कृष्णा (kRSNA)
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Monier Williams Cologne
EnglishApte Hindi
Hindiकृष्णा
- कृष्ण - टाप्
"द्रौपदी का नाम, पाण्डवों की पत्नी"
कृष्णा
- कृष्ण - टाप्
दक्षिण भारत की एक नदी जो मुसलीपट्टम् में समुद्र में गिरती है
कृष्णा
- -
यमुना नदी
Shabdartha Kaustubha
Kannadaकृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದ್ರೌಪದಿ /ಪಾಂಡವರ ಪತ್ನಿ
प्रयोगाः - > "कृष्णेत्येवाब्रुवन् कृष्णां कृष्णाभूत् सा हि वर्णतः । तथा तन्मिथुनं जज्ञे द्रुपदस्य महासखे ॥"
उल्लेखाः - > भा० आदि० १८१-५७
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಹಿಪ್ಪಲಿ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ದ್ರಾಕ್ಷಿ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ನೀಲಿಗಿಡ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕರಿಜೀರಿಗೆ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಶೀವನೆಯ ಮರ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕಟುಕರೋಹಿಣಿ
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಬಾಹುಜಿಗೆ ಗಿಡ
विस्तारः - > "कृष्णः काके पिके वर्णे बिष्णौ व्यासेऽर्जुने कलौ । कृष्णा तु नील्यां द्रौपद्यां पिप्पलीद्राक्षयोरपि" - हेम० ।
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕೃಷ್ಣಾನದಿ
विस्तारः - > "व्यासार्जुनाग्निहरिकोकिलकाकशूद्रतामिस्रपक्षकरिनीलगुणेषु कृष्णः । द्रव्ये त्रिषु द्रुपदजातटिनीकणासु कृष्णाथ लोहमरिचे दुरितं च कृष्णम् " - नानार्थर० ।
कृष्णा
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > कृष्ण ಪದದ ದ್ರೌಪದಿ ಮೊದಲಾದ ಸ್ತ್ರೀಲಿಂಗದ ಅರ್ಥ
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L R Vaidya
EnglishEdgerton Buddhist Hybrid
EnglishWordnet
Sanskrit गम्भारी, सर्वतोभद्रा, काश्मरी, मधुपर्णिका, श्रीपर्णी, भद्रपर्णी, कार्श्मरी, भद्रा, गोपभद्रिका, कुमुदा, सदाभद्रा, कट्फला, कृष्णवृन्तिका, कृष्णवृन्ता, हीरा, सर्वतोभद्रिका, स्निग्धपर्णी, सुभद्रा, कम्भारी, गोपभद्रा, विदारिणी, क्षीरिणी, महाभद्रा, मधुपर्णी, स्वरुभद्रा, कृष्णा, अश्वेता, रोहिणी, गृष्टिः, स्थूलत्वचा, मधूमती, सुफला, मेदिनी, महाकुमुदा, सुदृढत्वचा
दृढकाष्ठयुक्तः वृक्षविशेषः यस्य पर्णानि पिप्पलवृक्षस्य पर्णानाम् इव भवन्ति।
"गम्भार्याः काष्ठेन निर्मितः पटहः उत्तमः आसीत्।"
पिप्पली, कृष्णा, उपकुल्या, वैदेही, मागधी, चपला, कणा, उषणा, शौण्डी, कोला, ऊषणा, पिप्पलिः, कृकला, कटुबीजा, कोरङ्गी, तिक्ततण्डुला, श्यामा, दन्तफला, मगधोद्भवा
एका लता यस्य कलिका तूतस्य आकारवत् भवति।
"पिप्पली औषधस्य रूपेण उपयुज्यते।"
