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इला (ilA)

 
शब्दसागरः
English
इला
f.
(-ला)
1. The wife of BUDDHA, and daughter of IKSHWAKU.
2.
The earth.
3. A cow.
4. Speech.
E.
इल् to send, and टाप् affixes
also इडा.
Capeller Eng
English
इला
f.
= इड् + speech, earth, cow
N.
of a goddess (personif.
of worship and sacrifice), a daughter of Manu or Dakṣa,
E.
of Durgā.
Yates
English
इला (ला)
f.
The wife of Buddha
earth
cow
speech.
*इला (ला) 1.
f.
Idem.
Spoken Sanskrit
English
इला - ilA -
f.
- iDA
इडाप्राशित्र - iDAprAzitra -
n.
- iDA and prAzitra
इडा - iDA -
f.
- goddess iDA or iLA
पश्विडा - pazviDA -
f.
- iDA part at the animal sacrifice
षडिड - SaDiDa -
adj.
- containing six times the word iDA
पुरोडाशाडा - puroDAzADA -
f.
- iDA portion of the sacrificial cake
Wilson
English
इला
f.
(-ला)
1 The wife of BUDDHA, and daughter of IKṢVĀKU.
2 The earth.
3 A cow.
4 Speech.
E.
इल to send, and टाप् affixes
also इडा.
Monier Williams Cologne
English
इ॑ला
f.
(closely connected with इ॑डा and इ॑रा, qq.v.) flow
speech
the earth,
&c.
See इडा.
Monier Williams 1872
English
इला इला, f. flow, speech, the earth, &c.
see
इडा.
—इला-गोल, अम्, n. the earth, the globe.
—इला-
तल, अम्, n. the fourth place in the circle of the
zodiac
the surface of the earth.
—इला-दध, अस्,
m., N. of a certain sacrifice.
—इलान्-द, अम्, n.
‘granting refreshment or food, N. of a ceremony or
of a verse
N. of a Sāman.
—इला-वृत, अस्, m., N. of
a son of Agnīdhra, who received the Varṣa इला-वृत
as his kingdom
(अम्), n. one of the nine Varṣas or
divisions of the known world, comprehending the
highest and most central part of the old continent.
Apte Hindi
Hindi
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
पृथ्वी
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
भाषण
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
आहार
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
गाय
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
"एक देवी का नाम, मनु की पुत्री"
इला
स्त्री*
- "इल्-अच्, टाप् "
बुध की पत्नी तथा पुरूरवा की माता
इला
स्त्री*
- इल्-क-टाप्
पृथ्वी
इला
स्त्री*
- इल्-क-टाप्
गाय
इला
स्त्री*
- इल्-क-टाप्
वक्तृता
इला
स्त्री*
- "इल्+अच्, लस्य इत्वं वा"
सामगान में प्रयुक्त स्तोभ नामक संगीत
Shabdartha Kaustubha
Kannada
इला
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಗೋವು /ಹಸು
इला
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ವಾಕ್ಕು /ಮಾತು
इला
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಭೂಮಿ
इला
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಬುಧನ ಪತ್ನಿ
निष्पत्तिः - > इल (उत्क्षेपे) - "कः" (३-१-१३५)
विस्तारः - > "इला कलत्रे सौम्यस्य धरित्र्यां गवि वाचि च" - मेदि०
L R Vaidya
English
iqA(lA) {% f. %} 1. The earth
2. speech
3. a cow
4. name of the wife of Budha.
