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क्षोणी (kSoNI)

 
Capeller Eng
English
क्षोणी॑
f.
(nom. °क्षोणीस्) woman, wife,
fig.
the earth
du.
heaven
and earth.
Spoken Sanskrit
English
क्षोणी - kSoNI -
f.
- multitude of men
क्षोणी - kSoNI -
f.
- people
क्षोणी - kSoNI -
f.
- earth
Monier Williams Cologne
English
क्षोणी॑ a (ई॑),
f.
(nom. sg. also °णी॑स्
nom.
pl.
°णी॑स्, once °ण॑यस्,
RV.
x, 22, 9) a multitude of men, people (as opposed to the chief),
RV.
the earth,
R.
i, 42, 23
BhP.
v, 18, 28 and viii, 6, 2
क्षोणी॑ (ई॑),
f.
Ved.
nom.
du.
‘the two sets of people’ i.e. the inhabitants of heaven and earth [‘heaven and earth’,
Naigh.
iii, 30]
RV.
ii, 16, 3
viii, 7, 22
52, 10
99, 6.
क्षोणी॑ (accord. to some also, ‘a partic. class of goddesses or semi-divine females’
accord.
to others, ‘flood, stream of water or Soma
&c.
’).
क्षोणी b (f. of °ण॑, q.v.)
Monier Williams 1872
English
क्षोणी क्षोणी, f., Ved. the earth
(यौ),
du. heaven and earth
(according to some the sing. of
this word and sometimes the plur. may be used col-
lectively, and the original meaning may be ‘a multitude
of men’ or ‘the people’ (as opposed to the chief)
the
du. may then mean ‘the two sets of people, i. e. the
inhabitants of heaven and earth
sometimes a form
क्षोणि occurs)
[cf. Gr. χθών.]
—क्षोणी-मय,
अस्, ई, अम्, containing the earth in himself, ‘the
source of everything in the earth
an epithet of
Viṣṇu in his fish-incarnation.
Macdonell
English
क्षोणी kṣoṇī́,
f.
(nm. -s) = kṣoṇí: -pati, -ramaṇa,
m.
prince, king.
Apte Hindi
Hindi
क्षोणी
स्त्री*
- क्षोणि + ङीष्
पृथ्वी
क्षोणी
स्त्री*
- क्षोणि + ङीष्
एक
Shabdartha Kaustubha
Kannada
क्षोणी
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಪೃಥ್ವಿ /ಭೂಮಿ
प्रयोगाः - > "शम्भोर्व बत सन्धिवेलनटनं भाजि व्रतं द्रागिति क्षोणी नृत्यति मूर्तिरष्टवपुषोऽसृग्वृष्टिसन्ध्याधिया"
उल्लेखाः - > नैष० १२-९२
L R Vaidya
English
kzoRI {% f. %} 1. The earth
2. the number ‘one’ (in math.)
भूतसङ्ख्या
Sanskrit
१, अंशुमान्, अचला, अब्ज, अमृतांशु, अवनि, आदि, आस्य, इन्दु, इला, उडुपति, उर्वरा, उर्वी, ऋक्षेश, एक, एणधर, औषधीश, क, कलाधर, कलि, कु, कुमुदाकरप्रिय, क्षपाकर, क्षमा, क्षिति, क्षोणि, क्षोणी, क्षमा, गो, गोत्र, गोत्रा, ग्लौ, चन्द्र, चन्द्रमस्, जगती, जैवातृक, ज्या, तनु, दाक्षायणीप्राणेश, धरणी, धरा, धरित्री, नायक, निशाकर, निशेश, पितामह, पृथिवी, पृथ्वी, प्रालेयांशु, ब्रह्मा, भुवन्यु, भू, भूमि, मही, मुख, मृगलाञ्छन, मृगाङ्क, मेदिनी, रजनीकर, रजनीश, रात्रिप, रात्रीश, रुग्ण, रूप, लपन, वक्त्र, वदन, वसुधा, वसुन्धरा, वाक्, विधु, विरञ्चि, विश्वम्भरा, शशधर, शशभृत्, शशलाञ्छन, शशाङ्क, शशि, शशी, शीतकर, शीतकिरण, शीतद्युति, शीतमयूख, शीतरश्मि, शीतांशु, शुभ्रभानु, श्वेत, श्वेतांशु, सितरश्मि, सुधांशु, सोम, स्थिरा, हरिणधृत्, हरिणाङ्क, हिमकर, हिमगु, हिमरश्मि, हिमांशु
Bopp
Latin
क्षोणी f. id. AM.
Indian Epigraphical Glossary
English
kṣoṇī (IE 7-1-2), ‘one’.