पर्पटी, रञ्जनी, कृष्णा, जतुका, जननी, जनी, जतुकृष्णा, संस्पर्शा, जतुकृत्, चक्रवर्तिनी
पिष्टकभेदः, उत्तरभारतदेशभवसुगन्धीद्रव्यम् (आयुर्वेदे अस्य विषव्रणकण्डूकफपित्तास्रकुष्ठनाशित्वादयः गुणाः प्रोक्ताः)
"श्राद्धविधौ ब्राह्मणेन ललाटे पर्पट्याः तिलकं परिधृतः"
द्रौपदी, पाञ्चाली, कृष्णा, याज्ञसेनी, त्रिहायणी, वेदिजा, नित्ययौवना, सैरन्ध्री
द्रुपदकन्या या पाण्डवानां पत्नी आसीत्।
"द्रौपदी यज्ञात् जाता।"
दुर्गा, उमा, कात्यायनी, गौरी, ब्रह्माणी, काली, हैमवती, ईश्वरा, शिवा, भवानी, रुद्राणी, सर्वाणी, सर्वमङ्गला, अपर्णा, पार्वती, मृडानी, लीलावती, चणडिका, अम्बिका, शारदा, चण्डी, चण्डा, चण्डनायिका, गिरिजा, मङ्गला, नारायणी, महामाया, वैष्णवी, महेश्वरी, कोट्टवी, षष्ठी, माधवी, नगनन्दिनी, जयन्ती, भार्गवी, रम्भा, सिंहरथा, सती, भ्रामरी, दक्षकन्या, महिषमर्दिनी, हेरम्बजननी, सावित्री, कृष्णपिङ्गला, वृषाकपायी, लम्बा, हिमशैलजा, कार्त्तिकेयप्रसूः, आद्या, नित्या, विद्या, शुभह्करी, सात्त्विकी, राजसी, तामसी, भीमा, नन्दनन्दिनी, महामायी, शूलधरा, सुनन्दा, शुम्यभघातिनी, ह्री, पर्वतराजतनया, हिमालयसुता, महेश्वरवनिता, सत्या, भगवती, ईशाना, सनातनी, महाकाली, शिवानी, हरवल्लभा, उग्रचण्डा, चामुण्डा, विधात्री, आनन्दा, महामात्रा, महामुद्रा, माकरी, भौमी, कल्याणी, कृष्णा, मानदात्री, मदालसा, मानिनी, चार्वङ्गी, वाणी, ईशा, वलेशी, भ्रमरी, भूष्या, फाल्गुनी, यती, ब्रह्ममयी, भाविनी, देवी, अचिन्ता, त्रिनेत्रा, त्रिशूला, चर्चिका, तीव्रा, नन्दिनी, नन्दा, धरित्रिणी, मातृका, चिदानन्दस्वरूपिणी, मनस्विनी, महादेवी, निद्रारूपा, भवानिका, तारा, नीलसरस्वती, कालिका, उग्रतारा, कामेश्वरी, सुन्दरी, भैरवी, राजराजेश्वरी, भुवनेशी, त्वरिता, महालक्ष्मी, राजीवलोचनी, धनदा, वागीश्वरी, त्रिपुरा, ज्वाल्मुखी, वगलामुखी, सिद्धविद्या, अन्नपूर्णा, विशालाक्षी, सुभगा, सगुणा, निर्गुणा, धवला, गीतिः, गीतवाद्यप्रिया, अट्टालवासिनी, अट्टहासिनी, घोरा, प्रेमा, वटेश्वरी, कीर्तिदा, बुद्धिदा, अवीरा, पण्डितालयवासिनी, मण्डिता, संवत्सरा, कृष्णरूपा, बलिप्रिया, तुमुला, कामिनी, कामरूपा, पुण्यदा, विष्णुचक्रधरा, पञ्चमा, वृन्दावनस्वरूपिणी, अयोध्यारुपिणी, मायावती, जीमूतवसना, जगन्नाथस्वरूपिणी, कृत्तिवसना, त्रियामा, जमलार्जुनी, यामिनी, यशोदा, यादवी, जगती, कृष्णजाया, सत्यभामा, सुभद्रिका, लक्ष्मणा, दिगम्बरी, पृथुका, तीक्ष्णा, आचारा, अक्रूरा, जाह्नवी, गण्डकी, ध्येया, जृम्भणी, मोहिनी, विकारा, अक्षरवासिनी, अंशका, पत्रिका, पवित्रिका, तुलसी, अतुला, जानकी, वन्द्या, कामना, नारसिंही, गिरीशा, साध्वी, कल्याणी, कमला, कान्ता, शान्ता, कुला, वेदमाता, कर्मदा, सन्ध्या, त्रिपुरसुन्दरी, रासेशी, दक्षयज्ञविनाशिनी, अनन्ता, धर्मेश्वरी, चक्रेश्वरी, खञ्जना, विदग्धा, कुञ्जिका, चित्रा, सुलेखा, चतुर्भुजा, राका, प्रज्ञा, ऋद्भिदा, तापिनी, तपा, सुमन्त्रा, दूती, अशनी, कराला, कालकी, कुष्माण्डी, कैटभा, कैटभी, क्षत्रिया, क्षमा, क्षेमा, चण्डालिका, जयन्ती, भेरुण्डा
सा देवी यया नैके दैत्याः हताः तथा च या आदिशक्तिः अस्ति इति मन्यते।
"नवरात्रोत्सवे स्थाने स्थाने दुर्गायाः प्रतिष्ठापना क्रियते।"
द्राक्षा, मृद्वीका, मृद्वी, स्वाद्वी, स्वादुरसा, मधुरसा, गोस्तनी, रसा, रसाला, चारुफला, कापिशायनी, साब्दी, हरहूरा, चारुफला, कृष्णा, प्रियाला, तापसप्रिया, गुच्छफला, अमृतफला
फलविशेषः-अस्य गुणाः अतिमधुरत्व-अमलत्व-शीतपित्तार्तिदाहमूत्रदोषनाशित्वादयः।
"द्राक्षात् मद्यं जायते।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskritवैदेही पिप्पली कृष्णोपकुल्या मागधी कणा ।
वैदेही (स्त्री), पिप्पली (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), उपकुल्या (स्त्री), मागधी (स्त्री), कणा (स्त्री)
पाञ्चाली द्रौपदी कृष्णा सैरंध्री नित्ययौवना ॥ ७१० ॥
वेदिजा याज्ञसेनी च कर्णश्चम्पाधिपोऽङ्गराट् ।
राधासुतोऽर्कतनयः कालपृष्ठम् तु तद्धनुः ॥ ७११ ॥
पाञ्चाली (स्त्री), द्रौपदी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), सैरन्ध्री (स्त्री), नित्ययौवना (स्त्री), वेदिजा (स्त्री), याज्ञसेनी (स्त्री), कर्ण (पुं), चम्पाधिप (पुं), अङ्गराज् (पुं), राधातनय (पुं), सूततनय (पुं), अर्कतनय (पुं), कालपृष्ठ (क्ली)
अभिधानचिन्तामणिपरिशिष्टम्
Sanskritगौतमी कौशिकी कृष्णा तामसी बाभ्रवी जया ॥ ४७ ॥
कालरात्रिर्महामाया भ्रामरी यादवी वरा ।
बर्हिध्वजा शूलधरा परमब्रह्मचारिणी ॥ ४८ ॥
अमोघा विन्ध्यनिलया षष्ठी कान्तारवासिनी ।
जाङ्गुली बदरीवासा वरदा कृष्णपिङ्गला ॥ ४९ ॥
p{0003}
दृषद्वतीन्द्रभगिनी प्रगल्भा रेवती तथा ।
महाविद्या सिनीवाली रक्तदन्त्येकपाटला ॥ ५० ॥
एकपर्णा बहुभुजा नन्दपुत्री महाजया ।
भद्रकाली महाकाली योगिनी गणनायिका ॥ ५१ ॥
हासा भीमा प्रकूष्माण्डी गदिनी वारुणी हिमा ।
अनन्ता विजया क्षेमा मानस्तोका कुहावती ॥ ५२ ॥
चारणा च पितृगणा स्कन्दमाता घनाञ्जनी ।
गान्धर्वी कर्वरी गार्गी सावित्री ब्रह्मचारिणी ॥ ५३ ॥
कोटिश्रीर्सन्दरावासा केशी मलयवासिनी ।
कालायनी विशालाक्षी किराती गोकुलोद्भवा ॥ ५४ ॥
एकानसी नारायणी शैला शाकंभरीश्वरी ।
प्रकीर्णकेशी कुण्डा च नीलवस्त्रोग्रचारिणी ॥ ५५ ॥
अष्टादशभुजा पौत्री शिवदूती यमस्वसा ।
सुनन्दा विकचा लम्बा जयन्ती नकुलाकुला ॥ ५६ ॥