भूतसङ्ख्या
Sanskrit
१, अंशुमान्, अचला, अब्ज, अमृतांशु, अवनि, आदि, आस्य, इन्दु, इला, उडुपति, उर्वरा, उर्वी, ऋक्षेश, एक, एणधर, औषधीश, क, कलाधर, कलि, कु, कुमुदाकरप्रिय, क्षपाकर, क्षमा, क्षिति, क्षोणि, क्षोणी, क्षमा, गो, गोत्र, गोत्रा, ग्लौ, चन्द्र, चन्द्रमस्, जगती, जैवातृक, ज्या, तनु, दाक्षायणीप्राणेश, धरणी, धरा, धरित्री, नायक, निशाकर, निशेश, पितामह, पृथिवी, पृथ्वी, प्रालेयांशु, ब्रह्मा, भुवन्यु, भू, भूमि, मही, मुख, मृगलाञ्छन, मृगाङ्क, मेदिनी, रजनीकर, रजनीश, रात्रिप, रात्रीश, रुग्ण, रूप, लपन, वक्त्र, वदन, वसुधा, वसुन्धरा, वाक्, विधु, विरञ्चि, विश्वम्भरा, शशधर, शशभृत्, शशलाञ्छन, शशाङ्क, शशि, शशी, शीतकर, शीतकिरण, शीतद्युति, शीतमयूख, शीतरश्मि, शीतांशु, शुभ्रभानु, श्वेत, श्वेतांशु, सितरश्मि, सुधांशु, सोम, स्थिरा, हरिणधृत्, हरिणाङ्क, हिमकर, हिमगु, हिमरश्मि, हिमांशु
E Bharati Sampat
Sanskrit
(स्त्री) इल(उत्क्षेपे)+कः। ‘इगुपधज्ञाप्रीकिरः कः’ ३.१.१३५। १.गौः। २.वाक् ३.भूमिः। ४.बुधपत्नी ‘इला कलत्रे सौम्यस्य धरित्र्यां गवि वाचि च’ मेदिनी०।
Bopp
Latin
इला f. (r. इल् s. आ)
1) vacca.
2) terra.
3) sermo, lo-
quela. AM. (गोभूवाचः), cf. इडा.
4) in Vêdis cibus.
Ros. Sp. p. 24. 3.
Anekartha-Dvani-Manjari
Sanskrit
इला
स्त्री
इला, भूमि, गो
इला भूमिर्मता गौश्च संज्ञा संविच्च नाम
verse 3.1.1.8
page 0014
Indian Epigraphical Glossary
English
ilā (IE 7-1-2), ‘one’.
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
इला
noun
वैवस्वतमनुकन्या।
"पुरूरवाः इलायाः पुत्रः आसीत्।"
Synonyms:
पृथिवी, भूः, भूमिः, अचला, अनन्ता, रसा, विश्वम्भरा, स्थिरा, धरा, धरित्री, धरणी, क्षौणी, ज्या, काश्यपी, क्षितिः, सर्वसहा, वसुमती, वसुधा, उर्वी, वसुन्धरा, गोत्रा, कुः, पृथ्वी, क्ष्मा, अवनिः, मेदिनी, मही, धरणी, क्षोणिः, क्षौणिः, क्षमा, अवनी, महिः, रत्नगर्भा, सागराम्बरा, अब्धिमेखला, भूतधात्री, रत्नावती, देहिनी, पारा, विपुला, मध्यमलोकवर्त्मा, धारणी, गन्धवती, महाकान्ता, खण्डनी, गिरिकर्णिका, धारयित्री, धात्री, अचलकीला, गौः, अब्धिद्वीपा, इडा, इडिका, इला, इलिका, इरा, आदिमा, ईला, वरा, आद्या, जगती, पृथुः, भुवनमाता, निश्चला, श्यामा
noun
मर्त्याद्यधिष्ठानभूता।
"पृथिवी पञ्चमम् भूतम्"
Synonyms:
गौः, माहेषी, सौरभेयी, उस्रा, माता, शृङ्गिणी, अर्जुनी, अघ्न्या, रोहिणी, माहेन्द्री, इज्या, धेनुः, अघ्ना, दोग्ध्री, भद्रा, भूगिमही, अनडुही, कल्याणी, पानवी, गौरी, सुरभिः, मबा, निलिनाचिः, सुरभी, अनड्वाही, अधमा, बहुला, मही, सरस्वती, उस्रिया, अही, अदितिः, इला, जगती, शर्करी
noun
ग्राम्यपशुविशेषः, यः सास्नालाङ्गुलककुदखुरविषाणी तथा तस्याः दुग्धं मनुष्याय पुष्टीकारकम् इति मन्यन्ते।
"हिन्दुधर्मीयाणां कृते गौः अवध्या अस्ति।"
Synonyms:
सरस्वती, प्रज्ञा, भारती, वागीश्वरी, वाग्देवी, वीणावादिनी, शारदा, हंसवाहिनी, गिरा, इला, ब्राह्मी, इरा, ज्ञानदा, गीर्देवी, ईश्वरी, वाचा, वचसामीशा, वर्णमातृका, गौः, श्रीः, वाक्येश्वरी, अन्त्यसन्ध्येश्वरी, सायंसन्ध्यादेवता, गौरी
noun
विद्यायाः वाण्यः अधिष्ठात्री देवता।
"सरस्वत्याः वाहनं हंसः अस्ति।"
Synonyms:
पार्वती, अम्बा, उमा, गिरिजा, गौरी, भगवती, भवानी, मङ्गला, महागौरी, महादेवी, रुद्राणी, शिवा, शैलजा, हिमालयजा, अम्बिका, अचलकन्या, अचलजा, शैलसुता, हिमजा, शैलेयी, अपर्णा, शैलकुमारी, शैलकन्या, जगद्जननी, त्रिभुवनसुन्दरी, सुनन्दा, भवभामिनी, भववामा, जगदीश्वरी, भव्या, पञ्चमुखी, पर्वतजा, वृषाकपायी, शम्भुकान्ता, नन्दा, जया, नन्दिनी, शङ्करा, शताक्षी, नित्या, मृड़ानी, हेमसुता, अद्रितनया, हैमवती, आर्या, इला, वारुणी
