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कण्टकारिका (kaNTakArikA)

 
शब्दसागरः
English
कण्टकारिका
f.
(-का) A sort of prickly nightshade, (Solanum jacquini.)
E.
कण्टक a thorn, to go, अण् affix, कन् added with the feminine
termination
also कण्टकारी.
Yates
English
कण्टका_रिका (का) 1.
f.
A sort of prick-
ly night-shade.
Spoken Sanskrit
English
कण्टकारिका - kaNTakArikA -
f.
- medicinal nightshade [ Solanum Jacquini - Bot. ]
Wilson
English
कण्टकारिका
f.
(-का) A sort of prickly nightshade, (Solanum jacquini.)
E.
कण्टक a thorn, to go, अण् affix, कन् added with the
feminine termination
also कण्टकारी.
Apte
English
कण्टकारिका [kaṇṭakārikā], Solanum Jacquini
also the fruit of this tree.
Apte 1890
English
कंटकारिका Solanum Jacquini
also the fruit of this tree.
Monier Williams Cologne
English
कण्ट—कारिका
f.
Solanum Jacquini,
Suśr.
Monier Williams 1872
English
कण्टकारिका, f. Solanum Jacquini
also the fruit
of this plant.
Shabdartha Kaustubha
Kannada
कण्टकारिका
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಹೆಗ್ಗುಳ್ಳದ ಗಿಡ
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
क्षुद्रा
स्त्री
क्षुद्रा, वेश्या, नटी, मधुमक्षिका, कण्टकारिका
क्षुद्रा वेश्या नटी क्षुद्रा क्षुद्रा स्यान्मधुमक्षिका
असहिष्णुर्नरः क्षुद्रः क्षुद्रा स्यात् कण्टकारिका ११
verse 1.1.1.11
page 0001
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
व्याघ्री निर्दिग्धिका कण्टकारिका स्यादथामृता
वत्सादनी गुडूची विशाला त्विन्द्रवारुणी ११५७
-wordlist-
व्याघ्री (स्त्री), निर्दिग्धिका (स्त्री), कण्टकारिका (स्त्री), अमृता (स्त्री), वत्सादनी (स्त्री), गुडूची (स्त्री), विशाला (स्त्री), इन्द्रवारुणी (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
निदिग्धिका
निदिग्धिका, कण्टकारिका, व्याघ्री
शतमूलिका त्वभीरुर्निदिग्धिका कण्टकारिका व्याघ्री ६१९
verse 2.1.1.619
page 0070
अमरकोशः
Sanskrit
Word: कण्टकारिका
Root: कण्टकारिका
Gender: स्त्री
Number: all
Meaning(s):
medicinal nightshade [Solanum Jacquini - Bot.]
Shloka(s):
2|4|93|2 निदिग्धिका स्पृशी व्याघ्री बृहती कण्टकारिका॥ (वनौषधिवर्गः)
2|4|94|1 प्रचोदनी कुली क्षुद्रा दुःस्पर्शा राष्ट्रिकेत्यपि। (वनौषधिवर्गः)
Synonym(s):
2|4|93|2 निदिग्धिका (निदिग्धिका) (स्त्री)
2|4|93|2 स्पृशी (स्पृशी) (स्त्री) prickly nightshade, medicinal nightshade [Solanum Jacquini - Bot.]
2|4|93|2 व्याघ्री (व्याघ्री) (स्त्री) tigress, medicinal nightshade [Solanum Jacquini - Bot.]
2|4|93|2 बृहती (बृहती) (स्त्री) speech, mantle, wrapper, reservoir, heaven and earth, place containing water, lute of nArada or vizvA-vasu, symbolical expression for the number 36, particular common eggplant [Solanum - Bot.], part of the body between the breast and backbone
2|4|93|2 कण्टकारिका (कण्टकारिका) (स्त्री) medicinal nightshade [Solanum Jacquini - Bot.]
2|4|94|1 प्रचोदनी (प्रचोदनी) (स्त्री) medicinal nightshade [Solanum Jacquini - Bot.]