विलङ्का नन्दिनी नन्दा नन्दयन्ती निरञ्जना ।
कालंजरी शतमुखी विकराली करालिका ॥ ५७ ॥
विरजाः पुरला जीरी बहुपुत्री कुलेश्वरी ।
कैटभी कालदमनी दर्दुरा कुलदेवता ॥ ५८ ॥
रौद्री कुन्द्रा महारौद्री कालंगमा महानिशा ।
बलदेवस्वसा पुत्री हीरी क्षेमंकरी प्रभा ॥ ५९ ॥
मारी हैमवती चापि गोला शिखरवासिनी ।
गौतमी (स्त्री), कौशिकी (स्त्री), कृष्णा (स्त्री), तामसी (स्त्री), बाभ्रवी (स्त्री), जया (स्त्री), कालरात्रि (स्त्री), महामाया (स्त्री), भ्रामरी (स्त्री), यादवी (स्त्री), वरा (स्त्री), बर्हिध्वजा (स्त्री), शूलधरा (स्त्री), परमब्रह्मचारिणी (स्त्री), अमोघा (स्त्री), विन्ध्यनिलया (स्त्री), षष्ठी (स्त्री), कान्तारवासिनी (स्त्री), जाङ्गुली (स्त्री), बदरीवासा (स्त्री), वरदा (स्त्री), कृष्णपिङ्गला (स्त्री), दृषद्वती (स्त्री), इन्द्रभगिनी (स्त्री), प्रगल्भा (स्त्री), रेवती (स्त्री), महाविद्या (स्त्री), सिनीवाली (स्त्री), रक्तदन्ती (स्त्री), एकपाटला (स्त्री), एकपर्णा (स्त्री), बजुभुजा (स्त्री), नन्दपुत्री (स्त्री), महाजया (स्त्री), भद्रकाली (स्त्री), महाकाली (स्त्री), योगिनी (स्त्री), गणनायिका (स्त्री), हासा (स्त्री), भीमा (स्त्री), प्रकूष्माण्डी (स्त्री), गदिनी (स्त्री), वारुणी (स्त्री), हिमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), विजया (स्त्री), क्षेमा (स्त्री), मानस्तोका (स्त्री), कुहावती (स्त्री), चारणा (स्त्री), पितृगणा (स्त्री), स्कन्दमाता (स्त्री), घनाञ्जनी (स्त्री), गान्धर्वी (स्त्री), कर्बुरा (स्त्री), गार्गी (स्त्री), सावित्री (स्त्री), ब्रह्मचारिणी (स्त्री), कोटिश्री (स्त्री), मन्दरावासा (स्त्री), केशी (स्त्री), मलयवासिनी (स्त्री), कालायनी (स्त्री), विशालाक्षी (स्त्री), किराती (स्त्री), गोकुलोद्भवा (स्त्री), एकानसी (स्त्री), नारायणी (स्त्री), शैला (स्त्री), शाकम्भरी (स्त्री), ईश्वरी (स्त्री), प्रकीर्णकेशी (स्त्री), कुण्डा (स्त्री), नीलवस्त्रा (स्त्री), उग्रचारिणी (स्त्री), अष्टादशभुजा (स्त्री), पौत्री (स्त्री), शिवदूती (स्त्री), यमस्वसा (स्त्री), सुनन्दा (स्त्री), विकचा (स्त्री), लम्बा (स्त्री), जयन्ती (स्त्री), नकुला (स्त्री), कुला (स्त्री), विलङ्का (स्त्री), नन्दिनी (स्त्री), नन्दा (स्त्री), नन्दयन्ती (स्त्री), निरञ्जना (स्त्री), कालञ्जरी (स्त्री), शतमुखी (स्त्री), विकराला (स्त्री), करालिका (स्त्री), विरजस् (स्त्री), पुरला (स्त्री), जारी (स्त्री), बहुपुत्री (स्त्री), कुलेश्वरी (स्त्री), कैटभी (स्त्री), कालदमनी (स्त्री), दर्दुरा (स्त्री), कुलदेवता (स्त्री), रौद्री (स्त्री), कुन्द्रा (स्त्री), महारौद्री (स्त्री), कालङ्गमा (स्त्री), महानिशा (स्त्री), बलदेवस्वसृ (स्त्री), पुत्री (स्त्री), हीरी (स्त्री), क्षेमङ्करी (स्त्री), प्रभा (स्त्री), मारी (स्त्री), हैमवती (स्त्री), गोला (स्त्री), शिखरवासिनी (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskritहिरण्या