noun
शिवस्य पत्नी।
"पार्वती गणेशस्य माता अस्ति।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
भूर्भूमिः पृथिवी पृथ्वी वसुधोर्वी वसुंधरा
धात्री धरित्री धरणी विश्वा विश्वंभरा धरा ९३५
क्षितिः क्षोणी क्षमानन्ता ज्या कुर्वसुमती मही
गौर्गोत्रा भूतधात्री क्ष्मा गन्धमाताचलावनिः ९३६
सर्वंसहा रत्नगर्भा जगती मेदिनी रसा
काश्यपी पर्वताधारा स्थिरेला रत्नबीजसूः ९३७
विपुला सागराच्चाग्रे स्युर्नेमीमेखलाम्बराः
-wordlist-
भू (स्त्री), भूमि (स्त्री), पृथिवी (स्त्री), पृथ्वी (स्त्री), वसुधा (स्त्री), उर्वी (स्त्री), वसुन्धरा (स्त्री), धात्री (स्त्री), धरित्री (स्त्री), धरणी (स्त्री), विश्वा (स्त्री), विश्वम्भरा (स्त्री), धरा (स्त्री), क्षिति (स्त्री), क्षोणी (स्त्री), क्षमा (स्त्री), अनन्ता (स्त्री), ज्या (स्त्री), कु (स्त्री), वसुमती (स्त्री), मही (स्त्री), गो (स्त्री), गोत्रा (स्त्री), भूतधात्री (स्त्री), क्ष्मा (स्त्री), गन्धमाता (स्त्री), अचला (स्त्री), अवनि (स्त्री), सर्वंसहा (स्त्री), रत्नगर्भा (स्त्री), जगती (स्त्री), मेदिनी (स्त्री), रसा (स्त्री), काश्यपी (स्त्री), पर्वताधारा (स्त्री), स्थिरा (स्त्री), इला (स्त्री), रत्नसू (स्त्री), बीजसू (स्त्री), विपुला (स्त्री), सागरनेमी (स्त्री), सागरमेखला (स्त्री), सागराम्बरा (स्त्री)
अभिधानरत्नमाला
Sanskrit
भू
भू, भूमि, वसुधा, अवनि, वसुमती, धात्री, धरित्री, धरा, गो, गोत्रा, जगती, रसा, क्षिति, इला, क्षोणी, क्षमा, क्ष्मा, अचला, कु, पृथ्वी, पृथिवी, स्थिरा, धरणी, विश्वम्भरा, मेदिनी, ज्या, अनन्ता, विपुला, समुद्रवसना, सर्वंसहा, ऊर्वी, मही, काश्यपी, भूतधात्री, रत्नगर्भा, वसुन्धरा, धराधारा
भूर्भूमिर्वसुधावनिर्वसुमती धात्री धरित्री धरा,
गौर्गोत्रा जगती रसा क्षितिरिला क्षोणी क्षमा क्ष्माचला
कुः पृथ्वी पृथिवी स्थिरा धरणी विश्वम्भरा मेदिनी,
ज्यानन्ता विपुला समुद्रवसना सर्वंसहोर्वी मही १५६
काश्यपी भूतधात्री रत्नगर्भा वसुन्धरा
धराधारा विज्ञेया तद्विशेषान्निबोधत १५७
verse 2.1.1.156
page 0020
इला
इला, वाक्, अघ्न्य
स्थूणास्तब्धत्वयोः स्तम्भ इला वागघ्न्ययोरपि ८३४
verse 5.1.1.834
page 0096
नाममाला
Sanskrit
भूमि, भू, पृथिवी, पृथ्वी, गह्वरी, मेदिनी, मही, धरा, वसुमती, धात्री, क्षमा, विश्वम्भरा, अवनि, वसुधा, धरणी, क्षोणी, क्ष्मा, धरित्री, क्षिति, कुम्भिनी, इला, उर्वरा, उर्वी, जगती, गो, वसुन्धरा
भूमिर्भूः पृथिवी पृथ्वी गह्वरी मेदिनी मही
धरा वसुमती धात्री क्षमा विश्वम्भराऽवनिः
वसुधा धरणी क्षोणी क्ष्मा धरित्री क्षितिश्च कुः
कुम्भिनीलोर्वरा चोर्वी जगती गौर्वसुन्धरा
verse 0.1.1.5
page 0004
Mahabharata
English
Ilā, the daughter of Manu Vaivasvata and the mother of Purūravas.--§ 139 (Manu Vaivasvata): I, 75, 3141 (the eighth child of Manu Vaivasvata).--§ 140 (Purūravas): I, 75, 3143 (at one time the father and the mother of Purūravas).--§ 156 (Pūruvaṃś.): I, 95, 3760 (daughter of Manu and mother of Purūravas).--§ 748b (Tārakavadhop.): XIII, 86, 4209 (presented Skanda with a great many of flowers and fruits).-§ 768b (Kṛshṇa Vāsudeva): XIII, 147, 6831 (Manoś ca vaṃśaja Ilā Sudyumnaś ca bhavishyati, wife of Budha and mother of Purūravas). Cf. Sudyumna.