2|4|94|1 कुली (कुली) (स्त्री) wife's elder sister, medicinal nightshade or common eggplant [Solanum Jacquini or Solanum longum - Bot.]
2|4|94|1 क्षुद्रा (क्षुद्रा) (स्त्री)
2|4|94|1 दुःस्पर्शा (दुःस्पर्शा) (स्त्री)
2|4|94|1 राष्ट्रिका (राष्ट्रिका) (स्त्री)
Related word(s):
जातिः ओषधिः
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
कण्टकारिका,
स्त्री,
(कण्टकान् इयर्त्ति ऋच्छति वाकण्टक + + कर्त्तरि + ण्वुल् स्त्रियां टाप्इत्वं यद्वा कण्टकं ऋच्छति + कर्म्मण्यण्ततः कन् ततः प्राग्वत् तत्फले तु अणि कृतेहरीतक्यादित्वात् लुक् ।) स्वनामख्यातक्षुद्रवृक्षः ।तत्पर्य्यायः निदिग्धिका स्पृशो व्याघ्रो ४वृहती प्रचोदनी कुली क्षुद्रा दुष्पर्शा९ राष्ट्रिका १० इत्यमरः
अनाक्रान्ता ११भण्टाकी १२ सिंही १३ धावनिका १४ इतिरत्नमाला
कण्टकारी १५ कण्टकिनी १६ दुष्प-धर्षिणी १७ निदिग्धा १८ धावनी १९ क्षुद्र-कण्टिका २० बहुकण्टा २१ क्षुद्रफला २२ कण्टा-लिका २३ चित्रफला २४ अस्या गुणाः कटु-त्वम् उष्णत्वम् दीपनत्वम् श्वास-काश-प्रति-श्याय-दोष-कफ-वात-ज्वर-नाशित्वञ्च इति राज-निर्घण्टः
तृष्णानाशित्वम् इति राजवल्लभः
तस्याः फलगुणाः पित्तकफकण्डूकुष्ठकृमिनाशि-त्वम् लधुत्वम् उष्णत्वम् कटुत्वम् तिक्तत्वञ्च ।इति राजनिर्घण्टराजवल्लभौ
(“मुस्तामृतामलक्यश्च नागरं कण्टकारिका ।कणाचूर्णान्वितः क्वाथस्तथा मधुसमन्वितः ।एकाहिकं वा वेलाद्यं ज्वरजातं व्यपोहति”
इति हारीतः
*
अस्या विशेषश्च कण्टकारी-शब्दे ज्ञातव्यः
)
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
कण्टकारिका स्त्री कण्टकान् ऋच्छति कण्टक + ऋ--ण्वुल् ।१ स्वनामख्याते वृक्षे फलेऽणि हरितक्यादित्वात् लुक् तत्फलेऽपि स्त्री “कण्ठकारी तु दुःस्पर्शा क्षुद्रा व्याध्रीनिदिग्धिका कण्ठलिका कण्ठकिनी धावनी वृहतीतथा उभे वृहत्यौ यत आह शाश्वतः“क्षुद्रायां क्षुद्रभण्टाक्यां वृहतीति निगद्यते” श्वेताक्षुद्रा चन्द्रहासा लक्ष्मणा क्षेत्रदूतिका गर्भदा चन्द्रभाचन्द्रा चन्द्रपुष्पा प्रियङ्करी कण्टकारी सरा तिक्ता कटुकादीपनी लघुः रूक्षोष्णा पाचनी कासश्वासजृरकफा-निलान् निहन्ति पीनसं पार्श्वपीडार्छामहृदामयान् ।तयोः फलं कटु रसे पाके कटुकं भवेत् शुक्रस्यरेचनं भेदि तिक्तं पित्ताग्निकृल्लघु हन्यात् कफमरुत्कण्डूकासमेदकृमिज्वरान् तद्वत्प्रोक्ता सिता क्षुद्रा तिशे-षाद् गर्भकारिणी” भावप्र० पर्य्यायभेदगुणा उक्ताः क-ण्टकारीफलं तिक्तं कटुकं दीपनं लघु रूक्षोष्णंश्वासकासध्नं ज्वरानिलकक्रापहम्” भावप्र०