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गिरिश (giriza)

 
शब्दसागरः
English
गिरिश
m.
(-शः) A name of SIVA.
E.
गिरि a mountain, and शीञ् to sleep,
affix
inhabiting mount Kailasa, or frequenting the Himalaya
range.
Capeller Eng
English
गिरिश
a.
dwelling on mountains,
m.
E.
of Rudra-Śiva.
Yates
English
गिरि-श (शः) 1.
m.
A name of
Shiva.
Wilson
English
गिरिश
m.
(-शः) A name of ŚIVA.
E.
गिरि a mountain, and शीङ् to sleep, affix
inhabiting mount
Kailāsa, or frequenting the Himāla range.
Apte
English
गिरिशः [giriśḥ], [गिरौ कैलासपर्वते शेते, शी बाहु˚
P.
III.2.15 Vārt
गिरिरस्यास्तीति लोमादित्वात् शः
P.
V.*
2.1.] An epithet of Śiva
प्रत्याहतास्त्रो गिरिशप्रभावात्
R.*
2.41
गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी
Ku.*
1.6, 37. (Also गिरिशयः and गिरिशन्तः).
Apte 1890
English
गिरिशः [गिरौ कैलासपर्वते शेते, शी बाहु°
गिरिरस्यास्तीति लोमादित्वात् शः P. III. 2. 15 Vārt.] An epithet of Śiva
प्रत्याहतास्त्रो गिरिशप्रभावात् R. 2. 41
गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी Ku. 1. 60, 37. (Also गिरिशयः and गिरिशंतः).
Monier Williams Cologne
English
गिरि—श a
m.
(g. लोमादि) ‘inhabiting mountains’,
N.
of Rudra-Śiva,
VS.
xvi, 4 (voc. ),
MBh.
Ragh.
Kum.
&c.
N.
of a Rudra,
RāmatUp.
गिरि-श b
&c.
See
s.v.
3. गिरि॑.
Monier Williams 1872
English
गिरि-श। See under गिरि above.
Benfey
English
गिरिश गिरि-श (vb. शी),
m.
A name
of Śiva, MBh. 3, 1622.
Apte Hindi
Hindi
गिरिशः
पुं*
- गिरौ कैलासपर्वते शेते - गिरि - शी - बा
शिव का विशेषण
Shabdartha Kaustubha
Kannada
गिरिश
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪರಶಿವ /ಮಹಾದೇವ
निष्पत्तिः - > "शः" (५-२-१००)
व्युत्पत्तिः - > गिरिरस्यास्ति
प्रयोगाः - > "प्रत्याहतास्त्रो गिरिशप्रभवादात्मन्यवज्ञां शिथिलीचकार"
उल्लेखाः - > रघु० २-४१
L R Vaidya
English
giriSa {% m. %} An epithet of Śiva, गिरिशमुपचचार प्रत्यहं सा सुकेशी K.S.i.60, 37, प्रत्यहतास्रो गिरिशप्रभावात् R.ii.41.
भूतसङ्ख्या
Sanskrit
११, अक्षौहिणी, अज, ईश, ईशान, ईश्वर, गिरिश, गिरीश, गुणी, गौरीश, त्र्यम्बक, धूर्जटि, पशुपति, पिनाकिन्, भर्ग, भव, महस्, महादेव, महेश, महेश्वर, मृड, रुद्र, शङ्कर, शम्भु, शर्व, शशिभूषण, शितिकण्ठ, शिव, शूलिन्, श्रीकण्ठ, हर
Bopp
Latin
गिरिश m. (in monte dormiens, vel jacens, e गिरि et
pro शय, a r. शी, v. Wils. et cf. केश. Posset tamen गि-
रिश etiam e गिरीश q. v. explicari, correpto ई) cogno-
men dei Sivi. RAGH. 2. 41.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
शंभुः शर्वः स्थाणुरीशान ईशो रुद्रोड्डीशौ वामदेवो वृषाङ्कः
कण्ठेकालः शंकरो नीलकण्ठः श्रीकण्ठोग्रौ धूर्जटिर्भीमभर्गौ १९५
मृत्युंजयः पञ्चमुखोऽष्टमूर्तिः श्मशानवेश्मा गिरिशो गिरीशः
षण्ढः कपर्दीश्वर ऊर्ध्वलिङ्ग एकत्रिदृग्भालदृगेकपादः १९६
मृडोऽट्टहासी घनवाहनोऽहिर्बुध्नो विरूपाक्षविषान्तकौ
महाव्रती वह्निहिरण्यरेताः शिवोऽस्थिधन्वा पुरुषास्थिमाली १९७
स्याव्द्योमकेशः शिपिविष्टभैरवौ दिक्कृत्तिवासा भवनीललोहितौ
सर्वज्ञनाट्यप्रियखण्डपर्शवो महापरा देवनटेश्वरा हरः १९८
पशुप्रमथभूतोमापतिः पिङ्गजटेक्षणः
पिनाकशूलखट्वाङ्गगङ्गाहीन्दुकपालभृत् १९९
गजपूषपुरानङ्गकालान्धकमखासुहृत्
-wordlist-
