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आत्मगुप्ता (AtmaguptA)

 
शब्दसागरः
English
आत्मगुप्ता
f.
(-प्ता) A plant, Cowach, (Carpopogon pruriens.)
E.
आत्मन् self,
गुप्त hidden
self-preserved.
Yates
English
आत्म-गुप्ता (प्ता) 1.
f.
A plant (Cowach).
Spoken Sanskrit
English
आत्मगुप्ता AtmaguptA
f.
velvet bean [ Mucuna Pruritus - Bot. ]
आत्मगुप्ता AtmaguptA
f.
cowach [ velvet bean, Mucuna Pruritus Hook ]
Wilson
English
आत्मगुप्ता
f.
(-प्ता) A plant, Cowach, (Carpopogon pruriens.)
E.
आत्मन् self, गुप्त hidden
self-preserved.
Monier Williams Cologne
English
आत्म—गुप्ता
f.
the plant Mucuna Pruritus Hook,
Suśr.
Shabdartha Kaustubha
Kannada
आत्मगुप्ता
पदविभागः - > स्त्रीलिङ्गः
कन्नडार्थः - > ಕಪಿತುರಚಿ ಗಿಡ
व्युत्पत्तिः - > आत्मना गुप्ता
E Bharati Sampat
Sanskrit
(स्त्रीवि) आत्मना गुप्ता ‘कर्तृकरणे कृताबहुलम्’ १.३२ इति समासः। काचन लताविशेषः। यस्याः स्पर्शनेन अतिकण्डूयनं भवति कण्डूरा आलकुशी इति भाषा ‘आत्मगुप्ता जडाव्यण्डा कण्डूरा प्रावृणायणी’ अमरः२.४.८६।
Wordnet
Sanskrit
Synonyms:
शतावरी, शतमूली, बहुसुता, अभीरुः, इन्दीवरी, वरी, ऋष्यप्रोक्ता, भीरुपत्री, नारायणी, अहेरुः, रङ्गिणी, शटी, द्वीपिशत्रुः, ऋष्यगता, शतपदी, पीवरी, धीवरी, वृष्या, दिव्या, दीपिका, दरकण्ठिका, सूक्ष्मपत्रा, सुपत्रा, बहुमूला, शताह्वया, खाटुरसा, शताह्वा, लघुपर्णिका, आत्मगुप्ता, जटा, मूला, शतवीर्या, महौषधी, मधुरा, शतमूला, केशिका, शतपत्रिका, विश्वस्था, वैणवी, पार्ष्णी, वासुदेवप्रियङ्करी, दुर्मन्या, तैलवल्ली, ऋष्यप्रोक्ता
noun
क्षुपकवत् वल्लीविशेषः।
"शतावर्याः मूलं बीजं औषधनिर्माणाय उपयुज्यते।"
Synonyms:
कण्डूरा, आत्मगुप्ता, जहा, अव्यण्डा, प्रावृषायणी, ऋष्यप्रोक्ता, शूकशिम्बिः, कपिकच्छुः, मर्कटी, अजहा, शूकशिम्बी, शूकशिम्बा, ऋषभः, स्वगुप्ता
noun
लताविशेषः यस्य बीजगुप्तिः शिम्बीसदृशा अस्ति।
"शुकशिम्बा बहु वर्धिता।"
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
कपिकच्छूरात्मगुप्ता धत्तूरः कनकाह्वयः
-wordlist-
कपिकच्छू (स्त्री), आत्मगुप्ता (स्त्री), धत्तूर (पुं), कनकाह्वय (पुं)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
आत्मगुप्ता,
स्त्री,
(आत्मना गुप्ता तृतीया तत्पुरुषः ।)लताविशेषः आलकुशी इति भाषा तत्पर्य्यायः ।मर्कटी कण्डुरा अध्यण्डा कच्छुरा ५जटा जडा शुकशिम्बा आमगुप्ता ९ऋषभी १० कपिकच्छुरा ११ इति रत्नमाला ।(“माषैः समानं फलमात्मगुप्तं” इति सुश्रुतः ।विशेषोऽस्याः कपिकच्छुराशब्दे द्रष्टव्यः ।)