| YouTube Channel

असिद्धः (asiddhaH)

 
Apte Hindi
Hindi
असिद्धः
पुं*
- -
"हेत्वाभास के पाँच मुख्य भागों में से एक, यह तीन प्रकार का है (1) आश्रयासिद्ध- जहाँ गुण के आश्रय सत्ता सिद्ध हो (2) स्वरुपासिद्ध- जहाँ निर्दिष्ट स्वरुप पक्ष में पाया जाय तथा (3) व्याप्यतासिद्ध- जहाँ सहवर्तिता की उक्त स्थिरता वास्तविक हो "
E Bharati Sampat
Sanskrit
(पुं) सिद्धः (सिद्धः निष्पन्नः पक्वश्च) १. अपक्वः २. अनिष्पन्नः ३. तार्किकमते पञ्चसु दुष्टहेतुषु अन्यतमः ‘अनेकान्तो विरुद्धश्चाप्रसिद्धः…’ - मिक्तावली ४. सिद्धिशून्यः ‘स्वयमसिद्धः कथं परां साधयेत्’ (न्यायः)