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अब्धिशयन (abdhizayana)

 
शब्दसागरः
English
अब्धिशयन
m.
(-नः) A name of VISHNU.
E.
अब्धि, and शयन sleeping
sleeping on the ocean at the periods of the destruction and renova-
tion of the world, having the serpent ANANTA for his couch.
Yates
English
अब्धि-शयन (नः) 1.
m.
Vishnu.
Wilson
English
अब्धिशयन
m.
(-नः) A name of VIṢṆU.
E.
अब्धि, and शयन sleeping
sleeping on the ocean at the periods of
the destruction and renovation of the world, having the serpent ANANTA for his
couch.
Monier Williams Cologne
English
अब्-धि—शयन
m.
‘sleeping on the ocean (at the periods of the destruction and renovation of the world)’,
N.
of Viṣṇu.
Goldstucker
English
अब्धिशयन Bahuvr. m. (-नः) A name of Viṣṇu
(lit. having
the ocean for his couch, i. e. sleeping on the ocean at the
periods of the destruction and renovation of the world).
E. अब्धि and शयन.
Apte Hindi
Hindi
अब्धिशयनः
पुं*
अब्धिः-शयनः -
विष्णु
L R Vaidya
English
abDi-Sayana {% m. %} a name of Vishṇu.
अभिधानचिन्तामणिः
Sanskrit
--source--
विष्णुर्जिष्णुजनार्दनौ हरिहृषीकेशाच्युताः केशवो
दाशार्हः पुरुषोत्तमोऽब्धिशयनोपेन्द्रावजेन्द्रानुजौ
विष्वक्सेननरायणौ जलशयो नारायणः श्रीपति-
र्दैत्यारिश्च पुराणयज्ञपुरुषस्तार्क्ष्यध्वजोऽधोक्षजः २१४
गोविन्दषड्बिन्दुमुकुन्दकृष्णा वैकुण्ठपद्मेशयपद्मनाभाः
वृषाकपिर्माधववासुदेवौ विश्वंभरः श्रीधरविश्वरूपौ २१५
दामोदरः शौरिसनातनौ विधुः पीताम्बरो मार्जजिनौ कुमोदकः
त्रिविक्रमो जह्नुचतुर्भुजौ पुनर्वसुः शतावर्तगदाग्रजौ स्वभूः २१६
मुञ्जकेशिवनमालिपुण्डरीकाक्षबभ्रुशशबिन्दुवेधसः
पृश्निशृङ्गधरणीधरात्मभूः पाण्डवायनसुवर्णबिन्दवः २१७
श्रीवत्सो देवकीसूनुर्गोपेन्द्रो विष्टरश्रवाः
सोमसिन्धुर्जगन्नाथो गोवर्धनधरोऽपि २१८
यदुनाथो गदाशार्ङ्गचक्रश्रीवत्सशङ्खभृत्
-wordlist-
विष्णु (पुं), जिष्णु (पुं), जनार्दन (पुं), हरिकेश (पुं), हृषीकेश (पुं), अच्युत (पुं), केशव (पुं), दाशार्ह (पुं), पुरुषोत्तम (पुं), अब्धिशयन (पुं), उपेन्द्र (पुं), अज (पुं), इन्द्रानुज (पुं), विष्वक्सेन (पुं), नरायण (पुं), जलशय (पुं), नारायण (पुं), श्रीपति (पुं), दैत्यारि (पुं), पुराणपुरुष (पुं), यज्ञपुरुष (पुं), तार्क्ष्यध्वज (पुं), अधोक्षज (पुं), गोविन्द (पुं), षड्बिन्दु (पुं), मुकुन्द (पुं), कृष्ण (पुं), वैकुण्ठ (पुं), पद्मेशय (पुं), पद्मनाभ (पुं), वृषाकपि (पुं), माधव (पुं), वासुदेव (पुं), विश्वम्भर (पुं), श्रीधर (पुं), विश्वरूप (पुं), दामोदर (पुं), शौरि (पुं), सनातन (पुं), विधु (पुं), पीताम्बर (पुं), मार्ज (पुं), जिन (पुं), कुमोदक (पुं), त्रिविक्रम (पुं), जह्नु (पुं), चतुर्भुज (पुं), पुनर्वसु (पुं), शतावर्त (पुं), गदाग्रज (पुं), स्वभू (पुं), मुञ्जकेशिन् (पुं), वनमालिन् (पुं), पुण्डरीकाक्ष (पुं), बभ्रु (पुं), शशबिन्दु (पुं), पृश्निशृङ्ग (पुं), धरणीधर (पुं), पाण्डवायन (पुं), सुवर्णबिन्दु (पुं), श्रीवत्स (पुं), देवकीसूनु (पुं), गोपेन्द्र (पुं), विष्टरश्रवस् (पुं), सोमसिन्धु (पुं), जगन्नाथ (पुं), गोवर्धनधर (पुं), यदुनाथ (पुं), गदाभृत् (पुं), शार्ङ्गभृत् (पुं), चक्रभृत् (पुं), श्रीवत्सभृत् (पुं), शङ्खभृत् (पुं)
शब्दकल्पद्रुमः
Sanskrit
अब्धिशयनः,
पुं,
(अब्धौ प्रलये समुद्रे शेते, शी +बाहुल्यात् कर्त्तरि ल्युट्, सप्तमीतत्पुरुषः ।) विष्णुः ।इति हेमचन्द्रः
(नारायणोहि प्रलये अब्धौशेते, यटुक्तं, --“आपो नारा इति प्रोक्ता आपो वै नरसूनवः ।ता यदस्यायनं पूर्व्वं तेन नारायणः स्मृतः” ।इति मनुः ।)