Schmidt Nachtrage zum Sanskrit Worterbuch
German
क्षोणी , vgl. Geldner in Bezzenb. Beitr. 11, 327 ff.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
भूर्भूमिः पृथिवी पृथ्वी वसुधोर्वी वसुंधरा
धात्री धरित्री धरणी विश्वा विश्वंभरा धरा ९३५
क्षितिः क्षोणी क्षमानन्ता ज्या कुर्वसुमती मही
गौर्गोत्रा भूतधात्री क्ष्मा गन्धमाताचलावनिः ९३६
सर्वंसहा रत्नगर्भा जगती मेदिनी रसा
काश्यपी पर्वताधारा स्थिरेला रत्नबीजसूः ९३७
विपुला सागराच्चाग्रे स्युर्नेमीमेखलाम्बराः
-wordlist-
भू (स्त्री), भूमि (स्त्री), पृथिवी (स्त्री), पृथ्वी (स्त्री), वसुधा (स्त्री), उर्वी (स्त्री), वसुन्धरा (स्त्री), धात्री (स्त्री), धरित्री (स्त्री), धरणी (स्त्री), विश्वा (स्त्री), विश्वम्भरा (स्त्री), धरा (स्त्री), क्षिति (स्त्री), क्षोणी (स्त्री), क्षमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), ज्या (स्त्री), कु (स्त्री), वसुमती (स्त्री), मही (स्त्री), गो (स्त्री), गोत्रा (स्त्री), भूतधात्री (स्त्री), क्ष्मा (स्त्री), गन्धमाता (स्त्री), अचला (स्त्री), अवनि (स्त्री), सर्वंसहा (स्त्री), रत्नगर्भा (स्त्री), जगती (स्त्री), मेदिनी (स्त्री), रसा (स्त्री), काश्यपी (स्त्री), पर्वताधारा (स्त्री), स्थिरा (स्त्री), इला (स्त्री), रत्नसू (स्त्री), बीजसू (स्त्री), विपुला (स्त्री), सागरनेमी (स्त्री), सागरमेखला (स्त्री), सागराम्बरा (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भू
भू, भूमि, वसुधा, अवनि, वसुमती, धात्री, धरित्री, धरा, गो, गोत्रा, जगती, रसा, क्षिति, इला, क्षोणी, क्षमा, क्ष्मा, अचला, कु, पृथ्वी, पृथिवी, स्थिरा, धरणी, विश्वम्भरा, मेदिनी, ज्या, अनन्ता, विपुला, समुद्रवसना, सर्वंसहा, ऊर्वी, मही, काश्यपी, भूतधात्री, रत्नगर्भा, वसुन्धरा, धराधारा
भूर्भूमिर्वसुधावनिर्वसुमती धात्री धरित्री धरा,
गौर्गोत्रा जगती रसा क्षितिरिला क्षोणी क्षमा क्ष्माचला
कुः पृथ्वी पृथिवी स्थिरा धरणी विश्वम्भरा मेदिनी,
ज्यानन्ता विपुला समुद्रवसना सर्वंसहोर्वी मही १५६
काश्यपी भूतधात्री रत्नगर्भा वसुन्धरा
धराधारा विज्ञेया तद्विशेषान्निबोधत १५७
verse 2.1.1.156
page 0020
नाममाला
Sanskrit
भूमि, भू, पृथिवी, पृथ्वी, गह्वरी, मेदिनी, मही, धरा, वसुमती, धात्री, क्षमा, विश्वम्भरा, अवनि, वसुधा, धरणी, क्षोणी, क्ष्मा, धरित्री, क्षिति, कुम्भिनी, इला, उर्वरा, उर्वी, जगती, गो, वसुन्धरा
भूमिर्भूः पृथिवी पृथ्वी गह्वरी मेदिनी मही
धरा वसुमती धात्री क्षमा विश्वम्भराऽवनिः
वसुधा धरणी क्षोणी क्ष्मा धरित्री क्षितिश्च कुः
कुम्भिनीलोर्वरा चोर्वी जगती गौर्वसुन्धरा
verse 0.1.1.5
page 0004
Vedic Reference
English
Kṣoṇī. This word, when used in the plural, denotes,
according to the St. Petersburg Dictionary and Ludwig, ^1 in
several passages of the Rigveda, ^2 the free retainers of the king.
Geldner^3 at one time thought it referred to the wives of the
king, pointing to polygamy
but later^4 he concluded that it
means certain divine wives.
1)Translation of the Rigveda, 3, 247.
2) i. 57, 4
173, 7
viii. 3, 10
13, 17
x. 95. 19. In ii. 34, 13
x. 22, 9, the
sense is doubtful.
3) Bezzenberger, Beiträge, 11, 327.
4) Vedische Studien, 1, 279, 283.
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
क्षोणी,
स्त्री,
(क्षै + बाहुलकात् डोनिः वाङीप् ।) पृथिवी इति शब्दरत्ना-वली
अमरटीका
(यथा, ऋग्वेदे ५४ ।“अक्रन्दयो नद्योऽरोरुवद्बना कथा क्षोणी-भिर्यसा समारत
”)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
क्षोणि(णी) स्त्री क्षै--बा० डोनि वा ङीप् पृथिव्यांनिघ० “मत्स्यो युगान्तसमये मनुनोपलब्धः क्षोणीमयोनिखिलजीवनिकायकेतुः” भाग० २, ७, १३ एकसंख्यायाञ्च
Grassman
German
kṣoṇī́, f., kṣoṇí, auch dreisilbig (kṣaoṇī́ ? in {173, 7}
{921, 9}), vielleicht Wasserflut, Wasserstrom, wenigstens finden wir fast überall entweder in demselben Verse oder ganz in der Nähe die Beziehung aufs Wasser
insbesondere 2〉 der Somatrank (als Wasserschwall, Wasserflut)
3〉 du. die beiden Welten (ursprünglich die beiden Wasserfluten?). [Ob von einer Wurzel *kṣu, deren Erweiterungen kṣud und kṣubh sind?]
-ī́ [N. s.] vor sacate (vgl. apás kṣonī́ mit apás kṣódas im vorigen Verse) {180, 5}.
-ī́s [N. s.] {623, 19}{623, 10}.
-ī́ [d.] 3〉 {627, 22}
{708, 6}
{1021, 10}.
-íbhyām 3〉 {207, 3}.
-áyas {848, 9}.
-ī́s [N. p.] {54, 1} ákrandayas nadías kathā́ bhiyásā sám ārata, du machtest die Ströme brausen, wie rannen nicht die Fluten vor Schreck zusammen (danach unter kathā́ und ar zu ändern). 2〉 {173, 7}
{633, 17}.
-ī́s [A. p.] 2〉 {57, 4}.
-ī́bhis {225, 13}
{921, 9} (vgl. V. _{921, 7}).
371, 25.a: {623, 10} st. {623, 19}