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कत्थ (kattha)

 
शब्दसागरः
English
कत्थ r. 1st cl. (कत्थते)
1. To praise or celebrate.
2. To flatter or coax.
3. To boast.
Wilson
English
कत्थ r. 1st cl. (कत्थते)
1 To praise or celebrate.
2 To flatter or coax.
3 To boast.
Shabdartha Kaustubha
Kannada
कत्थ - श्लाघायाम् (भ्वा० आत्म० सक० से) कत्थते
पदविभागः - > धातुः
कन्नडार्थः - > ಶ್ಲಾಘಿಸು /ಪ್ರಶಂಸೆ ಮಾಶು /ಹೊಗಳು /ಜಂಬ ಹೊಡೆ
धातुपाठः (Krishnacharya)
Sanskrit
धातुः:
कत्थ्
मूलधातुः:
कत्थ
धात्वर्थः:
श्लाघायाम्
गणः:
भ्वादिः
कर्मकत्वं:
सकर्मकः
इट्त्वं:
सेट्
उपग्रहः:
आत्मनेपदी
रूपम्:
कत्थते
धातुप्रदीपः
Sanskrit
कत्थँ कत्थ श्लाघायाम्
- कत्थते विकत्थी विकत्थनः ।। 36 ।।
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
कत्थ, श्लाघे इति कविकल्पद्रुमः
(भ्वां--आत्मं--सकं--सेट् क्वचित् अकं ।) दन्त्यवर्गाद्यापधः ।श्लाघः प्रशंसा कत्थते गुणिनं गुणी इतिदुर्गादासः
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
कत्थ श्लाघायाम् (आत्मगुणाविष्करणे) गृहीतकर्मकत्वात् अक०भ्वा० आ० सेट् कत्थते अकत्थिष्ट चकत्थे कत्थमानःकत्थनम् कत्था कत्थितम् “गर्जितेन वृथा किं तेकत्यितेन मानुष! कृत्वैतत् कर्म्मणा सर्वं क-त्थेथा मा चिरं कृथाः” भा० आ० १, १५३ अ० “परो-क्षमिव मे राजन्! कत्थसे शत्रुकर्षण!” भा० व० ७२ अ०“कृत्वा कत्थिष्यते कः” भट्टिः “जनस्य गोप्तास्मि विकत्थ-मानः” भाग० ५, १२, आर्षप्रयोगे पदव्यत्ययात्यर० “तथाऽभिगम्य वित्त नि को विकत्थेद्विचक्षणः”आ० वि० ५० अ० प्रणापेऽपि
सक०
कत्थन्त ।उग्रपरुषं निरतं श्मशाने” भाग० ८, ७, २७ “कत्थन्तेप्रलपन्ति” श्रीधरः वियेकेन कथने “कोविकत्थितु-मर्हति” आ० प० २५३३ कर्त्तरि युच् कत्थनः
क्षीरतरङ्गिणी
Sanskrit
कत्थँ कत्थ श्लाघायाम्
(अर्थविवरणम्) श्लाघा गुणारोपः
कत्थते, कत्थित्वा विकत्थनः वौ कष-लस-कत्थ (32153) इति घिनुण् - विकत्थी 36
धातुवृत्तिः
Sanskrit
कत्थँ कत्थ (अर्थः) श्लाघायाम्
कत्थते चकत्थे कत्थितेत्यादि कर्मणि (कत्थ्यत इत्यादि, चिकत्थिषते चाकत्थयते चाकत्थ्यते चाकत्थीतीत्यादि पूर्ववत् विकत्थी ) ( सूत्रम्) वौ कषलसकत्थस्रम्भः (इति सूत्रम्) इतिवावुपपदे तच्छीलादिषु धिनुण् वासरूपेण युच्, ( विकत्थनः ) एधादय उदात्ता अनुदात्तेतः37
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“कत्थ श्लाघायाम्”@} 2 श्लाघा-गुणारोपः, इति क्षीरस्वामी।
कत्थकः-त्थिका, कत्थकः-त्थिका, चिकत्थिषकः-षिका, चाकत्थकः-त्थिका
कत्थिता-त्री, कत्थयिता-त्री, चिकत्थिषिता-त्री, चाकत्थिता-त्री
-- कत्थयन्-न्ती, कत्थयिष्यन्-न्ती-ती
-- विकत्थमानः, कत्थयमानः, चिकत्थिषमाणः, चाकत्थ्यमानः
कत्थिष्यमाणः, कत्थयिष्यमाणः, चिकत्थिषिष्यमाणः, चाकत्थिष्यमाणः
3 कत्-कत्थौ-कत्थः
-- -- -- कत्थितम्-तः, कत्थितम्-तः, चिकत्थिषितः, चाकत्थितः-तवान्
कत्थः, 4 विकत्थी, 5 विकत्थनः, 6 चिकत्थिषुः, चिकत्थयिषुः, चाकत्थः
कत्थितव्यम्, कत्थयितव्यम्, चिकत्थिषितव्यम्, चाकत्थितव्यम्
कत्थनीयम्, कत्थनीयम्, चिकत्थिषणीयम्, चाकत्थनीयम्
कत्थ्यम्, कत्थ्यम्, चिकत्थिष्यम्, चाकत्थ्यम्
ईषत्कत्थः-दुष्कत्थः-सुकत्थः
-- -- कत्थ्यमानः, कत्थ्यमानः, चिकत्थिष्यमाणः, चाकत्थ्यमानः
कत्थः, कत्थः, चिकत्थिषः, चाकत्थः
कत्थितुम्, कत्थयितुम्, चिकत्थिषितुम्, चाकत्थितुम्
कत्था, कत्थना, चिकत्थिषा, चिकत्थयिषा, चाकत्था
7 कत्थनम्, कत्थनम्, चिकत्थिषणम्, चाकत्थनम्
कत्थित्वा, कत्थयित्वा, चिकत्थिषित्वा, चाकत्थित्वा
विकत्थ्य, विकत्थ्य, प्रचिकत्थिष्य, प्रचाकत्थ्य
कत्थम् कत्थित्वा कत्थम् कत्थयित्वा चिकत्थिषम् चिकत्थिषित्वा चाकत्थम्
चाकत्थित्वा
8
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(१६०)
02
=>
(१-भ्वादिः-३७। अक। सेट्। आत्म।)
03
=>
[[१। ‘संयोगान्तस्य लोपः’ (८-२-२३) इति थकारस्य लोपः।]]
04
=>
[[२। ‘वौ कषलषकत्थस्रम्भः’ (३-२-१४३) इति ताच्छीलिको घिनुण्।]]
05
=>
[[आ। ‘विकत्थी याचते प्रत्तमविस्रम्भी मुहुर्जलम्।’ भ। का ७-११।]]
06
=>
[[३। ‘अनुदात्तेतश्च हलादेः’ (३-२-१४९) इति युच् ताच्छीलिकः। ‘वाऽसरूपोऽस्त्रियाम्’ (३-१-९४) इत्यनेन कदाचित् युजपि।]]
07
=>
[[B। ‘स वेथते स्माखिलवेथितं विधिं प्रश्रन्थितग्रन्थनधीरकत्थनः। अतेन्मुरारिर्मम चिन्मयोऽन्तिके च्योतन् दिशः प्रश्च्युतितैः स्मितामृतैः।।’ धा। का। १-६।]]
08
=>
[पृष्ठम्०१५५+ २७]