पुराणम्
English
इला / ILĀ I. Daughter of vaivasvata manu.1) Genealogy. Descended from viṣṇu in this order:-brahmā--marīci--kaśyapa--vaivasvata manu--ilā. vaivasvata manu was the son of kaśyapa by his wife aditi, and ilā the daughter of vaivasvata manu by his wife, śraddhā. ikṣvāku, the ancestral father of the solar dynasty of Kings was brother of ilā.2) vaivasvata manu and śraddhā had, for a long time no children. manu got performed once by agastya a yajña to propitiate the mitrāvaruṇas so that a son might be born to him (manu). Soon a daughter was born to him and she was called ilā. Then manu asked Vasiṣtha why a daughter was born to him instead of a son for whom the yajña was performed by agastya. At once, Vasiṣtha by his will-power turned the girl ilā into a boy, and the boy was named sudyumna. (bhāgavata).3) sudyumna again turned into woman. Once śunaka and some other sages went to the great forest kumāra Vana near kailāsa to salute Sri Parameśvara ignorant of the fact that just then pārvatī and Parmeśvara were enjoying themselves. The sudden appearance of śunaka and others was not relished by the divine couple, who were then naked. They therefore, pronounced the curse that anybody who entered the forest in future would be turned into a woman. (bhāgavata).
sudyumna, now a young man, went for hunting one day. sudyumna who was ignorant of this curse entered this forest with his friends while hunting. At once all of them were transformed into women. Grief-stricken, they stayed in the forest for some days, and then started for the palace. sudyumna bearing the name ilā walked at the head of the party as a beautiful woman. On the way budha met ilā, they fell in love with each other and got married. A son, purūravas was born to budha by ilā. (bhāgavata). 4) Transformation again
ilā expressed to vasiṣṭha, her grief at having been turned into a woman, the sage requested Śrī Parameśvara to restore her to her former form as a man. śiva said that ilā would be a man and a woman every alternate month, throughout life. During the month when she was a man he would engage himself in matters of Government, and the next month, when a woman, she would stay in the inner apartments in the palace. brahmāṇḍa purāṇa, Chapter 32 says that ikṣvāku, brother of purūravas ruled the state till the latter became a major. As soon as purūravas attained majority sudyumna handed over to him the reins of Government and retired to the forest for tapas, and during this period he was taught the Navākṣara mantra by sage nārada. sudyumna adored devī with this mantra. She appeared to him and blessed him with the state of salvation. (bhāgavata).
purūravas married urvaśī, and ruled the country. (bhāgavata, 9th skandha
devī bhāgavata, First skandha
M.B. Ādi Parva, Chapter 75 and Anuśāsana Parva, Chapter 147, Verse 26).