हिरण्या, कनका, रक्ता, कृष्णा, सुप्रभा, अतिरक्ता, बहुरूपा, अर्चिस्_जिह्वाः
भवति हिरण्या कनका रक्ता कृष्णा सुप्रभा चान्या ।
अतिरक्ता बहुरूपेति सप्त सप्तार्चिषो जिह्वाः ॥ ६८ ॥
verse 1.1.1.68
page 0009
कृष्णा
कृष्णा, उपकुल्या, वैदेही, मागधी, पिप्पली, कणा
कृष्णोपकुल्या वैदेही मागधी पिप्पली कणा ॥ ६१४ ॥
verse 2.1.1.614
page 0069
Mahabharata
EnglishKṛshṇā^1 = Draupadī: I, 125, 148, 167, 384, 430, 2259, 2289 (Dº), 2438, 6323, 6325, 6402, 6407 (origin of the name), 6434 (Pārshatī), 6942, 6952, 6977, †6979, †7007, †7009, †7015, †7024, †7059, 7125, †7132, 7142, †7164, †7167, †7169, †7171, †7174, †7177, †7179, †7181, †7182, †7183, †7198, †7203, †7205, †7211, 7221, 7227, 7235, 7239, 7243, 7263, 7326 (Pārshatī), †7331, †7332, †7333, †7334, †7339, 7349, 7384, 7404, 7411, 7422, 7423, 7521, 7541 (Pāñcālīṃ), 7544, 7555, 7598, 7599, 7600, 7607, 7611, 7744, 7754, 7979, 7984, 8045
II, 27, 976, 2172, 2189, 2217, †2220, †2223, †2227, †2229, †2231, †2239, †2240, †2242, 2274, 2278, 2280, 2281, 2337, 2338, 2388, †2405 (Pāñcālīṃ), 2417, 2451, 2502, 2584, 2604, 2615, 2626, 2688, 2690, 2698, 2700
III, 10, 400, 440, 453, 582, 591, †903, †943, †950, 989, 990, 1078, 1093, 1099, 1105, 1162, 1164, 1182, 1189, 1191, 1199, 1201, 1403, 1479, (1479), 1492, 1933, 1945, 2003, 2014, 2015, 3070, 4021, 8293, 8415, 8481, 8651, †10219, †10229, †10282, 10417, †10837, †10838, 10842, 10849, 10859, 10860, 10869, 10976, 10997, 11004, 11007, 11019, 11021, 11052, 11058, 11067, 11403, 11406, 11412, 11430, 11453, 11494, 11558, 11629, 11679, 11740, 11786, †11907, 11935, 12315, 12557, †12571, †12576, †12578, †12579 (Yājñasenīṃ), †12580, †12581, †12582, †12584, 14708, 14725, 14730, 14738, †14746, †14751, †14753, 14792, 14803, 15019, 15493, 15521, 15537, 15540, 15541, 15542, 15543, †15606, 15611, 15615 (Dº), 15619, 15636, 15637, †15648, †15649, †15663, †15681, †15683, †15697, 15747, 15762, 15766, 15783, 15859, 15860, 16611 (Dº). 16617, †17219, 17221, 17222, 17224, 17243, 17476
