्तोदात्ततया अन्यतो ङीषि-त्यस्याप्रवृत्तेर्गणे पाठः ।“उपाद् द्व्यजजिनमगौरादयः” पा० उपात् परस्य द्व्यज-न्तादेरन्तोदात्ततायां पर्युदस्ते शब्दगणे गणः पा०ग० उक्तो यथा “गौर तैष तैल लेट लोट दिहवाकृष्ण कन्या गृध कल्पपाद ।” उपगौरः