इला / ILĀ II. A river. At the birth of subrahmaṇya this river paid homage to him with fruits and roots. (M.B. anuśāsana parva, Chapter 86, Verse 24). dharmaputra along with the brahmins bathed in this river. (M.B. Vana Parva, Chapter 156, Verse 8).
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
इला,
स्त्री,
(इलति विष्णुवरात् पुंस्त्वं प्राप्नोति इति ।इल + + टाप् ।) वैवस्वतमनुकन्या सा चविष्णुवरात् पुंस्त्वं प्राप्य सुद्युम्ननाम्ना ख्याता पश्चात्शङ्करशप्तकुमारवनं प्रविश्य पुनः स्त्रीत्वं गता ।बुधस्तां भार्य्यात्वेन स्वीकृत्य पुरूरवसं जनयामास ।ततस्तस्याः पुरोहितो वशिष्ठः शङ्करमाराध्य तस्यैमासं स्त्रीत्वं मासं पुंस्त्वं दत्तवान् इति श्रीभाग-वतं
कर्द्दमप्रजापतिपुत्त्र इलः कार्त्तिकेयजन्मदेशंप्रविश्य स्त्री भूत्वा इलानाम्ना ख्यातः ततः पार्ब्बती-माराध्य मासं स्त्रीत्वं मासं पुंस्त्वञ्च प्राप्तवान् ।इति रामायणं
पृथिवी गौः वाक्यं इतिमेदिनी
वाचस्पत्यम्
Sanskrit
इडा(ला) स्त्री इल--अच् वा लस्य डत्वम् गवि, वाचि, भूमौ “प्रबुध्यते नूनमिडातलस्थः भा० व० २३५ अ० ।“इला पिन्वते विश्वदानीम्” ऋ० ४, ५००८, “इलाभूमिः” भा० इल + गतौ करणे घञर्थे देहस्थे४ नाडीभेदे “इडा पिङ्गला चैव सुथुस्णा सरस्वतीअलम्बूषा कुहूश्चैवं शङ्खिनी चित्रिणी तथा विश्वो-दरी विश्वमुखी व्याप्त्याह्येताश्चतुर्दश” इति तन्त्रोक्तासु प्रधा-नासु चतुर्दशसु नाडीषुतिस्रः प्रधानाः तथा हि “शिराःशतानि सप्तैव” या० “शिराः नाभिसंबद्धाश्चत्वारिंशत्वातपित्तश्लेष्मवाहिन्यः सकलकलेवरव्यापिन्योनानाशाखाःसत्यः सप्त शतानि भवन्तीति” मिता० “सप्त शिराशतानि, सुश्रु० तेन देहमध्ये सप्त शतानि नाड्यः तन्मध्ये एता-श्चतुर्दश प्रधानतयोक्ताः तासु मध्येऽपि तिस्रः प्रधानाःदेहस्थनाडीरुपक्रम्य शारदा० “नाड्यस्तत्र समुद्भूतामुख्या-स्तिस्रः समीरिताः इडा वामे स्थिता नाडी पिङ्गलादक्षिणे मता तयोर्मध्यगता नाडी सुषुस्णा समा-हिता पादाङ्गुष्ठद्वयं याता शिखाभ्यां शिरसा पुनः ।ब्रह्मस्थानं समापन्ना सोमसूर्य्याग्निरूपिणी तस्या मध्यगतानाडी चित्राख्या योगिवल्लभा ब्रह्मरन्धं विदुस्तत्र पद्म-सूत्रनिभं परम् इडायां सञ्चरेच्चन्द्रः पिङ्गलायां दिवा-करः ज्ञातौ योगनिदानज्ञैः सुषुस्णायां तु तावुभौ” तत्-स्थानमुक्त्वा कार्य्यमाह “इडयाकर्षयेद्वायु बाह्यं षोडशमा-त्रया धारयेत्पूरित योगी चतुःषष्ट्या तु मात्रया सुषु-सणामध्यगं सम्यक् द्वात्रिंशन्मात्रया शनैः नाड्या पिङ्गलयाचैनं रेचयेद्योगवित्तमः प्रणायाममिमं प्राहुर्योगशास्त्र-विशारदाः” २५ पटले “पिङ्गलायां स्थिता ह्रस्वा इडायांसङ्गताः परे (दीर्घाः) सुषुष्णामध्यगा ज्ञेयाश्चत्वारोये नपुंसका” शार० प० दीर्घादिरयमित्येके हवि-रन्ने “यजमानपञ्चमा इडां भक्षयन्ति” श्रुतिः डस्यलत्वे प्यत्रैव “इडां नोमित्रावरुणोत वृष्टिम्” ऋ० ७, ६४, २“इडामन्नम्” भा० “घृतैर्गव्यूतिमुक्षतमिलाभिः” ऋ०७, ६४, “इडाभिरन्नैः” भा० देवीभेदे “श्रुतिः प्रीति-रिडा कान्तिः, शान्तिः पुष्टिःक्रिया तथा शिष्टाश्च देव्यः”इत्युपक्रम्य “उपतस्थुर्महासत्त्वं बलिमिन्द्र महारथम्”हरिवं० २५६ अ० “इडा देवी भारती विश्वतूर्त्तिः” ऋ०५, २, “अभि इडायूथस्य माता” ऋ० ५, ४१, १९ ।“इलागोरूपधरा मनोः पुत्री माध्यमिकी वाक् वेति”भा० बुधस्य जायायां पुरूरवसो मातार पश्चात्मनु-पुत्रत्वे सुद्युम्नतया ख्यातायां मित्रावरुणयोरंशजातायांकन्यायाञ्च तत्कथा हरिवं० “अकरोत् पुत्त्रकामस्तुमनुरिष्टिं प्रजापतिः मित्रावरुणयोस्तात पूर्व्वमेवविशाम्पते! अनुत्पन्नेषु नवसु पुत्रेष्वेषु तु भारत! ।तस्यान्तु वर्त्तमानायामिष्ट्यां भरतसत्तम! मित्रावरुण-योरशे मनुराहुतिमाजुहोत् आहुत्यां हूयमानायांदेवगन्धर्वमानवाः तुष्टिञ्च परमां जग्मुर्मुनयश्च तपो-धनाः अहोऽस्य तपसो वीर्य्यमहो श्रुतमहोऽद्भुतम् तत्रदिव्याम्बरधरादिव्याभरणभूषिता दिव्यसंहनना चैवइडा जज्ञे इति श्रुतिः तामिलेत्येव होवाच मनुर्द्दण्ड-धरस्तदा अनुगच्छस्वमां भद्रे तमिला प्रत्युवाच धर्म-युक्तमिदं वाक्यं पुत्त्रकामं प्रजापतिम् इडोवाच ।मित्रावरुणयोरंशे जाताऽस्मि वदतांवर! तयोः सकाशंयास्यामि मां धर्मो हतोऽबधीत् सैवमुक्त्वा मनुंदेव मित्रावरुणयोरिला गत्वाऽन्तिकं वरारोहा प्राञ्जलि-र्वाक्यमव्रवीत् अंशेऽस्मिन् युवयोर्जाता देवौ! किंकरवाणि वाम् मनुना चाहमुक्ता वै अनुगच्छस्वमामिति तां तथा वादिनीं साध्वीमिलां धर्मपरायणाम् मित्रश्च वरुणश्चोभावूचतुर्यन्निबोध तत् अनेनतव धर्म्मेण प्रश्रयेण दमेन सत्येन चैवं सुश्रोणि प्रीतौस्वो वरवर्णिनि! आवयोस्त्वं महाभागे ख्यातिं कन्येतियास्यसि मनोर्वंशकरः पुत्त्रस्त्वमेव भविष्यसि सुद्युम्नइति विख्यातस्त्रिषु लोकेषु शोभने जगत्प्रियो धर्म्म-शोलो मनीर्वंशविवर्द्धनः निवृत्ता सा तु तच्छ्रुत्वा ग-च्छन्ती पितुरन्तिकम् बुधेनान्तरमासाद्य मैथुनायोपम-न्त्रिता सोमपुत्त्राद्बुधाद्राजस्तस्यां जज्ञे पुरूरवाः ।जनयित्वा सुत सा तमिला सुद्युम्नतां गता” ।८ दुर्गायाञ्च “आचार्य्यां मदिरां चण्डींमिलां मलयवासि-नीम्” हरिवं० १७८ अ० दुर्गास्तवः इडैव स्वार्थेकन् तत्रार्थे