IV, 74 (Dº), 81, 90, 146, 245, 263 (bhāryāṃ Kurūṇāṃ), 279, 335, 337, 383, 434, 451, 464, 485, 487, 490, 497, 503, 504, 508, 521, 636, 644, 690, 711, 738, 773, 780, 786, 796, 801, 803, 807, 822, 839, 846, 876, 1182, 1370, 1537, 1566, 1576, 2292, †2305, 2367
V, 201, 222, 689 (Dº), †847, †849, †850, †854, †928, †931, 1990, 2326, 2329, 2349, 2871, 2912, 2914, 2919, 3177, 3185, 3211, 3217, 3228, 3442, 4655, 4662, 4665, 4666, 5478, 5489, 5495, 5497, 5519, 5541, 5564
VI, 4090 (Dº), 4907
VII, 1684, 3818, 3825, 5425, 5428, 5656, 5658, 6543, 9166, 9226
VIII, 7, 308, 310, †3346, 3716, 3717, 3770, 4489, †4562, 4754, 4755, 4756, 5002
IX, 248, 255, 257, 259, 3433
X, 577, 579, 582, 589 (Yājñasenī), 594, 746 (Dº), 759
XI, 628, 629 (read Kṛshṇa with B.)
XII, 499, 1384, 1398, 1456 (Drupadātmajāṃ)
XIV, 322, 356, 1505, 2584 (Dº), 2604
XV, †437 (Dº), 654, †664, 806 (Dº)
XVII, 24, 51, 58, 77, †86
XVIII, 97, 119.
Kṛshṇā^2 = Durgā (Umā): IV, 184, 187
VI, 801.
Kṛshṇā^3, a river. § 574 (Jambūkh.): VI, 9, 340 (in Bhāratavarsha).
Kṛshṇā^4, a mātṛ. § 615u (Skanda): IX, 46, 2640.
पुराणम्
Englishकृष्णा १ / KṚṢṆĀ I. Another name for pāñcālī. (See under pāñcālī.
कृष्णा २ / KṚṢṆĀ II. A river in South india.
कृष्णा ३ / KṚṢṆĀ III. Another name for durgā. (virāṭa Parva, Chapter 6, Verse 9).
कृष्णा ४ / KṚṢṆĀ IV. A female attendant of Skandadeva. (śalya Parva, Chapter 46, Verse 22).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskritकृष्णा, (कृषे र्नक् णत्वं ततः टाप् ।) द्रौपदी ।(सा तु पञ्चपाण्डवमहिषी । कृष्णवर्णत्वादेवअस्याः नाम तथा जातम् । यथा, महाभारते १ ।१६८ । ४४ ।“कृष्णेत्येवाब्रुवन् कृष्णां कृष्णाऽभूत् सा हि वर्णतः ।तथा तन्मिथुनं यज्ञे द्रुपदस्य महामखे” ॥
)नीलीवृक्षः । पिप्पली । (अस्याः पर्य्याया यथा ।“पिप्पली चपला शौण्डी वैदेही मागधी कणा ।कृष्णोपकुल्या मगधी कोला स्यात्तिक्ततण्डुला” ॥
इति वैद्यकरत्नमालायाम् ॥
) द्राक्षा । इति मेदिनी ॥
नीलपुनर्नवा । कृष्णजीरकः । गम्भारी । कटुका ।सारिवाविशेषः । राजसर्षपः । इति राजनिर्घण्टः ॥
पर्पटी । इति भावप्रकाशः ॥
काकोली । सोम-राजी । इति जटाधरः ॥
(द्वादशप्रकाराणां जलौ-कसां मध्ये सविषप्रकारीयजलौकोविशेषः । तस्यलक्षण यथा ।“तास्वञ्जनचूर्णवर्णा पृथुशिराः कृष्णा” ॥
इति सुश्रुते सूत्रस्थाने १३ अध्याये ॥
)
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