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अहिबभयम् (ahibabhayam)

 
E Bharati Sampat
Sanskrit
(न) अहेः सर्पतुल्यस्वपक्षात् भयम् राज्ञां स्वपक्षोद्भवं भयम् ‘महीभुजामहिभयं स्वपक्षप्रभवं भयम्’ अमर. (२. अहेः सर्पात् भयम् सर्पात् जायमानं भयम्