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क्षितिज (kSitija)

 
शब्दसागरः
English
क्षितिज
mfn.
(-जः-जा-जं) Earth-born, produced of or in the earth.
m.
(-जः)
1. Mars.
2. The demon NARAKA.
3. An earthworm.
f.
(-जा)
SITA.
E.
क्षिति, and born.
Yates
English
क्षिति-ज (जः-जा-जं)
a. Earth-born.
m.
Mars
the demon
Naraka
an earthworm.
f.
Sitā.
Spoken Sanskrit
English
क्षितिज - kSitija -
n.
- horizon
दिङ्मण्डल - diGmaNDala -
n.
- horizon
अनुप्रस्थ - anuprastha -
adj.
- horizontal
रराट्या - rarATyA -
f.
- horizon
आकाशकक्षा - AkAzakakSA -
f.
- horizon
प्रान्तवृति - prAntavRti -
f.
- horizon
महीजीवा - mahIjIvA -
f.
- horizon
लेखा - lekhA -
f.
- horizon
सीमन् - sIman -
f.
- horizon
दिक्पथ - dikpatha -
m.
- horizon
सन्धि - sandhi -
m.
- horizon
विषय - viSaya -
m.
- horizon
अम्बरान्त - ambarAnta -
m.
- horizon
चक्रपाल - cakrapAla -
m.
- horizon
दृग्गोचर - dRggocara -
m.
- horizon
नयनविषय - nayanaviSaya -
m.
- horizon
निकाश - nikAza -
m.
- horizon
परिधि - paridhi -
m.
- horizon
क्ष्मावलय - kSmAvalaya -
m.
- horizon
दिक्चक्र - dikcakra -
n.
- horizon
क्षितिज kSitija
n.
horizon
क्षितिज kSitija
adj.
produced of or in the earth
क्षितिज kSitija
adj.
earth-born
क्षितिज kSitija
adj.
earth born
क्षितिज kSitija
m.
name of the demon naraka
क्षितिज kSitija
m.
tree [ fig. ]
क्षितिज kSitija
m.
earth-son
क्षितिज kSitija
m.
kind of snail or earth-worm
Wilson
English
क्षितिज
mfn.
(-जः-जा-जं) Earth-born, produced of or in the earth.
m.
(-जः)
1 Mars.
2 The demon NARAKA.
3 An earth-worm.
f.
(-जा) SĪTĀ.
E.
क्षिति, and born.
Monier Williams Cologne
English
क्षिति—ज
mfn.
earth-born, produced of or in the earth,
Suśr.
क्षिति—ज
m.
a tree,
MBh.
iii, 10248
R.
vi, 76, 2
a kind of snail or earth-worm (भू-नाग),
L.
‘earth-son’,
N.
of the planet Mars,
VarBṛ.
Gaṇit.
of the demon Naraka,
W.
क्षिति—ज
n.
the horizon,
Āryabh.
Sūryas.
Benfey
English
क्षितिज क्षिति-ज (vb. जन्)
I.
adj.
Sprung from the earth, Suśr. 1, 224, 9.
II.
m.
A tree, Rām. 6, 76, 2.
