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अन्विताभिधानवाद (anvitAbhidhAnavAda)

 
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अन्विताभिधानवादः
पुं*
अन्वित-अभिधानवादः -
"मीमां सकों का एक सिद्धांत जिसके अनुसार वाक्य में शब्दों का अर्थ सामान्य या स्वतंत्र रूप से नहीं होता, बल्कि किसी विशेष वाक्य में एक दूसरे से संबद्ध होकर शब्द का जो अर्थ निकलता है, वही होता है"