इला स्त्री इल--क भूमौ, गवि, वाचि, जम्बुद्वीपस्य-नववर्षमध्ये वर्षभेदे तत्सीमा चेलावृतशब्दार्थे वक्ष्यते ।५ वैवस्वतमनुकन्यायां बुधपत्न्याम् सा हि विष्णुवरात्पुंस्त्वमासाद्य पुनः शङ्करशापात् स्त्रीत्वं गता बुधस्तु तामु-पगर्म्य पुरूरवसमुत्पादयामासेति पुराणे प्रसिद्धम् तच्चइडाशब्दे उक्तप्रायम् स्वप्नशीले
त्रि०
इ(ए)ला कण्ड्वा० यक् प० अक० सेट् इ(ए)लायति
कृदन्तरूपमाला
Sanskrit
1 {@“इल स्वप्नक्षेपणयोः”@} 2 ‘--स्वप्नप्रेरणयोः’ इति धातुकाव्ये पाठः।
एलकः-लिका, एलकः-लिका, 3 एलिलिषकः-षिका
एलिता-त्री, एलयिता-त्री, एलिलिषिता-त्री
4 इलन् 5 6 -न्ती-ती, एलयन्-न्ती, एलिलिषन्-न्ती
एलिष्यन्-न्ती-ती, एलयिष्यन्-न्ती-ती, एलिलिषिषिष्यन्-न्ती-ती
-- एलयमानः, एलयिष्यमाणः
-- इल्-इलौ-इलः
-- -- इलितम्-तः-तवान्, एलितम्-तः, एलिलिषितम्-तः-तवान्
7 इलः, इला, एलः, एलिलिषुः, एलिलयिषुः
एलितव्यम्, एलयितव्यम्, एलिलिषितव्यम्
8 एलनीयम्, एलनीयम्, एलिलिषणीयम्
एल्यम्, एल्यम्, एलिलिष्यम्
ईषदेलः, दुरेलः, स्वेलः
-- -- इल्यमानः, एल्यमानः, एलिलिष्यमाणः
एलः, एलः, एलिलिषः
एलितुम्, एलयितुम्, एलिलिषितुम्
इल्तिः- 9 इलितिः, एलना, एलिलिषा, एलिलयिषा
एलनम्, एलनम्, एलिलिषणम्
10 एलित्वा, एलयित्वा, एलिलिषित्वा
समिल्य, समेल्य, समेलिलिष्य
एलम् २, एलित्वा २, एलम् २, एलयित्वा २, एलिलिषम्
एलिलिषित्वा २।
प्रासङ्गिक्यः
01
=>
(७१)
02
=>
(६-तुदादिः-१३५७-सक। सेट्। पर।)
03
=>
[[३। उपधाकार्यस्य द्वित्वात् प्रबलत्वात् पूर्व गुणे द्वितीयस्यैकाचः द्वित्वम्।]]
04
=>
[[४। ‘तुदादिभ्यः शः’ (३-१-७७) इति शः। ‘सार्वधातुकमपित्’ (१-२-४) इति शस्य ङिद्वद्भावाल्लघूपधगुणो न।]]
05
=>
[[आ। ‘चिलितपीतपटेन चलन् इलन् अविलितोरुकृपां परितो दृशम्।।’ धा। का। २-७८।]]
06
=>
[[५। ‘आच्छीनद्योर्नुम्’ (७-१-८०) इति नुम् विकल्पेन।]]
07
=>
[[६। ‘इगुपधज्ञाप्रीकिरः कः’ (३-१-१३५) इति कर्तरि कः। टाप् स्त्रियाम्। इला = भूमिः।]]
08
=>
[पृष्ठम्००७४+ २६]
09
=>
[[१। इलितिरित्यत्र ‘तितुत्रेष्वग्रहादीनां--’ (वा। ७-२-९) इति पर्युदासादिड् भवति।]]
10
=>
[[२। ‘न क्त्वा सेट्’ (१-२-१८) इति कित्त्वं न, तेन गुणः।]]
Burnouf
French
इला इला
f.
Vd. l'offrande sacrée.
Terre
terre de
l'enceinte sacrée, l'autel de terre.
Vache
la vache mystique, la
libation de soma.
Parole
la parole sainte, I'hymne.
Np.
f.
de
la fille de Manu.
C. इऌआ।
इलावृत
n.
(वृत्) le séjcur d'ilā, la terre
sainte, Vd.
Un des वर्षस् du Jambudvīpa.
Stchoupak
French
इला-
f.
= इडा-
fille d'un Manu.
°धर-
m.
montagne.
°सुता-
f.
Sītā.
इतावृत- nt.
n.
d'une division du monde
m.
fils d'Āgnīdhra.