शम्भु (पुं), शर्व (पुं), स्थाणु (पुं), ईशान (पुं), ईश (पुं), रुद्र (पुं), उड्डीश (पुं), वामदेव (पुं), वृषाङ्क (पुं), कण्ठेकाल (पुं), शङ्कर (पुं), नीलकण्ठ (पुं), श्रीकण्ठ (पुं), उग्र (पुं), धूर्जटि (पुं), भीम (पुं), भर्ग (पुं), मृत्युञ्जय (पुं), पञ्चमुख (पुं), अष्टमूर्ति (पुं), श्मशानवेश्मन् (पुं), गिरिश (पुं), गिरीश (पुं), षण्ढ (पुं), कपर्दिन् (पुं), ईश्वर (पुं), ऊर्ध्वलिङ्ग (पुं), एकदृश् (पुं), त्रिदृश् (पुं), भालदृश् (पुं), एकपाद् (पुं), मृड (पुं), अट्टहासिन् (पुं), घनवाहन (पुं), अहिर्बुध्न (पुं), विरूपाक्ष (पुं), विषान्तक (पुं), महाव्रतिन् (पुं), वह्निरेतस् (पुं), हिरण्यरेतस् (पुं), शिव (पुं), अस्थिधन्वन् (पुं), पुरुषास्थिमालिन् (पुं), व्योमकेश (पुं), शिपिविष्ट (पुं), भैरव (पुं), दिग्वासस् (पुं), कृत्तिवासस् (पुं), भव (पुं), नीललोहित (पुं), सर्वज्ञ (पुं), नाट्यप्रिय (पुं), खण्डपर्शु (पुं), महादेव (पुं), महानट (पुं), महेश्वर (पुं), हर (पुं), पशुपति (पुं), प्रमथपति (पुं), उमापति (पुं), पिङ्गजट (पुं), पिङ्गेक्षण (पुं), पिनाकभृत् (पुं), शूलभृत् (पुं), खट्वाङ्गभृत् (पुं), गङ्गाभृत् (पुं), अहिभृत् (पुं), इन्दुभृत् (पुं), कपालभृत् (पुं), गजासुहृद् (पुं), पूषासुहृद् (पुं), अनङ्गासुहृद् (पुं), कालासुहृद् (पुं), अन्धकासुहृद् (पुं), मखासुहृद् (पुं)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
ईशान
ईशान, शशिशेखर, पशुपति, शूली, शिव, शङ्कर, शर्व, शम्भु, उमापति, गिरिश, श्रीकण्ठ, उग्र, हर, सर्वज्ञ, त्रिपुरान्तक, त्रिनयन, रुद्र, कपर्दिन्, भव, भूतेश, परमेश्वर, अन्धकरिपु, दक्षाध्वरध्वंसकृत्, स्थाणु, स्रष्टृ, धूर्जटि, वामदेव, कामध्वंसिन्, व्योमकेश, कपालिन्, नीलग्रीव, वह्निरेतस्, पिनाकिन्, भीम, भर्ग, कृत्तिवासस्, वृषाङ्क, अहिर्बुध्न, विरूपाक्ष, शिपिविष्ट, गणाधिप, गङ्गाधर, महादेव, मृड, नीललोहित
ईशानः शशिशेखरः पशुपतिः शूली शिवः शङ्करः,
शर्वः शम्भुरुमापतिश्च गिरिशः श्रीकण्ठ उग्रो हरः
सर्वज्ञस्त्रिपुरान्तकस्त्रिनयनो रुद्रः कपर्दी भवो,
भूतेशः परमेश्वरोऽन्धकरिपुर्दक्षाध्वरध्वंसकृत् ११
स्थाणुः स्रष्टा धूर्जटिर्वामदेवः,
कामध्वंसी व्योमकेशः कपाली
नीलग्रीवो वह्निरेताः पिनाकी,
भीमो भर्गः कृत्तिवासा वृषाङ्कः १२
अहिर्बुध्नो विरूपाक्षः शिपिविष्टो गणाधिपः
गङ्गाधरो महादेवो मृडः स्यान्नीललोहितः १३
verse 1.1.1.11
page 0003
ब्रध्न
ब्रध्न, तण्डु, गिरिश
ब्रध्नस्तण्डुगिरिशयोः स्थितिः स्थानव्यवस्थयोः
verse 5.1.1.837
page 0096
Mahabharata
English
Giriśa^1 = Śiva, q.v.
Giriśa^2, name of a bow. § 592 (Saṃśaptakavadhap.): VII, 23, 1041 (among the bows held by the five Draupadeyas).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
गिरिशः,
पुं,
(गिरिराश्रयत्वेन वसतित्वेनास्त्यस्यइति “लोमादिपामादिपिच्छादिभ्यः शने-लचः ।” १०० इति शः यद्वा, गिरौकैलासाख्यपर्व्वते आध्यात्मिकार्थे तु नित्यशुद्ध-मनसीत्यर्थः शेते विराजते इति यद्वा, गिरिंत्रिगुणवृत्तात्मकं मनः श्यति तनूकरोति विशुद्धंकरोति शरणागतभक्तसाधकानाम् शी ङलशयने शी य्च्छेदे वा गिरौ छन्दसि डः लोकेतु छान्दसानां क्वचिद्भाषायामपि प्रयोग इतिआशुशुक्षणिवदित्याह स्वामी ।) शिवः इत्य-मरः ३३
(यथा, रघुः ४१ ।“इति प्रगल्भं पुरुषाधिराजोमृगाधिराजस्य वचो निशम्य ।प्रत्याहतास्त्रो गिरिशप्रभावात्आत्मन्यवज्ञां शिथिलीचकार
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
गिरिश
पु०
गिरौ शेते शी--बा० लोकेऽपि ड, गिरिरस्त्यस्यलामा० वा शिवे अमरः “गिरिशमुपचचार प्रत्यहंसा सुकुशी” कुमा० “गिरिशरमणी कालि! सततम्”कालास्तवः “शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि”यजु० १६
Capeller
German
गिरिश bergbewohnend
Bein. RudraŚiva's
Burnouf
French
गिरिश गिरिश
m.
cf. गिरीश।
Stchoupak
French
गिरिश-
m.
montagnard
n.
de Rudra-Śiva.