Apte Hindi
Hindi
क्षितिजः
पुं*
क्षिति-जः -
वृक्ष
क्षितिजः
पुं*
क्षिति-जः -
"गंडोआ, केंचुआ"
क्षितिजः
पुं*
क्षिति-जः -
मंगल ग्रह
क्षितिजः
पुं*
क्षिति-जः -
विष्णु के द्वारा मारा गया नरक नाम का राक्षस
क्षितिजम्
नपुं*
क्षिति-जम् -
जहाँ पृथ्वी और आकाश मिलते हुए प्रतीत होते हैं
Shabdartha Kaustubha
Kannada
क्षितिज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಅಂಗಾರಕ /ಕುಜಗ್ರಹ
क्षितिज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ನರಕಾಸುರ
क्षितिज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಮರ /ವೃಕ್ಷ
क्षितिज
पदविभागः - > पुल्लिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಭೂನಾಗ /ಮಣ್ಣುಹುಳು /ಎರುಬು ಹುಳು
निष्पत्तिः - > जनी (प्रादुर्भावे) - "डः" (३-२-९८)
व्युत्पत्तिः - > क्षितेर्जायते
क्षितिज
पदविभागः - > नपुंसकलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದಿಗಂತ /ಬಾನಿನ ಅಂಚು /ಭೂಮಿಯೂ ಆಕಶವೂ ಸೇರುವಂತೆ ಕಾಣುವ ರೇಖೆ
क्षितिज
कन्नडार्थः - > ಭೂಮಿಯಲ್ಲಿ ಹುಟ್ಟಿದ
L R Vaidya
English
kziti-ja {% (I) m. %} 1. a tree
2. an earth-worm
3. the planet Mars
4. the demon Naraka killed by Vishṇu.
kziti-ja {% (II) n. %} the horizon.
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
क्षितिजं,
क्ली,
(क्षिति + जन् + डः ।) खगोलेआकाशमध्यान्नवत्यंशान्तरे तिर्य्यग्वृत्तम् यथा, --“पर्ब्बापरं विरचयेत् सममण्डलाख्यंयाम्योत्तरञ्च विदिशोर्व्वलयद्वयञ्च ।ऊर्द्ध्वाध एवमिह वृत्तचतुष्कमेत-दावेष्ट्य तिर्य्यगपरं क्षितिजं तदर्द्धे”
इति सिद्धान्तशिरोमणौ गोलबन्धाधिकारः
क्षितिजः,
पुं,
(क्षितेर्जायते इति जन् + डः ।)भूनागः इति राजनिर्घण्टः मङ्गलग्रहः ।यथा, --“परमैश्वर्य्यमतुलं नानाविधसुखाश्रयम् ।करोंति सोमपुत्त्रस्तु क्षितिजान्तर्द्दशाङ्गतः”
इति ज्योतिस्तत्त्वम्
भूजाते त्रि
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
क्षितिज
पु०
क्षितेर्जायते जन--ड मङ्गले “क्षितिजा-न्तर्दशां गतः” ज्यो० नरकासुरे भूनागे उपरसभदेर जनि० महीरुहे वृक्षे भूमिजाते
त्रि०
सि० शि०गोलबन्धाधिकारोक्ते वृत्तक्षेत्रभेदे यथापूर्वापरं विरचयेत् सममण्डलाख्यं याम्योत्तरं विदि-शोर्वलयद्वयं ऊर्ध्वाध एवमिह वृत्तचतुष्कमेतदावेष्ट्यतिर्यगपरं क्षितिजं तदर्धे” सि० शि० ।“एकं पूर्वापरमन्यद्याम्येत्तरं तथा कोणवृत्तद्वयमेवं वृत्तचतु-ष्टयमूर्द्धाधोरूपमावेष्ट्य तठर्द्धे वृत्तं क्षितिजाख्यं निवे-शयेत् अत्र याम्योत्तरवृत्त उत्तरक्षितिजादुपरि पलां-शान्तर एकं ध्रुवचिह्नं कार्य्यम् दक्षिणक्षितिजादधोऽ-न्यत् इदानीमुन्मण्डलमाह” प्रसि० ।“पूर्वापरक्षितिजसंगमयोर्विलग्नं यास्ये ध्रुवे पललवैः क्षि-तिजादधःस्थे सौम्ये कुजादुप चाक्षलवैर्ध्रुवे तदु-न्मण्डलं दिननिशोः क्षयवृद्धिकारि” सि० शि० ।“समवृत्तक्षितिजयोर्यौ पूर्वापरौ संपातौ तयोर्घ्रुवचित्त-योश्च सक्तं यन्निबध्यते तदुन्मण्डतसंञ्चम् दिनरात्र्यो-र्वृद्धिक्षयौ तद्वशेन भवतः” प्ररि०